Saat Nishchay 3: बिहार में आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने की नई पहल

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सात निश्चय-3 के तहत बिहार सरकार की नई पहल
Highlights
  • • सात निश्चय-3 के तहत Ease of Living पर फोकस • हफ्ते में दो दिन अनिवार्य जनसुनवाई • सोमवार और शुक्रवार को अफसरों से सीधी मुलाकात • शिकायत पंजी और अनुश्रवण की व्यवस्था • 19 जनवरी 2026 से लागू होगा नियम

20 नवंबर 2025 को राज्य में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद बिहार को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लक्ष्य के साथ सात निश्चय-3 के कार्यक्रमों को लागू किया गया। इन सात निश्चयों में सातवां और अत्यंत महत्वपूर्ण निश्चय है—‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ (Ease of Living)। इस निश्चय का मूल उद्देश्य राज्य के नागरिकों के दैनिक जीवन में आने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों को कम करना और सरकारी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, सुलभ और जवाबदेह बनाना है।

इसी दिशा में बिहार सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है, जिससे आम जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सकेगा।

Bihar Ease of Living: अब अफसरों से मिलने में नहीं होगी परेशानी

अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि आम लोग अपनी समस्याओं को लेकर जब सरकारी कार्यालय पहुंचते हैं, तो संबंधित अधिकारी या पदाधिकारी मौजूद नहीं रहते। कई बार उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय, धन और ऊर्जा की अनावश्यक बर्बादी होती है।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने निर्णय लिया है कि अब राज्य के नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में अपने काम के लिए किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।

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Bihar Government New Rules: हफ्ते में दो दिन जनसुनवाई अनिवार्य

सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के तहत अब प्रत्येक सप्ताह के दो कार्यदिवस—सोमवार और शुक्रवार को राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में आम लोग अपनी शिकायतों के समाधान के लिए सीधे संबंधित पदाधिकारी से मिल सकेंगे।

यह व्यवस्था निम्न सभी स्तरों पर लागू होगी—
• ग्राम पंचायत
• थाना
• अंचल
• प्रखंड
• अनुमंडल
• जिला
• प्रमंडल
• राज्य स्तर के सभी कार्यालय

इन दोनों निर्धारित दिनों में सभी संबंधित पदाधिकारी अपने-अपने कार्यालय कक्ष में उपस्थित रहेंगे।

Bihar Public Grievance System: सम्मान और संवेदनशीलता पर जोर

Saat Nishchay 3: बिहार में आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने की नई पहल 1
Saat Nishchay 3: बिहार में आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने की नई पहल 2

सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन दिनों पर पदाधिकारी केवल उपस्थित ही नहीं रहेंगे, बल्कि आम नागरिकों से सम्मानपूर्वक मिलेंगे। शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाएगा और उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

यह पहल प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत मानी जा रही है, जहां जनता को बोझ नहीं बल्कि केंद्र में रखा गया है।

सरकारी कार्यालयों में सुविधाएं भी होंगी सुनिश्चित

सिर्फ मुलाकात ही नहीं, बल्कि आगंतुकों की सुविधा को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सभी सरकारी कार्यालयों में
• बैठने की उचित व्यवस्था
• पेयजल की सुविधा
• शौचालय की उपलब्धता

सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही आगंतुकों से प्राप्त शिकायतों के लिए शिकायत पंजी का संधारण किया जाएगा और उनके निरंतर अनुश्रवण की व्यवस्था भी होगी, ताकि समस्या केवल दर्ज न रहे, बल्कि उसका समाधान भी हो।

19 जनवरी 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था

सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यह नई व्यवस्था 19 जनवरी 2026 से प्रभावी रूप से लागू कर दी जाए। इसके लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आम जनता को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से हो सकेगा।

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Saat Nishchay 3 का उद्देश्य: प्रशासन को बनाना जन-केन्द्रित

‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ निश्चय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि शासन के दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी व्यवस्था आम नागरिकों के लिए भय या असुविधा का कारण न बने, बल्कि सहयोग और समाधान का माध्यम बने।

सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि जनता का भरोसा भी प्रशासन पर और गहरा होगा।

सुझाव देने का अवसर भी दिया गया

इस नई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने आम नागरिकों से सुझाव भी मांगे हैं। यदि कोई नागरिक इस प्रणाली से संबंधित कोई विशिष्ट सुझाव देना चाहता है, तो वह 10 जनवरी 2026 तक निर्धारित माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकता है।

निष्कर्ष: Ease of Living की दिशा में बड़ा कदम

सात निश्चय-3 के तहत लिया गया यह निर्णय बिहार में प्रशासन और जनता के संबंधों को नया आयाम देने वाला माना जा रहा है। यदि इसे ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया गया, तो यह व्यवस्था वास्तव में आम नागरिकों के जीवन को आसान बना सकती है और बिहार को सुशासन की दिशा में एक मजबूत कदम आगे ले जा सकती है।

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