वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस घटना ने न सिर्फ लैटिन अमेरिका की राजनीति में भूचाल ला दिया, बल्कि चीन-अमेरिका टकराव को भी एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। जिस समय अमेरिकी डेल्टा फोर्स के एलीट कमांडो इस ऑपरेशन की आखिरी तैयारी कर रहे थे, ठीक उसी वक्त मादुरो चीन के लैटिन अमेरिका मामलों के वरिष्ठ अधिकारी किउ शियाओची के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे थे।
बताया जा रहा है कि इसी मुलाकात के दौरान मादुरो ने चीनी अधिकारी से कहा था कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग उनके लिए “बड़े भाई” की तरह हैं। लेकिन कुछ ही घंटों बाद हालात पूरी तरह बदल गए। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में छापा मारते हुए मादुरो को उनके बेडरूम से गिरफ्तार किया और सीधे अमेरिका ले जाया गया।
Venezuela Operation Impact: मादुरो की गिरफ्तारी पर चीन का तीखा विरोध
Venezuela Operation Impact को लेकर चीन ने तुरंत और तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने मादुरो की गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा की। चीन ने वाशिंगटन पर “दुनिया का पुलिसवाला” बनने का आरोप लगाया और मादुरो व उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग की।
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी संप्रभु देश के चुने हुए राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल है। बीजिंग का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को कमजोर करती हैं और ताकतवर देशों को मनमानी करने का रास्ता दिखाती हैं।
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Venezuela Operation Impact: शी जिनपिंग का अमेरिका पर अप्रत्यक्ष हमला

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अमेरिका पर इशारों-इशारों में हमला बोला। सोमवार को आयरलैंड के प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका का एकतरफा दबाव और धमकी देने वाला रवैया पूरी वैश्विक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि हर देश को अपने विकास का रास्ता चुनने का अधिकार है और सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर व अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए। खासकर बड़ी ताकतों को दूसरों के लिए मिसाल बनना चाहिए, न कि डर और दबाव का प्रतीक।
Venezuela Operation Impact: चीन के सोशल मीडिया में ‘ऑपरेशन वेनेजुएला’ की चर्चा
दिलचस्प बात यह है कि जहां चीन की सरकार मादुरो की गिरफ्तारी से नाराज़ और चिंतित है, वहीं चीनी सोशल मीडिया पर इस पूरे ऑपरेशन की जमकर चर्चा और तारीफ हो रही है। कई यूजर्स इसे एक साहसिक सैन्य कार्रवाई बता रहे हैं और इसे भविष्य के सैन्य अभियानों के मॉडल के तौर पर देख रहे हैं।
कुछ चीनी यूजर्स ने सवाल उठाया है कि अगर अमेरिका अपने प्रभाव क्षेत्र में किसी देश के नेता को पकड़ सकता है, तो चीन ऐसा क्यों नहीं कर सकता? इसी बहस के दौरान ताइवान का मुद्दा बार-बार सामने आ रहा है।
Venezuela Operation Impact: ताइवान को लेकर सोशल मीडिया पर बंटी राय
चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि अमेरिका का वेनेजुएला ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, जबकि ताइवान का मामला पूरी तरह अलग है। उनका कहना है कि ताइवान चीन का आंतरिक मामला है और वहां किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को बाहरी हस्तक्षेप नहीं माना जाना चाहिए।
चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी लंबे समय से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानती रही है। ऐसे में वेनेजुएला की घटना ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या भविष्य में बीजिंग अधिक आक्रामक रुख अपना सकता है।
Venezuela Operation Impact: चीन-वेनेजुएला के पुराने रिश्ते
चीन और वेनेजुएला के बीच दशकों से करीबी संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच यह रिश्ता केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि विचारधारात्मक भी रहा है। अमेरिका विरोध और समाजवादी झुकाव ने दोनों को एक-दूसरे के करीब लाया।
वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार चीन के लिए बेहद अहम हैं। चीन वेनेजुएला से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता है और बदले में वहां बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और विकास परियोजनाओं में निवेश करता रहा है। बीते वर्षों में बीजिंग ने कराकस को अरबों डॉलर का कर्ज भी दिया है।
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Venezuela Operation Impact: क्या बदल जाएगा चीन का रणनीतिक खेल?
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या चीन को वेनेजुएला से मिलने वाले तेल और क्षेत्रीय प्रभाव पर असर पड़ेगा। इस अमेरिकी कार्रवाई ने लैटिन अमेरिका में चीन की रणनीति को झटका दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे चीन-अमेरिका टकराव और गहराने की आशंका है।
Venezuela Operation Impact: ताइवान पर हमला करेगा चीन?
चीन में यह चर्चा आम होती जा रही है कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से चीन को और आक्रामक होने का हौसला मिल सकता है। हालांकि ताइवान में इस तरह की आशंकाओं को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद वांग टिंग-यू ने इस विचार को खारिज करते हुए कहा कि चीन अमेरिका नहीं है और ताइवान वेनेजुएला नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि दोनों हालातों की तुलना करना गलत और भ्रामक है।
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