माघ शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर आज पूरे बिहार, विशेषकर राजधानी पटना में सरस्वती पूजा पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि आज एक साथ कई दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन रहा है। विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
- Saraswati puja 2026: पांच शुभ योग में सरस्वती पूजा का विशेष महत्व
- Saraswati puja 2026: अक्षरारंभ संस्कार, शिक्षा की पहली सीढ़ी
- Saraswati puja 2026: मां सरस्वती के प्रतीकों का आध्यात्मिक अर्थ
- Saraswati puja 2026: पीले वस्त्र और बसंत पंचमी की परंपरा
- Saraswati puja 2026: सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
- Saraswati puja 2026: राशि के अनुसार मां सरस्वती की पूजा विधि
- Saraswati puja 2026: पटना में आर्टिफिशियल तालाब में होगा मूर्ति विसर्जन
- Saraswati puja 2026: स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
- Saraswati puja 2026: गंगा में विशेष सफाई अभियान
Saraswati puja 2026: पांच शुभ योग में सरस्वती पूजा का विशेष महत्व
आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि पर पूर्वाभाद्र और उत्तरभाद्र नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही परिघ योग, शिव योग, गजकेसरी योग, लक्ष्मी-नारायण योग और बुधादित्य योग का दुर्लभ मेल इस पर्व को और भी शुभ बना रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इतने शुभ योगों में की गई पूजा से विद्या, विवेक, वाणी और रचनात्मकता में विशेष वृद्धि होती है।
पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में सुबह से ही मंदिरों और पूजा पंडालों में भक्तों की भीड़ देखी जा रही है। पूजा के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर बसंत पंचमी की शुभकामनाएं दे रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में फूल, मूर्ति, पूजन सामग्री और पीले वस्त्रों के बाजार सजे हुए हैं।
Saraswati puja 2026: अक्षरारंभ संस्कार, शिक्षा की पहली सीढ़ी

सरस्वती पूजा के दिन नवजात और छोटे बच्चों का अक्षरारंभ संस्कार करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस परंपरागत संस्कार के माध्यम से बच्चों को औपचारिक रूप से शिक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ाया जाता है।
अक्षरारंभ संस्कार में माता-पिता, गुरु, आचार्य या पुरोहित बच्चों से पहली बार ॐ, श्री, अ जैसे पवित्र अक्षरों का लेखन करवाते हैं। मान्यता है कि इस दिन से शिक्षा आरंभ करने पर बालक में ज्ञान, संस्कार, विवेक और स्मरण शक्ति का समुचित विकास होता है। इसलिए सरस्वती पूजा को विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए विशेष महत्व का दिन माना जाता है।
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Saraswati puja 2026: मां सरस्वती के प्रतीकों का आध्यात्मिक अर्थ
मां सरस्वती का श्वेत वर्ण पवित्रता, शुद्धता, शांति और सात्विकता का प्रतीक है। यह रंग मन की निर्मलता और सांसारिक मोह से मुक्ति का संकेत देता है।
Saraswati puja 2026: हंस वाहन का संदेश
मां सरस्वती का वाहन हंस विवेक का प्रतीक माना जाता है। हंस दूध और पानी को अलग करने की क्षमता रखता है, जो इस बात का संकेत है कि साधक को सत्य और असत्य के बीच भेद करना सीखना चाहिए।
Saraswati puja 2026: वीणा और नाद तत्व का महत्व
माता के हाथ में वीणा यह दर्शाती है कि नाद या ध्वनि ही ब्रह्म तक पहुंचने का माध्यम है। मंत्र-जप, भजन, कीर्तन और स्वाध्याय के माध्यम से सरस्वती तत्व को जागृत किया जा सकता है, जिससे आंतरिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
Saraswati puja 2026: पीले वस्त्र और बसंत पंचमी की परंपरा
बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा होता है, जो ज्ञान, धन और शुभता का कारक माना जाता है। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने भी माघ शुक्ल पंचमी को पीतांबर धारण कर मां सरस्वती का पूजन किया था। पीला रंग रिश्तों में मधुरता, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
Saraswati puja 2026: सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
• पंचमी तिथि: देर रात 12:22 बजे तक
• चर, लाभ और अमृत मुहूर्त: प्रातः 06:38 बजे से 10:40 बजे तक
• अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:40 बजे से 12:23 बजे तक
• शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 01:22 बजे तक
• वृष लग्न मुहूर्त: दोपहर 12:28 बजे से 02:25 बजे तक
Saraswati puja 2026: राशि के अनुसार मां सरस्वती की पूजा विधि
राशि के अनुसार विशेष वस्तुएं अर्पित करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
• मेष: सिंदूर, लाल फूल, गुलाबी अबीर
• वृष: हरे रंग की कलम, पीला फूल
• मिथुन: श्वेत कलम, अपराजिता पुष्प, नारियल
• कर्क: लाल कलम, इत्र, अभ्रक
• सिंह: पीली कलम, लाल फूल, अभ्रक
• कन्या: गुड़, अबीर, इत्र और पुस्तक दान
• तुला: नीली कलम, पंचामृत, गुलाबी अबीर
• वृश्चिक: सफेद रेशमी वस्त्र, ऋतुफल, गंगाजल
• धनु: श्वेत चंदन, अबीर, पीला फूल
• मकर: अरवा चावल, दही, पुष्प माला, शहद
• कुंभ: खीर, पीला अबीर, इत्र
• मीन: सफेद वस्त्र, पीला फूल, घी
Saraswati puja 2026: पटना में आर्टिफिशियल तालाब में होगा मूर्ति विसर्जन
सरस्वती पूजा के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पटना नगर निगम द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। इस वर्ष मूर्ति विसर्जन केवल आर्टिफिशियल तालाबों में ही किया जाएगा। इसके लिए शहर के विभिन्न अंचलों में कुल सात कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं।
बांकीपुर अंचल में लॉ कॉलेज घाट, पाटलिपुत्र अंचल में पाटी पुल घाट और मीनार घाट, अजीमाबाद अंचल में घाट और मित्तन घाट तथा पटना सिटी अंचल में कंगन घाट और दमराही घाट पर आर्टिफिशियल तालाब तैयार किए गए हैं। सभी स्थानों पर बैरिकेडिंग और प्रकाश की समुचित व्यवस्था की गई है।
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Saraswati puja 2026: स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य गंगा और अन्य जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना है। सरस्वती पूजा के दौरान नगर निगम की टीमें पंडालों की निगरानी करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि पूजा आयोजन मानकों के अनुरूप हो।
लोगों से अपील की गई है कि पूजा सामग्री इधर-उधर न फेंकें, सूखे और गीले कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन का उपयोग करें और मूर्ति विसर्जन केवल अपने संबंधित अंचल के कृत्रिम तालाब में ही करें।
Saraswati puja 2026: गंगा में विशेष सफाई अभियान
सरस्वती पूजा के दौरान पटना नगर निगम द्वारा गंगा नदी और अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही पूजा को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए जागरूकता टीमें घाटों पर तैनात रहेंगी, जो श्रद्धालुओं और पूजा समितियों को नॉन-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग से बचने के लिए प्रेरित करेंगी।
इस प्रकार, आज सरस्वती पूजा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का पर्व है, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का भी सशक्त संदेश दे रही है।
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