हर दिन कहीं न कहीं से ऐसी खबर सामने आ रही है कि किसी युवा को कैंसर हो गया। बिहार में हाल के दिनों में मुंह, फेफड़े और लीवर के कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू का बढ़ता सेवन इस खतरे की सबसे बड़ी वजह बन चुका है। जानकारी के अभाव, गलत संगत और लापरवाह जीवनशैली ने युवाओं को इस लत की गिरफ्त में धकेल दिया है।
- Tobacco Cancer Bihar Youth: क्यों बढ़ रहे हैं युवाओं में कैंसर के मामले
- Tobacco Cancer Bihar Youth: बिहार में तंबाकू की भयावह तस्वीर
- Tobacco Cancer Bihar Youth: सिर्फ फेफड़े नहीं, लीवर भी हो रहा तबाह
- Tobacco Cancer Bihar Youth: मानसिक और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर
- Tobacco Cancer Bihar Youth: तंबाकू से छुटकारा संभव है
- Tobacco Cancer Bihar Youth: योग और जीवनशैली में बदलाव से मिलेगी मजबूती
- Tobacco Cancer Bihar Youth: समय पर पहचान से बच सकती हैं जानें
Tobacco Cancer Bihar Youth: क्यों बढ़ रहे हैं युवाओं में कैंसर के मामले
कैंसर विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर के कई कारण होते हैं, लेकिन तंबाकू और धूम्रपान सबसे प्रमुख कारक हैं। इसके अलावा शराब का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित आहार, मोटापा, वायु प्रदूषण और पारिवारिक इतिहास भी बीमारी को बढ़ावा देते हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार भारत में कैंसर के मामलों में आने वाले वर्षों में 12 से 18 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका है। वर्ष 2022 में जहां देश में लगभग 14.6 लाख कैंसर मरीज थे, वहीं यह संख्या 2025 तक 15.7 लाख तक पहुंच सकती है।
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Tobacco Cancer Bihar Youth: बिहार में तंबाकू की भयावह तस्वीर

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार बिहार के सिवान जिले में लगभग 21 प्रतिशत आबादी तंबाकू के दुष्प्रभावों से प्रभावित है। वर्ष 2019-20 में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुषों में तंबाकू उपयोग की दर 27.1 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि महिलाओं में यह 8.5 प्रतिशत रही।
विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में प्रतिदिन लगभग एक लाख बच्चे और किशोर धूम्रपान शुरू कर देते हैं। भारत में भी तंबाकू उपयोग करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, जो भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है।
Tobacco Cancer Bihar Youth: सिर्फ फेफड़े नहीं, लीवर भी हो रहा तबाह
अब तक यह माना जाता रहा था कि तंबाकू का असर केवल फेफड़े और मुंह तक सीमित रहता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू लीवर को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहा है।
तंबाकू में मौजूद निकोटीन और टार जैसे रसायन लीवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे फैटी लीवर डिजीज, लीवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस और यहां तक कि लीवर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। तंबाकू में मौजूद कार्सिनोजेन लीवर के डीएनए को क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जिससे बीमारी तेजी से फैलती है।
Tobacco Cancer Bihar Youth: मानसिक और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक तंबाकू की लत केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। इससे चिंता, अवसाद और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। युवाओं की प्रजनन क्षमता पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे भविष्य में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
Tobacco Cancer Bihar Youth: तंबाकू से छुटकारा संभव है
तंबाकू की लत से बाहर निकलना आसान नहीं होता, लेकिन असंभव भी नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और पारिवारिक सहयोग से यह संभव हो सकता है।
परिवार की भूमिका यहां सबसे अहम बन जाती है। माता-पिता को बच्चों की संगत पर नजर रखनी चाहिए और समय-समय पर तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में खुलकर बातचीत करनी चाहिए। स्कूल-कॉलेजों में नियमित जागरूकता अभियान चलाना भी बेहद जरूरी है।
Tobacco Cancer Bihar Youth: योग और जीवनशैली में बदलाव से मिलेगी मजबूती
योगाचार्यों के अनुसार नियमित योग और प्राणायाम से मानसिक मजबूती आती है और इच्छाशक्ति का विकास होता है। इससे तंबाकू की तलब को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। जंक फूड से दूरी, पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम कैंसर से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
बढ़ता स्क्रीन टाइम भी शारीरिक गतिविधियों को कम कर रहा है, जो कैंसर का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। इसे नियंत्रित करने में परिवार का सहयोग बेहद जरूरी है।
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Tobacco Cancer Bihar Youth: समय पर पहचान से बच सकती हैं जानें
कैंसर के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर पहचान की कमी है। हालिया केंद्रीय बजट में जिला स्तर पर कैंसर डे-केयर सेंटर शुरू करने की घोषणा की गई है। इससे शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान संभव होगी और कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।
तंबाकू का उपयोग युवाओं के जीवन को तेजी से तबाह कर रहा है। इससे लड़ाई केवल सरकार या डॉक्टरों की नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी जिम्मेदारी है। यदि समय रहते सही संवाद, सहयोग और जागरूकता मिले, तो तंबाकू निषेध और कैंसर से जंग में बड़ी जीत संभव है।
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