Tamil Nadu Assembly election : तमिलनाडु चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा के बढ़ते आसार

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हो सकता सीधा और कड़ा मुकाबला
Highlights
  • • तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज • राज्य में हो सकता सीधा और कड़ा मुकाबला • भाजपा का दमदार एंट्री से त्रिकोणीय मुकाबले के आसार • एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर को नहीं किया जा सकता नजरअंदाज • तमिलनाडु की राजनीति संभावनाओं के दौर से गुजर रही

लेखक-अनुभव सिन्हा

Tamil Nadu Assembly election : तमिलनाडु की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ Dravida Munnetra Kazhagam (डीएमके) के सामने विपक्षी दलों की सक्रियता,भाजपा की दमदार एंट्री और बदलते राजनीतिक समीकरणों ने संभावित त्रिशंकु विधानसभा की अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राज्य की राजनीतिक फिजा में सत्ता संतुलन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

Tamil Nadu Assembly election : हो सकता सीधा और कड़ा मुकाबला


2021 में स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लौटी डीएमके सरकार ने सामाजिक कल्याण योजनाओं, भाषा और संघीय अधिकारों के मुद्दों पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। मुख्यमंत्री M. K. Stalin के नेतृत्व में सरकार ने मुफ्त बस यात्रा योजना, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में विस्तार तथा केंद्र-राज्य संबंधों पर मुखर रुख को अपनी पहचान बनाया है। बावजूद इसके, विपक्ष राज्य में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, तेज एंटी इंकम्बेंसी और कानून-व्यवस्था की घटनाओं को मुद्दा बना रहा है।


डीएमके के अलावा राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (एआईएडीएमके) के पास ही पूरे तमिलनाडु में समानांतर संगठन है हालांकि जयललिता के बाद आंतरिक खींचतान से जूझती रही पार्टी अब नेतृत्व और गठबंधन की नई रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के भीतर एकजुटता कायम करने और पारंपरिक वोट बैंक को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें जारी हैं। यदि एआईएडीएमके अपने मतदाताओं को पुनः संगठित करने में सफल होती है, तो मुकाबला सीधा और कड़ा हो सकता है।

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Tamil Nadu Assembly election : भाजपा का दमदार एंट्री से त्रिकोणीय मुकाबले के आसार


इसी बीच भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। दक्षिण भारत में विस्तार के लक्ष्य के तहत भाजपा तमिलनाडु में वैकल्पिक राजनीतिक ध्रुव बनने का प्रयास कर रही है। पार्टी सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ विकास और केंद्र की योजनाओं को प्रचारित कर रही है। हालांकि राज्य में भाजपा का स्वतंत्र जनाधार सीमित माना जाता है, लेकिन वोट प्रतिशत में वृद्धि संभावित त्रिकोणीय मुकाबले का संकेत दे सकती है।


डीएमके के साथ गठबंधन में शामिल Indian National Congress (कांग्रेस) फिलहाल सत्तारूढ़ मोर्चे का हिस्सा है। कांग्रेस की राज्य इकाई डीएमके के साथ तालमेल बनाए हुए है, लेकिन उसका स्वतंत्र प्रभाव सीमित है। गठबंधन की मजबूती आने वाले चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है लेकिन कांग्रेस की भूमिका प्रत्यक्ष तौर पर अत्यंत सीमित है और डीएमके का निर्देश ही कांग्रेस का अंतिम सत्य है तमिलनाडु में।

Tamil Nadu Assembly election : तमिलनाडु चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा के बढ़ते आसार 1

Tamil Nadu Assembly election : एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर को नहीं किया जा सकता नजरअंदाज


तमिलनाडु में ऐतिहासिक रूप से सत्ता परिवर्तन का रुझान रहा है। एक चुनाव में एक दल को स्पष्ट बहुमत और अगले चुनाव में दूसरे दल की वापसी—यह पैटर्न लंबे समय तक दिखाई देता रहा है। ऐसे में एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि वर्तमान सरकार के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश के ठोस संकेत डीएमके के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला है।


संभावित हंग असेंबली की चर्चा के पीछे मुख्य कारण विपक्षी वोटों का संभावित बिखराव और छोटे दलों की सक्रियता है। यदि एआईएडीएमके, भाजपा और अन्य क्षेत्रीय दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरते हैं और डीएमके गठबंधन को सीधी टक्कर देते हैं, तो वोटों का विभाजन परिणामों को अप्रत्याशित बना सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ सीटों पर मामूली अंतर से जीत-हार तय हो सकती है, जिससे किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की संभावना बन सकती है।


हालांकि तमिलनाडु का चुनावी इतिहास बताता है कि मतदाता अक्सर किसी एक गठबंधन को स्पष्ट जनादेश देते रहे हैं। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति राज्य में विरल रही है। इसलिए वर्तमान अटकलों को अभी राजनीतिक संभावनाओं के दायरे में ही देखा जा रहा है।

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Tamil Nadu Assembly election : तमिलनाडु की राजनीति संभावनाओं के दौर से गुजर रही


डीएमके की संभावित विदाई को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है, लेकिन पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रही है। सरकार अपनी योजनाओं को तेज गति से लागू करने और जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए जनसंपर्क अभियान चला रहा है।


आगामी महीनों में गठबंधन समीकरण, उम्मीदवार चयन और क्षेत्रीय मुद्दों की धार चुनावी परिदृश्य को स्पष्ट करेंगे। फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति संभावनाओं के दौर से गुजर रही है, जहां सत्ता संतुलन स्थापित कर पाना डीएमके के लिए पहली बार बेहद कठिन नजर आ रहा है। सनातन विरोध इसका एक बड़ा कारण है जो धीरे-धीरे मुखर हो रहा है और जबकि चुनावों में अभी समय है एक डीएमके के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है।

स्थिति यह है कि सरकार हर जोर आजमाइश कर रही है जिसमे सर्वे भी शामिल हैं। दिलचस्प यह है कि निजी स्तर पर कराये जा रहे सर्वे त्रिशंकु तमिलनाडु विधानसभा की तस्वीर पेश कर रहे है जबकि सरकारी सर्वे एकतरफा सरकार की वापसी बता रहे हैं। पर आम लोग सरकारी सर्वे पर भरोसा करने के बजाय चुप्पी साध लेते हैं जिससे अभी सिर्फ यह कहा जा सकता है कि चुनाव में अभी समय है।  लेकिन एम के स्टालिन की सरकार की स्थिति हर दिन कमजोर हो रही है आने वाले समय का अंतिम सच यही है।

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