Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: राजनीति से आगे मानवता की सेवा का नाम था सुशील मोदी

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Sushil Kumar Modi Birth Anniversary पर समाज सेवा को समर्पित आयोजन
Highlights
  • • सुशील मोदी का कम चर्चित सामाजिक पक्ष • दधीचि देह दान समिति से जुड़ा योगदान • शादी में उपहार की जगह सेवा का संदेश • अंगदान और देहदान को लेकर जागरूकता अभियान • जयंती पर रक्त सेवा और चश्मा बैंक की पहल

बिहार की राजनीति में सुशील कुमार मोदी को अक्सर रणनीतिकार, वित्तीय प्रबंधन के जानकार और गठबंधन राजनीति के कुशल सूत्रधार के रूप में याद किया जाता है। लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक ऐसा पहलू भी था, जो सत्ता, चुनाव और पद से कहीं ऊपर मानवता और सेवा से जुड़ा हुआ था। यह पक्ष अपेक्षाकृत कम चर्चा में रहा, जबकि यही वह पहचान थी जिसने उन्हें एक संवेदनशील सामाजिक उन्नायक के रूप में स्थापित किया।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी समाज के लिए ऐसा कार्य किया जा सकता है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे। सेवा, त्याग और सामाजिक चेतना उनके जीवन की स्थायी पहचान रही।

Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: सामाजिक उन्नायक के रूप में सुशील मोदी की भूमिका

सुशील कुमार मोदी ने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं माना, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का साधन समझा। बिहार में जब सामाजिक सरोकारों की चर्चा होती है, तो उनका योगदान अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने वर्षों पहले यह समझ लिया था कि समाज की सबसे बड़ी जरूरत संवेदनशीलता और जागरूकता है।

उन्होंने अपने सामाजिक जीवन में ऐसे मुद्दों को उठाया, जिन पर उस दौर में खुलकर बात नहीं होती थी। देहदान और अंगदान जैसे विषयों को उन्होंने सामाजिक आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया, ताकि मृत्यु के बाद भी किसी का जीवन किसी और के लिए उम्मीद बन सके।

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Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: ‘दधीचि देह दान समिति’ और प्रेरणा का स्रोत

वर्ष 2013 में ‘दधीचि देह दान समिति’ का गठन किया गया। इस समिति के पीछे जो विचार था, वह भारतीय संस्कृति के त्याग और बलिदान के आदर्शों से जुड़ा हुआ था। ऋषि दधीचि के जीवन से प्रेरित होकर यह सोच विकसित हुई कि मानव शरीर भी समाज के काम आ सकता है।

इसके साथ ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा अंगदान किए जाने की घटना ने इस विचार को और मजबूती दी। यही से वह प्रेरणा मिली, जिसने इस अभियान को संगठित रूप दिया। सुशील मोदी ने स्वयं आगे बढ़कर न केवल इस विचार को अपनाया, बल्कि इसे जन आंदोलन बनाने की दिशा में लगातार काम किया।

Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: शादी में उपहार नहीं, सेवा का संकल्प

सुशील कुमार मोदी की सामाजिक सोच का सबसे अनोखा उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने अपने बेटे की शादी में एक असाधारण निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई उपहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई देना ही चाहता है, तो वह देहदान का संकल्प पत्र भरे।

यह निर्णय केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देने का प्रयास था कि खुशियों के अवसर भी सेवा से जोड़े जा सकते हैं। उस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने संकल्प लिया और यह पहल चर्चा का विषय बन गई।

Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: पहले स्वयं किया अंगदान

अंगदान के विषय पर समाज में भरोसा पैदा करने के लिए उन्होंने पहले स्वयं पहल की। उन्होंने अपना अंगदान कर यह संदेश दिया कि जो बात दूसरों से कही जा रही है, वह पहले खुद पर लागू होनी चाहिए।

इसके बाद लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ी। देहदान, अंगदान और प्लाज्मा दान को लेकर कई अभियान चलाए गए। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ते गए और संकल्प पत्र भरने लगे। यह सामाजिक चेतना का ऐसा उदाहरण था, जिसने हजारों परिवारों को नई उम्मीद दी।

Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: जयंती पर सेवा का जीवंत स्वरूप

स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी की स्मृति में उनकी जयंती को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया। इस अवसर पर सेवा को केंद्र में रखते हुए रक्त सेवा और चश्मा बैंक के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया गया।

राजधानी के ‘मां ब्लड सेंटर’ में आयोजित कार्यक्रम में सेवा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। रक्तदान के साथ-साथ नेत्र जांच की गई और जरूरतमंदों को निशुल्क पावर वाले चश्मे देने की प्रक्रिया शुरू की गई।

Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: चश्मा बैंक से जरूरतमंदों को राहत

इस विशेष पहल के तहत 65 जरूरतमंद लोगों की नेत्र जांच की गई और उन्हें निशुल्क चश्मा देने के लिए स्क्रीनिंग की गई। यह कार्यक्रम सुशील मोदी के उस विचार को आगे बढ़ाता है, जिसमें सेवा को सम्मान और श्रद्धांजलि का सबसे सशक्त माध्यम माना गया।

मां वैष्णो देवी सेवा समिति और मां ब्लड सेंटर के सहयोग से आयोजित इस शिविर ने यह साबित किया कि समाज सेवा का भाव केवल भाषणों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से जीवित रहता है।

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Sushil Kumar Modi Birth Anniversary: राजनीति से परे एक स्थायी विरासत

सुशील कुमार मोदी की विरासत केवल राजनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह दिखाया कि जनसेवा का अर्थ सत्ता में होना नहीं, बल्कि समाज की जरूरतों को समझना है। उनकी सोच और प्रयास आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।

उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि संवेदनशीलता और सेवा जब नेतृत्व से जुड़ती है, तो वह समाज में स्थायी बदलाव ला सकती है।

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