अमेरिका में इमीग्रेशन नीति इन दिनों सिर्फ सरकारी फाइलों या अदालतों तक सीमित विषय नहीं रही, बल्कि यह सड़कों, कॉलेज कैंपस, दफ्तरों और राजनीतिक मंचों तक पहुंच चुकी है। देश के कई बड़े शहरों में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया है कि प्रवासन को लेकर अपनाई जा रही नीतियों पर समाज का एक बड़ा वर्ग असहज है। यह असंतोष केवल अवैध प्रवासियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी वीजा धारकों, छात्रों, विदेशी कामगारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं तक फैल चुका है।
- US Immigration Protests 2026: आईसीई की कार्रवाइयों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
- US Immigration Protests 2026: छात्रों और कर्मचारियों का वॉकआउट और जनरल स्ट्राइक
- US Immigration Protests 2026: बच्चों की हिरासत पर उठे गंभीर सवाल
- US Immigration Protests 2026: कानूनी वीजा धारकों में भी डर और अनिश्चितता
- US Immigration Protests 2026: बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन और अंतरराष्ट्रीय असर
- US Immigration Protests 2026: सुरक्षा बनाम मानवता की बहस
US Immigration Protests 2026: आईसीई की कार्रवाइयों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

हाल के महीनों में मिनियापोलिस, सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क सिटी और लॉस एंजिलिस जैसे बड़े शहरों में इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट की सख्त कार्रवाइयों के खिलाफ भारी विरोध देखा गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गैर-आपराधिक प्रवासियों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिससे डर और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। लोगों का कहना है कि अचानक छापेमारी, हिरासत और डिपोर्टेशन की कार्रवाई ने हजारों परिवारों को मानसिक दबाव में डाल दिया है।
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US Immigration Protests 2026: छात्रों और कर्मचारियों का वॉकआउट और जनरल स्ट्राइक

असंतोष सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। कई यूनिवर्सिटी कैंपस और कॉर्पोरेट दफ्तरों में छात्रों और कर्मचारियों ने वॉकआउट किया। उनका कहना है कि मौजूदा नीतियां “अत्यधिक सख्त” और “अमानवीय” हैं।
कुछ शहरों में जनरल स्ट्राइक का भी आह्वान किया गया, जिसमें शिक्षा, तकनीक और हेल्थ सेक्टर से जुड़े लोग शामिल हुए। इन आंदोलनों ने इमीग्रेशन नीति को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
US Immigration Protests 2026: बच्चों की हिरासत पर उठे गंभीर सवाल

इमीग्रेशन नीति को लेकर सबसे संवेदनशील मुद्दा बच्चों की हिरासत का है। एक संघीय न्यायाधीश की टिप्पणी ने इस बहस को और तेज कर दिया, जिसमें कहा गया कि कुछ नियम मानवीय दृष्टिकोण से गलत हैं।
छोटे बच्चों को हिरासत केंद्रों में रखने को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है और यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय मूल्यों के खिलाफ है।
US Immigration Protests 2026: कानूनी वीजा धारकों में भी डर और अनिश्चितता
अमेरिका की इमीग्रेशन नीतियां अब केवल अवैध प्रवासन तक सीमित नहीं रहीं। H-1B जैसे वीजा पर काम कर रहे विदेशी पेशेवरों को भी कड़े नियमों और लंबी प्रतीक्षा सूचियों का सामना करना पड़ रहा है।
कई छात्रों और वर्कर्स के वीजा रद्द किए गए हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और करियर योजनाएं अधर में लटक गई हैं। यह स्थिति खासतौर पर टेक्नोलॉजी और हेल्थ सेक्टर में काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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US Immigration Protests 2026: बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन और अंतरराष्ट्रीय असर
पिछले समय में बड़ी संख्या में प्रवासियों को देश से वापस भेजा गया है। इससे न केवल अमेरिकी समाज के भीतर तनाव बढ़ा है, बल्कि कई देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों पर भी असर पड़ा है।
कुछ समुदायों का कहना है कि अचानक डिपोर्टेशन से परिवार टूट रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
US Immigration Protests 2026: सुरक्षा बनाम मानवता की बहस
अमेरिका में इस मुद्दे पर राय बंटी हुई है। एक वर्ग का मानना है कि सख्त इमीग्रेशन नीति देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है। वहीं दूसरा वर्ग इसे अत्यधिक कठोर, अमानवीय और समाज को विभाजित करने वाला कदम बता रहा है।
यही टकराव इस पूरे मुद्दे को और जटिल बनाता है और आने वाले समय में यह बहस और तेज होने की संभावना है।
अमेरिका में इमीग्रेशन नीति अब सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक, नैतिक और राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुकी है। विरोध-प्रदर्शनों, न्यायिक टिप्पणियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं से साफ है कि यह मुद्दा जल्द शांत होने वाला नहीं है।
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