वैश्विक मंच पर हुए एक विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। Youth Congress Protest Controversy अब सिर्फ सत्तापक्ष बनाम विपक्ष का मामला नहीं रह गया, बल्कि विपक्षी खेमे के भीतर भी असहजता का कारण बन गया है। संसद से लेकर सड़क तक कई मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ कांग्रेस का साथ देने वाले दलों ने भी इस विरोध को अनुचित बताया है।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब नई दिल्ली के भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा सम्मेलन चल रहा था, जिसमें 118 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। ऐसे मंच पर हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने गंभीर टिप्पणी की है।
Youth Congress Protest Controversy पर अखिलेश यादव की कड़ी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने इस मुद्दे पर सबसे गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन वैश्विक मंच पर ऐसा विरोध प्रदर्शन उचित नहीं था।
अखिलेश यहीं नहीं रुके। उन्होंने कांग्रेस को एक तरह से नसीहत देते हुए कहा कि देश को विदेशी प्रतिनिधियों के सामने शर्मिंदा करने से बचना चाहिए। उनका बयान इस पूरे विवाद में सबसे प्रभावशाली माना जा रहा है क्योंकि वे अक्सर राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस के साथ खड़े दिखते रहे हैं।
Youth Congress Protest Controversy पर मनोज झा की सलाह
राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सदस्य Manoj Jha ने भी कांग्रेस को संयम की सलाह दी। उनका कहना था कि शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन विरोध का तरीका बेहतर होना चाहिए।
यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरजेडी अक्सर कांग्रेस के साथ राजनीतिक तालमेल में रहती है। ऐसे में सहयोगी दलों द्वारा सार्वजनिक रूप से आलोचना करना विपक्षी एकता में दरार की तरह देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें : https://livebihar.com/pawan-singh-akshara-singh-viral-video-podcast/
India AI Impact Conference और वैश्विक उपस्थिति का महत्व

यह विरोध प्रदर्शन जिस मंच पर हुआ, वह साधारण कार्यक्रम नहीं था। India AI Impact Conference में 16 फरवरी से 21 फरवरी तक 118 देशों के सरकारी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
• 22 देशों के शासनाध्यक्ष और मंत्री स्तर के 59 प्रतिनिधि शामिल हुए।
• 100 से अधिक वैश्विक एआई नेता उपस्थित थे।
• 500 से अधिक स्टार्टअप्स ने भागीदारी की।
• सम्मेलन के बाद जारी नई दिल्ली घोषणापत्र पर 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर किए।
इस घोषणापत्र पर United States, United Kingdom, France, China और Russia जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
गौरतलब है कि इससे पहले पेरिस में हुए एआई सम्मेलन के घोषणा पत्र पर अमेरिका और ब्रिटेन ने हस्ताक्षर नहीं किए थे। इस दृष्टि से नई दिल्ली सम्मेलन को कूटनीतिक सफलता माना गया। ऐसे मंच पर विरोध प्रदर्शन को कई दलों ने असंवेदनशील और जल्दबाजी भरा कदम बताया।
विरोध की परंपरा बनाम मंच की मर्यादा
भारतीय राजनीति में विरोध की मजबूत परंपरा रही है। संसद से सड़क तक विरोध दर्ज कराने की परिकल्पना को समाजवादी विचारक Ram Manohar Lohia ने लोकप्रिय बनाया था।
लोहियावादी राजनीति आक्रामक मानी जाती है, लेकिन यह भी स्वीकार किया गया है कि विरोध का स्थान और समय महत्वपूर्ण होता है। भारतीय राजनीति में आम सहमति रही है कि ऐसे मंच का चयन न हो, जिससे एक राष्ट्र के रूप में भारत को वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़े।
इसी संदर्भ में भारत मंडपम में हुए प्रदर्शन को कई सहयोगी दलों ने अनुचित ठहराया है।
Do Follow us : https://www.facebook.com/share/1CWTaAHLaw/?mibextid=wwXIfr
विपक्षी खेमे में हताशा या रणनीतिक चूक?
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती और वाईएसआर कांग्रेस नेता जगनमोहन रेड्डी भी इस प्रदर्शन को गलत बता चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस द्वारा इसे उचित ठहराया जाना विपक्षी खेमे में नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
कुछ विश्लेषकों के अनुसार, इसे कांग्रेस की राजनीतिक हताशा के रूप में देखा जा रहा है। वहीं विपक्षी दलों के भीतर यह धारणा भी बन रही है कि नेतृत्व स्तर पर दूरगामी सोच की कमी दिखाई दे रही है।
यह भी कहा जा रहा है कि पिछले आम चुनाव से पहले यदि विपक्षी नेतृत्व को लेकर व्यापक सहमति बनाई जाती, तो राजनीतिक परिदृश्य अलग हो सकता था। इस संदर्भ में बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar का नाम भी चर्चा में आता रहा है, जिनकी राष्ट्रव्यापी पहचान है।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक विरोध का तरीका रणनीतिक और संतुलित होना चाहिए?
Youth Congress Protest Controversy ने न सिर्फ सत्तापक्ष बल्कि विपक्षी एकता को भी चुनौती दी है। 118 देशों की मौजूदगी वाले मंच पर विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक बहस को तीखा और भावनात्मक बना दिया है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दल इस मुद्दे से क्या सबक लेते हैं और क्या राजनीतिक रणनीति में कोई बदलाव दिखाई देता है।
Do Follow us : https://www.youtube.com/results?search_query=livebihar

