पिता की हत्या के बाद बेटे ने खोला राजनीतिक मोर्चा, चिराग पासवान के खिलाफ..जानिए, सियासी बदला

By Aslam Abbas 118 Views
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पटना डेस्कः चिराग पासवान को राजनीतिक रुप से बड़ा झटका लगा है। पिता की एके-47 से भूनकर हत्या के बाद अब बेटे ने भी सियासी सफर को आगे बढ़ाने के लिए मोर्चा खोल दिया है। एनडीए में तिरहुत विधान परिषद उपचुनाव को लेकर चल रहे रार के बीच लोजपा(रामविलास) के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश रौशन ने पार्टी से इस्तीफा दिया है। राकेश रौशन चिराग की पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ही आईटी सेल के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे।

राकेश रौशन ने पिछले दिनों चुनाव लड़ने के संकेत दिए तो चिराग पासवान की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। फिर क्या था राकेश ने नोटिस का जवाब देने के बदले अपना इस्तीफा ही सौप दिया। इतना ही नहीं राकेश ने इस्तीफा जारी करते हुए जो पत्र जारी किया है उसमें चिराग को नसीहत भी दी है। उन्होंने चिराग के बार बार राजनैतिक गठजोड़ करने पर कहा है कि बार-बार गठबंधन की राजनीति के कारण पार्टी के हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं का राजनीतिक भविष्य प्रभावित हुआ है और ख़त्म हुआ, जो पार्टी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और विकास के लिए उचित नहीं है।

गौरतलब है कि तिरहुत विधान परिषद क्षेत्र से जदयू के देवेशचंद्र ठाकुर एमएलसी थे। हालाँकि उनके सीतामढ़ी संसदीय क्षेत्र से सांसद बन जाने के कारण तिरहुत विधान परिषद उपचुनाव हो रहा है। जदयू ने अपनी इस सीट पर अभिषेक झा को उम्मीदवार बनाया है। अभिषेक झा और जदयू के कई अन्य नेता पिछले कुछ समय से लगातार इस इलाके में चुनाव प्रचार में लगे हैं। हालांकि राकेश रौशन ने भी यहाँ से चुनाव में उतरने की बात कर अभिषेक के टेंशन बढ़ा दी थी।

राकेश रौशन को वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग ने राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था. राघोपुर में लालू यादव के पुत्र राजद नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ राकेश को 25 हजार वोट आए थे. ऐसे में राकेश रौशन के लोकप्रिय चेहरे के रूप में अपने को पेश कर चुके हैं. अब इसी को भुनाने के लिए वे तिरहुत विधान परिषद उपचुनाव में किस्मत आजमाएंगे।

राकेश रौशन उत्तर बिहार की राजनीति में बड़े नाम रहे बाहुबली छवि वाले दिवंगत बृजनाथी सिंह के बेटे हैं. राजपूत जाति से आने वाले बृजनाथी सिंह की वर्ष 2016 में  एके-47 भूनकर हत्या हुई थी. पुलिस ने अपनी जाँच में पाया था कि  प्रमुख के चुनाव को लेकर उनकी हत्या की गई थी. बृजनाथी सिंह की हत्या में नामजद आरोपी सुनील राय के भाई सुबोध राय की पत्नी और बृजनाथी के भाई अमरनाथी की पत्नी दावेदार होती. बृजनाथी के वर्चस्व से सुबोध की पत्नी के जीतने की उम्मीद काफी कम थी. कहा गया कि इसलिए उसने भाई के साथ मिलकर बृजनाथी की हत्या करने की साजिश रची.  इसी में फरवरी 2016 उनकी हत्या हुई थी।

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