देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़ा एक फैसला इन दिनों सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी बहस का विषय बना हुआ है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर माहौल गर्म है। इन नियमों के समर्थन और विरोध में तर्क दिए जा रहे हैं और मामला अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक संतुलन और राजनीति से भी जुड़ गया है। इसी फैसले के बाद General बनाम OBC की नई बहस ने जोर पकड़ लिया है।
- UGC New Rules: क्या हैं नए नियम और कब से हुए लागू
- UGC New Rules: हर संस्थान में इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर अनिवार्य
- UGC New Rules: शिकायत पर कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया तय
- UGC New Rules: नियम 3(C) बना विवाद की सबसे बड़ी वजह
- UGC New Rules: झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटना भी वजह
- UGC New Rules: सियासत में भी बढ़ा विरोध
- UGC New Rules: समर्थन और विरोध के बीच बढ़ता टकराव
UGC New Rules: क्या हैं नए नियम और कब से हुए लागू
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का नाम ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026’ रखा गया है। इन्हें 13 जनवरी से प्रभावी कर दिया गया है।
UGC का कहना है कि इन नियमों से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव को रोका जा सकेगा। आयोग के अनुसार यह कदम समान अवसर और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था।
UGC New Rules: हर संस्थान में इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर अनिवार्य
नए नियमों के तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय को अपने यहां इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर बनाना अनिवार्य होगा। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य समानता लागू करना और भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का समाधान करना है।
इस केंद्र के अंतर्गत एक इक्विटी कमेटी बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख करेंगे। यह कमेटी हर साल अपनी रिपोर्ट UGC को सौंपेगी। इसके अलावा UGC स्तर पर भी एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी, जो इन नियमों के पालन पर नजर रखेगी।
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UGC New Rules: शिकायत पर कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया तय

यदि किसी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी को जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ता है, तो वह इक्विटी कमेटी के पास शिकायत दर्ज करा सकता है। नियमों के अनुसार, शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर उस पर कार्रवाई शुरू करनी होगी।
कमेटी 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट संस्थान के प्रमुख को सौंपेगी। इसके बाद संस्थान प्रमुख को 7 दिनों के अंदर निर्णय लेना होगा। यदि कोई पक्ष इस फैसले से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह 30 दिनों के भीतर लोकपाल के पास अपील कर सकता है। लोकपाल को भी 30 दिनों के अंदर फैसला देना होगा।
नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी संस्थान ने इन प्रावधानों का पालन नहीं किया, तो उसकी UGC मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
UGC New Rules: नियम 3(C) बना विवाद की सबसे बड़ी वजह

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह नियम 3(C) है, जिसकी संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। यह नियम कहता है कि जाति आधारित भेदभाव का अर्थ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के खिलाफ जाति या जनजाति के आधार पर किया गया भेदभाव होगा।
यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। अब तक आमतौर पर जनरल और OBC को एक श्रेणी में देखा जाता था, लेकिन इन नियमों में OBC को भी SC और ST के साथ जोड़ दिया गया है। इसी कारण इसे General बनाम SC-ST-OBC की नई लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
UGC New Rules: OBC को शामिल करने पर क्यों बढ़ा विरोध
OBC को शामिल किए जाने को लेकर विरोध की एक बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि OBC वर्ग में मुस्लिम जातियां भी आती हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इससे शिकायतों का दायरा बहुत बढ़ जाएगा और जनरल वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया जाएगा।
कुछ यूजर्स का कहना है कि इन नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC को पीड़ित माना गया है, जबकि जनरल वर्ग को स्वतः ही आरोपी की स्थिति में रख दिया गया है। यह भी दावा किया जा रहा है कि शिकायत करने वाले से कोई ठोस प्रमाण नहीं मांगा जाएगा और आरोपित व्यक्ति को ही खुद को निर्दोष साबित करना होगा।
UGC New Rules: झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटना भी वजह
विवाद की दूसरी बड़ी वजह झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटाया जाना है। पिछले साल फरवरी में जब इन नियमों का ड्राफ्ट जारी किया गया था, तब उसमें झूठी शिकायत करने पर जुर्माने का प्रावधान शामिल था।
लेकिन जब अंतिम नियम जारी किए गए, तो यह प्रावधान हटा दिया गया। इसका मतलब यह हुआ कि यदि कोई SC, ST या OBC वर्ग का व्यक्ति झूठी शिकायत करता है और जांच में वह गलत पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसी बात को लेकर सबसे ज्यादा आशंका जताई जा रही है।
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UGC New Rules: सियासत में भी बढ़ा विरोध
यह मामला अब शिक्षा से निकलकर राजनीति तक पहुंच गया है। विरोध इतना बढ़ा कि बरेली के एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं।
सोशल मीडिया पर इसे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से भी जोड़ा जा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह फैसला OBC वर्ग को साधने की रणनीति का हिस्सा है।
वहीं, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का कहना है कि इन नियमों को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर किया जाएगा। उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत सभी वर्गों को समान अधिकार प्राप्त हैं।
UGC New Rules: समर्थन और विरोध के बीच बढ़ता टकराव
UGC का दावा है कि नए नियमों से उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव कम होगा और समानता का माहौल बनेगा। वहीं, विरोध करने वाले वर्गों को डर है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर उन्हें फंसाया जा सकता है।
फिलहाल यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। सड़क, अदालत, सोशल मीडिया और राजनीति—हर मंच पर यह मुद्दा गर्माया हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और UGC आगे क्या रुख अपनाते हैं।
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