Tej Pratap Yadav: दही-चूड़ा भोज विवाद-तेजस्वी की गैरमौजूदगी से RJD में बढ़ी सियासी हलचल

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मकर संक्रांति पर तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज
Highlights
  • • तेज प्रताप यादव के भोज में तेजस्वी यादव नहीं पहुंचे • लालू यादव की मौजूदगी से बढ़ा सियासी संदेश • ‘जयचंद’ बयान से RJD में हलचल • सुधाकर सिंह का डैमेज कंट्रोल बयान

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित दही-चूड़ा भोज आमतौर पर बिहार की राजनीति में मेल-मिलाप और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार यह आयोजन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर सियासी घमासान की वजह बन गया। दिल्ली में तेज प्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी तो रही, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यही गैरहाजिरी अब आरजेडी के भीतर कथित मतभेदों की चर्चा को और तेज कर रही है।

Contents

Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में तेजस्वी यादव क्यों नहीं पहुंचे?

दिल्ली में आयोजित इस दही-चूड़ा भोज को लेकर जैसे ही तस्वीरें सामने आईं, राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर तेजस्वी यादव कार्यक्रम में क्यों नहीं पहुंचे। पार्टी के भीतर उठते सवालों और मीडिया की अटकलों के बीच आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह सामने आए और उन्होंने इस पूरे मामले को “निजी निर्णय” बताकर शांत करने की कोशिश की।

सुधाकर सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि तेजस्वी यादव ने मकर संक्रांति अपने घर पर निजी तौर पर मनाने का फैसला किया था। इसे किसी तरह की नाराजगी या राजनीतिक संदेश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, त्योहार मनाने का हर नेता का अपना तरीका होता है और इससे पार्टी के भीतर रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ता।

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Tej Pratap Yadav: लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी और सियासी संदेश

Tej Pratap Yadav: दही-चूड़ा भोज विवाद-तेजस्वी की गैरमौजूदगी से RJD में बढ़ी सियासी हलचल 1

तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अहम बना दिया। लालू यादव का शामिल होना अपने-आप में एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना गया। सुधाकर सिंह ने इस पर कहा कि लालू यादव एक वरिष्ठ नेता हैं और वे सामाजिक-राजनीतिक कार्यक्रमों में अक्सर शामिल होते रहते हैं।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब पार्टी अध्यक्ष किसी एक नेता के आयोजन में शामिल हों और दूसरे प्रमुख नेता की गैरमौजूदगी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। यही वजह है कि इस भोज को केवल पारिवारिक या सामाजिक कार्यक्रम मानने के बजाय सियासी नजरिए से देखा जा रहा है।

Tej Pratap Yadav: ‘जयचंद’ बयान ने बढ़ाई RJD की मुश्किलें

मामला तब और गर्मा गया जब तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने भाई तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तेजस्वी शायद ‘जयचंदों’ से घिरे हुए हैं, इसलिए कार्यक्रम में नहीं आ पाए। यह बयान सामने आते ही आरजेडी के भीतर सब कुछ सामान्य होने के दावों पर सवाल खड़े हो गए।

तेज प्रताप यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि वे रात 9 बजे तक अपने भाई का इंतजार करते रहे। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का संकेत माना जा रहा है।

Tej Pratap Yadav: सुधाकर सिंह का डैमेज कंट्रोल और पार्टी लाइन

तेज प्रताप यादव के बयान के बाद आरजेडी की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश और तेज हो गई। सांसद सुधाकर सिंह ने बार-बार यही दोहराया कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और सभी नेता अपने-अपने तरीके से पर्व मना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना सही नहीं है।

हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सब कुछ सामान्य होता, तो ‘जयचंद’ जैसे शब्द सार्वजनिक मंच से इस्तेमाल नहीं किए जाते। यही कारण है कि सुधाकर सिंह के बयान को पार्टी की छवि बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

Tej Pratap Yadav: क्या RJD के भीतर गहराता जा रहा है संकट?

