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लाइव बिहार: कहा जाता है कि प्यार न समाज देखता न काल। प्यार जब परवान चढ़ता है तो बच्चे, रिश्ते-नाते सब पीछे छूट जाते हैं और प्रेमी प्रेमिका एक जिस्म दो जान बन जाते हैं और अंततः समाज के भय से मौत को गले लगाना ही मुनासिब समझते हैं।

ऐसा ही एक मामले से शनिवार को पालीगंज इलाके के लोग रूबरू हुए। शनिवार तड़के सिकंदरपुर गांव के बधार में एक युवक के शव पर ग्रामीणों की नजर पड़ी। पास में ही एक शादीशुदा महिला भी अचेतावस्था में पड़ी थी। यह खबर जंगल में लगी आग की तरह इलाके में फैल गई। जिसने भी सुना वह उस ओर दौड़ पड़ा। देखते ही देखते बधार में लोगों की भीड़ जमा हो गई। महिला और पुरुष को बधार में पड़ा देख लोग तरह-तरह की चर्चा करने लगे।

मृतक की पहचान मखमिलपुर निवासी 38 वर्षीय शंकर ठाकुर व महिला की पहचान लालगंज सेहरा निवासी संतोष चौधरी की पत्नी36 वर्षीय सुनीता देवी के रूप में की गई। इस बीच किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना करने के बाद दोनों को कब्जे में लेकर अनुमंडल अस्पताल पालीगंज भेज दिया। यहां इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
जानकारी मिलने पर अस्पताल पहुंची मृतक शंकर ठाकुर की पत्नी सुनीता देवी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि उसके पति और महिला के बीच बिगत एक वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस बात की जानकारी जब उसे मिली तब उसने अपने पति पर दबाब बनाना शुरू किया। दबाब बढ़ता देख दोनों चार माह पूर्व भाग गए। काफी खोजबीन के बाद दोनों का कहीं कुछ पता नहीं चला। आज पति की मौत की खबर मिली।

मृतक शंकर ठाकुर की पत्नी ने बताया कि उसका पति सेहरा बाजार में सैलून खोल रखा था उसी की कमाई से घर-परिवार चलता था। सैलून के सामने ही संतोष चौधरी का घर है । जिसमें वह पत्नी सुनीता व चार बच्चों के साथ रहता था। आमने-सामने रहने के कारण शंकर पर सुनीता की हर दिन मुलाकात होती थी। यह मुलाकात धिरे-धीरे प्यार में बदल गया और दोनों की एक दूसरे के साथ नजदीकियां बढ़ गई। प्यार का परवान चढ़ता गया और एक दिन ऐसा आया की दोनों बाल-बच्चों और पति पत्नी को छोड़ कर घर से भाग निकले।

कहती है पुलिस
इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि सिकंदरपुर गांव के बधार से एक पुरूष और एक महिला के शव को बरामद किया गया है। प्रथम दृष्टया दोनों ने जहर खाया हुआ प्रतीत होता है। मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

मृतक शंकर ठाकुर व मृतिका सुनीता देवी शादीशुदा थे। दोनों के चार-चार बच्चे भी हैं। लेकिन प्यार अंधा होता है वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए अंततः लोकलाज के भय से दोनों ने मौत को गले लगा लिया।

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