Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: 3 बार धमकी, सुनवाई टली — वकील ने बताया साजिश, सोशल मीडिया पर भी उठा बड़ा सवाल

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जमानत सुनवाई से पहले बार-बार बम धमकी से बढ़ा विवाद
Highlights
  • • बेऊर जेल में बंद हैं सांसद पप्पू यादव • जमानत याचिका पर सुनवाई बार-बार टली • 24 घंटे में 2 बार कोर्ट को बम धमकी • 4 दिन में 3 धमकियों का दावा • वकील ने बताया सुनियोजित साजिश • सोशल मीडिया पर पुलिस पर सवाल

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव इस समय बेऊर जेल में बंद हैं, लेकिन उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई लगातार टलती जा रही है। सुनवाई टलने की वजह कोई कानूनी तकनीकी कारण नहीं, बल्कि पटना सिविल कोर्ट को मिल रही लगातार बम धमकियाँ बन रही हैं। बीते 24 घंटे के भीतर दो बार कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सांसद के अधिवक्ता ने गंभीर साजिश का आरोप लगाकर मामले को और राजनीतिक-कानूनी तूल दे दिया है।

Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: वकील का बड़ा आरोप — ‘जानबूझकर बाधित हो रही सुनवाई’

सांसद पप्पू यादव के अधिवक्ता शिव नंदन भारती ने पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह सब संयोग नहीं हो सकता। उनका आरोप है कि सुनियोजित तरीके से बम की अफवाह या धमकी फैलाकर कोर्ट की कार्यवाही को रोका जा रहा है ताकि जमानत याचिका पर सुनवाई आगे न बढ़ सके।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि:
• सांसद को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है
• सुनवाई से ठीक पहले धमकियाँ मिलना संदेह पैदा कर
ता है
• न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश हो रही है

अधिवक्ता के मुताबिक यदि अदालत की कार्यवाही बिना व्यवधान के चलने दी जाए तो मामले में राहत मिलने की संभावना बन सकती है। उन्होंने निष्पक्ष, नियमित और सुरक्षित सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: स्वास्थ्य को लेकर भी जताई चिंता

Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: 3 बार धमकी, सुनवाई टली — वकील ने बताया साजिश, सोशल मीडिया पर भी उठा बड़ा सवाल 1

सिर्फ कानूनी देरी ही नहीं, बल्कि सांसद के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई गई है। अधिवक्ता शिव नंदन भारती ने कहा कि जेल में बंद रहने के दौरान उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है और लगातार सुनवाई टलने से मानसिक व शारीरिक दोनों तरह का दबाव बढ़ रहा है।

उन्होंने अदालत से अपील की कि:
• मामले की शीघ्र सुनवाई हो
• अनावश्यक बाधाओं को रोका जाए
• सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए

ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो और आरोपी को कानूनी अधिकार समय पर मिल सके।

Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: 4 दिन में 3 धमकियाँ — सोशल मीडिया पर उठे सवाल

इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर सवाल उठने लगे। पप्पू यादव के समर्थन में किए गए एक पोस्ट में पूरी घटना पर संदेह जताया गया।

पोस्ट में लिखा गया:

“जब से माननीय सांसद श्री पप्पू यादव जी को गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेजा गया है और उनकी सुनवाई होनी है, तब से 4 दिन के अंदर 3 बार कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी ईमेल से मिली है — यह इत्तेफाक है या साजिश?”

इस पोस्ट में पुलिस प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए गए। लिखा गया कि:
• ईमेल भेजने वाले का अब तक पता नहीं चल पाया
• एक सांसद की सुरक्षा का दावा करने वाली पुलिस धमकी भेजने वालों तक नहीं पहुंच पा रही
• प्रशासन की कार्यशैली पर संदेह है

पोस्ट में यह भी कहा गया कि जनता की आवाज को दबाने की कोशिश सफल नहीं होगी और सांसद की “लड़ाई जारी रहेगी”।

Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: पुलिस जांच पर भी उठे प्रश्न

लगातार मिल रही धमकियों के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हैं, लेकिन अब तक धमकी भेजने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं हो सकी है। यही वजह है कि विपक्षी समर्थक और सोशल मीडिया यूज़र्स पुलिस की कार्यक्षमता पर सवाल उठा रहे हैं।

मुख्य सवाल जो उठ रहे हैं:
1. धमकियाँ सुनवाई से पहले ही क्यों मिल रही हैं?
2. ईमेल ट्रेस करने में देरी क्यों?
3. क्या यह न्यायिक प्रक्रिया रोकने की कोशिश है?

हालांकि आधिकारिक स्तर पर पुलिस ने इसे गंभीरता से लेकर जांच जारी होने की बात कही है।

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Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: न्यायिक प्रक्रिया पर असर

बार-बार मिल रही धमकियों का सीधा असर अदालत की कार्यवाही पर पड़ा है। सुरक्षा कारणों से:
• कोर्ट परिसर खाली कराया गया
• सुनवाई स्थगित करनी पड़ी
• वकीलों और आम लोगों की एंट्री सीमित हुई

इससे न सिर्फ पप्पू यादव का मामला प्रभावित हुआ, बल्कि अन्य मामलों की सुनवाई भी बाधित हुई।

Pappu Yadav Bail Hearing Bomb Threat: राजनीतिक रंग लेने लगा मामला

सांसद की गिरफ्तारी, जमानत याचिका और अब धमकियों के सिलसिले ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग भी दे दिया है। समर्थक इसे प्रशासनिक दबाव बता रहे हैं, जबकि आधिकारिक एजेंसियाँ इसे सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला मान रही हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि:
• मामला कानूनी से ज्यादा राजनीतिक विमर्श में जा सकता है
• सोशल मीडिया नैरेटिव सुनवाई पर जनमत बना सकता है
• सुरक्षा बनाम साजिश की बहस और तेज होगी

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