भागलपुर, संवाददाता
भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशीला सेतु एक्सपेंशन ज्वाइंट चौड़ा हो रहा है। यह 6-8 सेंटीमीटर तक है। ये स्थिति पुल के 12 से अधिक एक्सपेंशन की है। लगातार वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण स्पेस बढ़ रहा है ।
सेतु से प्रतिदिन 35 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। पूर्वी बिहार का लाइफ लाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु को मेंटेनेंस की आवश्यकता है। कई वर्षों से पूल का मेंटेनेंस कार्य नहीं हुआ। स्थिति को देखते हुए एनएच भागलपुर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता व मुख्य अभियंता ने पुल निर्माण निगम को पत्र लिखकर अवगत कराया था, बावजूद ध्यान नहीं दिया गया।
साल 2016 -17 में 15 करोड़ की लागत से सेतु का मेंटेनेंस कार्य किया गया था। तब यह दावा किया गया था कि 20 साल तक सेतु को मेंटेनेंस की आवश्यकता नहीं होगी। सेतु से झारखंड-बंगाल के साथ बिहार के कई जिलों को सीधा फायदा होता है।
विक्रमशीला सेतु पर वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने 2020 में सेतु के समानांतर फोरलेन सेतु की आधारशिला रखी थी। 1 हजार करोड़ की लागत से इस सेतु का कार्य जारी है। 40 पिलर बनाए जा रहे हैं। सेतु को बनने में 4-5 साल वक्त लग सकता है, लेकिन इससे पहले विक्रमशीला सेतु पर ध्यान देने की जरूरत है।
लोगों की मांग को को देखते हुए 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस पुल की आधारशिला रखी थी। इसके बाद साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस पूल का उद्घाटन किया था। 4.7 किलोमीटर लंबा यह सेतु भागलपुर के बरारी से नवगछिया के जाह्नवी चौक तक है।
सेतु से हजारों ट्रक रोजाना गुजरते हैं। गोड्डा, साहिबगंज, दुमका, सिलीगुड़ी के साथ साथ बिहार के अंगप्रदेश, सीमांचल और पूर्वांचल के कई जिलों को सीधा फायदा होता है।
हालांकि डीएम नवल किशोर चौधरी ने इस सिलसिले में बताया कि विभाग को इसकी सूचना दी गई है। एक्सपर्ट टीम जल्द जाकर सेतु का निरीक्षण करेगी। जल्द इस पर काम शुरू किया जाएगा।
विक्रमशिला सेतु का एक्सपेंशन ज्वाइंट हो रहा चौड़ा 9 साल पहले हुआ था मेंटेनेंस, झारखंड-बंगाल के वाहनों का रहता है दबाव
