Rohini Acharya: कोर्ट से झटका, घर में भूचाल,भड़क जाएंगे तेजस्वी यादव-रोहिणी आचार्य के तंज़ से लालू परिवार आमने-सामने

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लालू परिवार में बढ़ती सियासी दरार
Highlights
  • • Rohini Acharya Land for Job Case का सियासी असर • लालू परिवार के भीतर बढ़ता टकराव • तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल • संजय यादव और रमीज नेमत की भूमिका • राजद की विरासत पर मंडराता संकट

दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत के एक फैसले ने न केवल राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि लालू परिवार के भीतर लंबे समय से सुलग रही आग को भी खुली लपटों में बदल दिया है। ज़मीन के बदले नौकरी घोटाले में अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मामला अब केवल क़ानूनी नहीं रहा, बल्कि यह विरासत, नेतृत्व और नियंत्रण की लड़ाई का रूप ले चुका है।

लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और मीसा भारती समेत तमाम आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुक़दमा चलाने के आदेश ने राजद को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ संगठन से अधिक परिवार चर्चा का केंद्र बन गया है।

Rohini Acharya Land for Job Case और अदालत के फैसले का राजनीतिक असर

अदालत के आदेश के बाद सियासी गलियारों में बयानबाज़ी तेज़ हो गई, लेकिन असली उथल-पुथल अदालत के बाहर, लालू परिवार के भीतर महसूस की जा रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही परिवार के अंदर असंतोष की परतें दिखने लगी थीं, जो अब खुलकर सामने आ गई हैं।

यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के ज़रिये बिना नाम लिए अपने ही परिवार और पार्टी के भीतर मौजूद कुछ लोगों पर तीखा हमला बोला। उनके शब्दों में पीड़ा भी थी और सियासी व्यंग्य भी।

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Rohini Acharya Land for Job Case और रोहिणी के बयान का संकेत

Rohini Acharya: कोर्ट से झटका, घर में भूचाल,भड़क जाएंगे तेजस्वी यादव-रोहिणी आचार्य के तंज़ से लालू परिवार आमने-सामने 1

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि किसी “बड़ी विरासत” को नष्ट करने के लिए बाहरी दुश्मनों की ज़रूरत नहीं होती, अपने ही लोग और कुछ “नए बने अपने” ही काफी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब अहंकार विवेक पर हावी हो जाता है, तब विनाशक ही मार्गदर्शक बन जाते हैं।

उनकी यह टिप्पणी सीधे-सीधे पार्टी नेतृत्व और रणनीति पर सवाल खड़े करती है। राजनीतिक हलकों में इसे तेजस्वी यादव और उनके करीबी माने जाने वाले रणनीतिकारों पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।

Rohini Acharya Land for Job Case और संजय यादव का उभार

रोहिणी के बयान के बाद सबसे ज़्यादा चर्चा तेजस्वी यादव के रणनीतिकार संजय यादव को लेकर हो रही है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ से आने वाले संजय यादव 2012 के आसपास तेजस्वी के संपर्क में आए थे। एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी की नौकरी छोड़कर पटना आना और तेजस्वी की सियासत का प्रमुख चेहरा बन जाना, पार्टी के भीतर कई पुराने नेताओं को पहले से ही असहज करता रहा है।

आज संजय यादव को तेजस्वी यादव की राजनीति का “माइंड” कहा जाता है, और यही बात लालू परिवार के भीतर असंतुलन का कारण बनती दिख रही है।

Rohini Acharya Land for Job Case और सोशल मीडिया रणनीति पर सवाल

दूसरी ओर, रमीज नेमत का नाम भी इस पूरे विवाद में उभरकर सामने आया है। पार्टी के सोशल मीडिया और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले रमीज नेमत का नाम पहले भी विवादों से जुड़ता रहा है। रोहिणी के बयान के बाद उनके समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव से कथित नज़दीकियों की चर्चा ने सियासी अटकलों को और तेज़ कर दिया है।

यह विवाद केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजद की रणनीति, दिशा और नियंत्रण को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

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Rohini Acharya Land for Job Case और तेज प्रताप का ‘जयचंद’ आरोप

तेज प्रताप यादव पहले ही भीतरघात के आरोप लगाते हुए ‘जयचंद’ शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं। अब रोहिणी आचार्य के खुलकर सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि मामला किसी एक बयान या ट्वीट तक सीमित नहीं है।

यह संघर्ष अदालत की चारदीवारी से बाहर निकलकर राजद की विरासत और भविष्य की लड़ाई में बदल चुका है।

Rohini Acharya Land for Job Case: परिवार बनाम पार्टी की लड़ाई

आज राजद के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अदालत में क्या होगा, बल्कि यह भी है कि पार्टी की बागडोर किसके हाथ में रहेगी। क्या नेतृत्व पूरी तरह नई पीढ़ी के हाथों में जाएगा, या परिवार के भीतर संतुलन बनाना अब भी संभव है?

Rohini Acharya Land for Job Case: आगे की राजनीति

राउज एवेन्यू की अदालत में चल रही क़ानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजद के भीतर सियासी भूचाल के संकेत साफ़ हैं। यह मामला अब केवल भ्रष्टाचार के आरोपों का नहीं, बल्कि पहचान, वजूद और नेतृत्व की जंग का बन चुका है।

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