Noida Sector 150 Accident: सिस्टम की निष्क्रियता ने बढ़ाई भयावहता
नोएडा सेक्टर-150 में हाल ही में हुई घटना ने देशभर में प्रशासन और आपदा प्रबंधन की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 27 साल का युवक जलभराव में फंसा रहा, मदद के लिए चीखा, लेकिन पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौजूद रहने के बावजूद कोई निर्णायक कदम नहीं उठा सकीं।
यह सिर्फ प्रशासनिक असफलता नहीं थी, बल्कि संस्थागत निष्क्रियता का परिणाम था। घटना स्थल से महज 25 किलोमीटर दूर हिंडन एयर बेस मौजूद था, जहां हेलिकॉप्टर और प्रशिक्षित पायलट उपलब्ध थे। लेकिन इरादों और निर्णय की कमी ने मानव जीवन की अहमियत को तार-तार कर दिया।
Noida Sector 150 Accident: संसाधनों के बावजूद निष्क्रियता
Noida Sector 150 Accident: क्या गलत हुआ?
संसाधन मौजूद होने के बावजूद निर्णायक कदम न उठाना और प्रोटोकॉल के बहाने बनाना इस हादसे को और भयावह बनाता है। अमेरिका के नियाग्रा फॉल की घटना से तुलना करने पर पता चलता है कि वहां एक नन्ही चिड़िया के लिए हेलिकॉप्टर तुरंत उतारा गया, जबकि इंसान के लिए बहाने बने।
इससे सवाल उठता है कि जब मानव जीवन खतरे में हो तो सिस्टम इतना धीमा क्यों होता है? यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी की कमी भी दर्शाता है।
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Noida Sector 150 Accident: विकास और मानव जीवन
विकास सिर्फ़ कंक्रीट और फ्लाईओवर नहीं

हमारे शहरों में चौड़ी सड़कें, बहुमंज़िली इमारतें और फ्लाईओवर की चमक है, लेकिन हर मानसून में सड़कों पर नदियाँ बहती हैं और अंडरपास मौत के कुएँ बन जाते हैं। असली विकास वह है जो आपदा के क्षण में त्वरित निर्णय और trained हाथों की तत्परता दिखाए।
नोएडा सेक्टर-150 हादसा इसलिए और भयावह है क्योंकि यह कोई असंभाव्य दुर्घटना नहीं, बल्कि संस्थागत निष्क्रियता का परिणाम था।
Noida Sector 150 Accident: संवेदनहीनता और जवाबदेही की कमी
हम सब मूक साझेदार हैं
सिस्टम की विफलता के साथ-साथ हमारी दिखावटी संवेदना भी इस त्रासदी का हिस्सा है। हम हादसे के बाद रोते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, और अगले दिन सब भूल जाते हैं। यही चक्र सिस्टम को मजबूत करता है।
यदि हम हर हादसे के बाद जवाबदेही तय करने, निर्णय त्वरित लेने और संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करने की मांग नहीं करेंगे, तो ऐसी घटनाएँ जारी रहेंगी।
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Noida Sector 150 Accident
नोएडा सेक्टर-150 हादसा चेतावनी देता है कि सिस्टम और नागरिक दोनों को बदलना होगा। हेलिकॉप्टर, पायलट और संसाधन मौजूद होने के बावजूद यदि इंसान की जान बचाई नहीं जाती, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सभ्य समाज की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
हमारे शहरों में बुनियादी तैयारी, आपदा प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की जरूरत है। नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी और दबाव बनाए रखना होगा।
आज यह घटना नोएडा में हुई, पर कल किसी और शहर, किसी और व्यक्ति के साथ भी हो सकती है। यही सबसे डरावना सत्य है।
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