आरजेडी लंबे समय से एकजुटता और पारिवारिक नेतृत्व के लिए जानी जाती रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच सार्वजनिक मंचों पर दिख रही दूरी विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे सकती है।

मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज, जो आमतौर पर सियासी सौहार्द का प्रतीक होता है, इस बार आरजेडी के लिए असहज सवालों का कारण बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इन संकेतों को कैसे संभालता है और क्या यह विवाद यहीं थम जाता है या आगे और गहराता है।

Tej Pratap Yadav: दही-चूड़ा भोज बना सियासी परीक्षा

फिलहाल आरजेडी के शीर्ष नेता सार्वजनिक तौर पर ‘सब ठीक है’ का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तेज प्रताप यादव के बयान और तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर चल रही सियासी हलचल को उजागर कर दिया है। मकर संक्रांति का यह दही-चूड़ा भोज अब सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आरजेडी के अंदरूनी समीकरणों की परीक्षा बन चुका है।

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित दही-चूड़ा भोज आमतौर पर बिहार की राजनीति में मेल-मिलाप और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार यह आयोजन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर सियासी घमासान की वजह बन गया। दिल्ली में तेज प्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी तो रही, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यही गैरहाजिरी अब आरजेडी के भीतर कथित मतभेदों की चर्चा को और तेज कर रही है।

Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में तेजस्वी यादव क्यों नहीं पहुंचे?

दिल्ली में आयोजित इस दही-चूड़ा भोज को लेकर जैसे ही तस्वीरें सामने आईं, राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर तेजस्वी यादव कार्यक्रम में क्यों नहीं पहुंचे। पार्टी के भीतर उठते सवालों और मीडिया की अटकलों के बीच आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह सामने आए और उन्होंने इस पूरे मामले को “निजी निर्णय” बताकर शांत करने की कोशिश की।

सुधाकर सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि तेजस्वी यादव ने मकर संक्रांति अपने घर पर निजी तौर पर मनाने का फैसला किया था। इसे किसी तरह की नाराजगी या राजनीतिक संदेश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, त्योहार मनाने का हर नेता का अपना तरीका होता है और इससे पार्टी के भीतर रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ता।

Tej Pratap Yadav: लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी और सियासी संदेश

तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अहम बना दिया। लालू यादव का शामिल होना अपने-आप में एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना गया। सुधाकर सिंह ने इस पर कहा कि लालू यादव एक वरिष्ठ नेता हैं और वे सामाजिक-राजनीतिक कार्यक्रमों में अक्सर शामिल होते रहते हैं।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब पार्टी अध्यक्ष किसी एक नेता के आयोजन में शामिल हों और दूसरे प्रमुख नेता की गैरमौजूदगी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। यही वजह है कि इस भोज को केवल पारिवारिक या सामाजिक कार्यक्रम मानने के बजाय सियासी नजरिए से देखा जा रहा है।

Tej Pratap Yadav: ‘जयचंद’ बयान ने बढ़ाई RJD की मुश्किलें

मामला तब और गर्मा गया जब तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने भाई तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तेजस्वी शायद ‘जयचंदों’ से घिरे हुए हैं, इसलिए कार्यक्रम में नहीं आ पाए। यह बयान सामने आते ही आरजेडी के भीतर सब कुछ सामान्य होने के दावों पर सवाल खड़े हो गए।

तेज प्रताप यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि वे रात 9 बजे तक अपने भाई का इंतजार करते रहे। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का संकेत माना जा रहा है।

Tej Pratap Yadav: सुधाकर सिंह का डैमेज कंट्रोल और पार्टी लाइन

तेज प्रताप यादव के बयान के बाद आरजेडी की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश और तेज हो गई। सांसद सुधाकर सिंह ने बार-बार यही दोहराया कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और सभी नेता अपने-अपने तरीके से पर्व मना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना सही नहीं है।

हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सब कुछ सामान्य होता, तो ‘जयचंद’ जैसे शब्द सार्वजनिक मंच से इस्तेमाल नहीं किए जाते। यही कारण है कि सुधाकर सिंह के बयान को पार्टी की छवि बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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Tej Pratap Yadav: क्या RJD के भीतर गहराता जा रहा है संकट?

आरजेडी लंबे समय से एकजुटता और पारिवारिक नेतृत्व के लिए जानी जाती रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच सार्वजनिक मंचों पर दिख रही दूरी विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे सकती है।

मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज, जो आमतौर पर सियासी सौहार्द का प्रतीक होता है, इस बार आरजेडी के लिए असहज सवालों का कारण बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इन संकेतों को कैसे संभालता है और क्या यह विवाद यहीं थम जाता है या आगे और गहराता है।

Tej Pratap Yadav: दही-चूड़ा भोज बना सियासी परीक्षा

फिलहाल आरजेडी के शीर्ष नेता सार्वजनिक तौर पर ‘सब ठीक है’ का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तेज प्रताप यादव के बयान और तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर चल रही सियासी हलचल को उजागर कर दिया है। मकर संक्रांति का यह दही-चूड़ा भोज अब सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आरजेडी के अंदरूनी समीकरणों की परीक्षा बन चुका है।

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