बिहार में यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को नवादा जिले में हालात उस वक्त और तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा किया। आक्रोशित भीड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह विरोध केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में छात्र, शिक्षक और सामाजिक संगठन लगातार सड़क पर उतर रहे हैं।
नवादा की सड़कों पर दिखा यह गुस्सा दरअसल उस असंतोष की तस्वीर है, जो उच्च शिक्षा से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच गहराता जा रहा है।
UGC New Act 2026 और नवादा में उग्र प्रदर्शन
मंगलवार को नवादा में भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा हो गई। हाथों में बैनर और पोस्टर लिए लोग लगातार नारेबाजी कर रहे थे। जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज होता गया, हालात और उग्र होते चले गए। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका, जिससे मौके पर तनाव का माहौल बन गया।
नारेबाजी इतनी तेज और आक्रामक थी कि भाजपा कार्यालय से जिलाध्यक्ष समेत कई नेता बाहर निकल आए। हालांकि प्रदर्शनकारियों के तेवर देखकर भाजपा नेताओं को पीछे हटना पड़ा और कार्यालय का गेट बंद कर दिया गया। कुछ देर के लिए पूरा इलाका राजनीतिक तनाव के केंद्र में तब्दील हो गया।
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UGC New Act 2026 पर किसने किया प्रदर्शन का नेतृत्व

इस प्रदर्शन का आयोजन लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पूर्व नेता चंदन सिंह की देखरेख में किया गया था। चंदन सिंह ने मौके पर भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति और यूजीसी के नियम समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले देश में हिंदू-मुसलमान के नाम पर विभाजन किया गया और अब शिक्षा के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच भेदभाव पैदा किया जा रहा है।
चंदन सिंह ने कहा कि यूजीसी के नए नियम छात्रों और शिक्षकों के हित में नहीं हैं और इससे शैक्षणिक संस्थानों में असंतोष और अविश्वास का माहौल बन रहा है। उनके इस बयान के बाद प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी और तेज हो गई।
UGC New Act 2026 और छात्रों-शिक्षकों की नाराजगी
यूजीसी के नए नियमों को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच पहले से ही नाराजगी बनी हुई है। उनका कहना है कि ये नियम शिक्षा व्यवस्था को और जटिल बना देंगे और संस्थानों में भय का माहौल पैदा करेंगे। कई छात्र संगठनों का आरोप है कि इन नियमों से अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और शिकायत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होने की आशंका बढ़ जाएगी।
शिक्षकों का भी मानना है कि नए नियमों में पारदर्शिता की कमी है और इससे विश्वविद्यालयों में टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। कई जगहों पर शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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UGC New Act 2026 और बिहार की सियासत में उबाल
बिहार में यह मुद्दा धीरे-धीरे राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। विपक्षी दल इसे भाजपा सरकार के खिलाफ एक बड़ा हथियार बना रहे हैं। नवादा की घटना ने साफ कर दिया है कि यूजीसी के नए नियम आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनने वाले हैं।
भाजपा नेताओं पर पुतला दहन और कार्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि असंतोष अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों पर उतर चुका है। प्रशासन भी हालात पर नजर बनाए हुए है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
UGC New Act 2026 और आगे की चुनौती
यूजीसी के नए नियमों को लेकर उठता यह विरोध सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ सरकार का दावा है कि ये नियम उच्च शिक्षा में समानता और पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी हैं, वहीं दूसरी ओर छात्र, शिक्षक और विपक्षी दल इन्हें भेदभाव और दमनकारी बता रहे हैं।
अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में बिहार समेत अन्य राज्यों में भी आंदोलन और तेज हो सकता है। नवादा की घटना ने यह साफ कर दिया है कि यूजीसी के नए नियम केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं रह गए हैं, बल्कि अब यह सीधा राजनीतिक और सामाजिक टकराव का रूप ले चुके हैं।
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