बिहार की राजनीति में एक बार फिर विकास, समीक्षा और विज़न का माहौल बन गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बहुचर्चित Nitish Kumar Samriddhi Yatra आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। पहले चरण में मुख्यमंत्री पश्चिम चंपारण के जिला मुख्यालय बेतिया पहुंचे, जहां प्रशासनिक तैयारियों के साथ-साथ सियासी उत्साह भी चरम पर नजर आया। यह यात्रा सरकार के दावों के मुताबिक जनकल्याण, विकास योजनाओं की ज़मीनी समीक्षा और भविष्य की रणनीति को मजबूती देने की कवायद है।
- Nitish Kumar Samriddhi Yatra: पटना एयरपोर्ट पर दिखी सत्ता और संगठन की एकजुटता
- Nitish Kumar Samriddhi Yatra: बेतिया में विकास योजनाओं की बौछार
- Nitish Kumar Samriddhi Yatra: अफसरशाही की होगी कड़ी समीक्षा
- Nitish Kumar Samriddhi Yatra: लंबी यात्राओं की सियासी विरासत
- Nitish Kumar Samriddhi Yatra: विकास के साथ सियासी संदेश
पटना एयरपोर्ट से रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री को नेताओं और सामाजिक संगठनों की ओर से शुभकामनाएं दी गईं। यह नजारा साफ संकेत दे रहा था कि Nitish Kumar Samriddhi Yatra सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन की साझा राजनीतिक पहल बन चुकी है।
Nitish Kumar Samriddhi Yatra: पटना एयरपोर्ट पर दिखी सत्ता और संगठन की एकजुटता
पटना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विदा करने के लिए कई वरीय नेता मौजूद रहे। बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव छोटू सिंह, दानापुर विधानसभा प्रभारी धीरज सिंह कुशवाहा, विधायक श्याम रजक, अमर सिंह और अरुण मांझी जैसे नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि Nitish Kumar Samriddhi Yatra को राजनीतिक स्तर पर भी पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है।
नेताओं की यह कतार महज़ औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि आने वाले दिनों में यह यात्रा सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखने और संगठनात्मक मजबूती दिखाने का बड़ा मंच बनेगी। सियासी गलियारों में इसे 2025 के चुनावी समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
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Nitish Kumar Samriddhi Yatra: बेतिया में विकास योजनाओं की बौछार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की Nitish Kumar Samriddhi Yatra का पहला पड़ाव बेतिया बना, जहां विकास का बड़ा पैकेज सामने आया। मुख्यमंत्री यहां 153 करोड़ रुपये की लागत से 125 योजनाओं का शिलान्यास करेंगे, जबकि 29 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 36 योजनाओं का उद्घाटन भी किया जाएगा।
इन योजनाओं में सड़क, भवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री जिले में चल रही विकासात्मक और कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे, ताकि योजनाओं की जमीनी हकीकत और अफसरशाही की कार्यशैली का आकलन किया जा सके।
Nitish Kumar Samriddhi Yatra: अफसरशाही की होगी कड़ी समीक्षा
सरकारी सूत्रों के मुताबिक Nitish Kumar Samriddhi Yatra के दौरान सिर्फ उद्घाटन और शिलान्यास तक सीमित नहीं रहा जाएगा। मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर योजनाओं की प्रगति, देरी और खामियों पर भी सवाल उठाएंगे। यही वजह है कि जिला प्रशासन से लेकर प्रखंड स्तर तक हलचल तेज है।
नीतीश कुमार की पहचान एक ऐसे मुख्यमंत्री के तौर पर रही है, जो योजनाओं की काग़ज़ी रिपोर्ट से ज़्यादा ज़मीनी तस्वीर देखना पसंद करते हैं। इस यात्रा में भी वही मॉडल अपनाया जा रहा है।
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Nitish Kumar Samriddhi Yatra: लंबी यात्राओं की सियासी विरासत
नीतीश कुमार का सियासी सफर यात्राओं से भरा रहा है। इससे पहले वे विकास यात्रा, धन्यवाद यात्रा, प्रवास यात्रा, विश्वास यात्रा, सेवा यात्रा, अधिकार यात्रा, संकल्प यात्रा, संपर्क यात्रा, निश्चय यात्रा, विकास समीक्षा यात्रा, जल-जीवन-हरियाली यात्रा, समाज सुधार अभियान, समाधान यात्रा और प्रगति यात्रा जैसे अभियानों के ज़रिये जनता से सीधा संवाद करते रहे हैं।
Nitish Kumar Samriddhi Yatra उसी श्रृंखला की अगली कड़ी मानी जा रही है, जिसमें विकास के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी निहित है। जानकार मानते हैं कि यह यात्रा आने वाले समय में सरकार की उपलब्धियों को दोबारा स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।
Nitish Kumar Samriddhi Yatra: विकास के साथ सियासी संदेश
कुल मिलाकर, बेतिया से शुरू हुई Nitish Kumar Samriddhi Yatra केवल योजनाओं का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह नीतीश कुमार की सियासी रणनीति की भी झलक देती है। जहां एक ओर सरकार विकास और जनकल्याण का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह यात्रा आने वाले राजनीतिक दौर के लिए जमीन तैयार करती दिखाई दे रही है।
अब सबकी निगाह इस बात पर है कि यह यात्रा जनता के बीच कितना असर छोड़ पाती है और क्या यह वाकई बिहार के विकास की नई पटकथा लिख पाएगी या फिर सिर्फ एक और राजनीतिक अभियान बनकर रह जाएगी।
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