वक्फ बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची RJD, तेजस्वी बोले-कचरा में फेंका जायेगा

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पटनाः वफ्फ संशोधन बिल के खिलाफ राजद नेता तेजस्वी यादव ने प्रसवार्ता की है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमारी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जायेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में इस बिल को लागू नहीं होने दिया जायेगा। साथ ही कहा कि इस बिल को कचरे में फेंक दिया जाएगा।

वक्फ बोर्ड बिल को लेकर विपक्ष लगातार हाय-तौबा मचा रही है। कांग्रेस ने इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करने की बात कही है। दरअसल, शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने कहा कि इस बिल को चैलेंज करने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी शीर्ष कोर्ट जाने का फैसला किया है। 

अमानतुल्ला खान ने वक्फ (संशोधन) बिल 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। खान ने अपनी याचिका में दावा किया है कि यह बिल मुसलमानों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को सीमित करता है, कार्यकारी हस्तक्षेप को बढ़ावा देता है। अल्पसंख्यकों के अपने धार्मिक और धर्मार्थ संस्थानों को प्रबंधित करने के अधिकारों को कमजोर करता है।

अमानतुल्ला खान की यह याचिका ऐसे समय में आई है, जब हाल ही में संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को भारी बहुमत से पास किया गया है। लोकसभा में यह बिल 2 अप्रैल को 288-232 वोटों से और राज्यसभा में अगले दिन 128-95 वोटों से पास हुआ। केंद्र सरकार ने इस बिल को वक्फ प्रशासन को धर्मनिरपेक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने वाला बताया है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को पेश करते हुए कहा था कि इसका मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल करना और तकनीक के जरिए पारदर्शिता लाना है, न कि मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना.

इस बिल का विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी बिल के पारित होने से पहले इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी। AIMPLB के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा था कि यह बिल मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों को छीनने की कोशिश है. यह हिंदू-मुस्लिम विवाद नहीं, बल्कि सरकार के खिलाफ एक संवैधानिक लड़ाई है।

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