सहरसा, संवाददाता
सहरसा जिले को स्थापित हुए 72 वर्ष पूरे हो गए हैं। एक अप्रैल 1954 को भागलपुर और मुंगेर के कुछ हिस्सों को मिलाकर इस जिले का गठन किया गया था। 2 अक्टूबर 1972 को इसे कोसी प्रमंडल का मुख्यालय बनाया गया। जिले में सदर अस्पताल, राजकीय पॉलिटेक्निक, महिला कॉलेज और स्कूलों की स्थापना हुई। साथ ही, सरकारी कार्यालय और आवासीय परिसर भी बनाए गए। लेकिन आज तक जिले में एक भी विश्वविद्यालय नहीं है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिले ने प्रगति की है। दो निजी मेडिकल कॉलेज, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और आईटीआई की स्थापना हुई है। पिछले साल सरकारी मेडिकल कॉलेज को मंजूरी मिली। लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। रिटायर्ड प्रोफेसर रामजी प्रसाद (80) बताते हैं कि 1980 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा ने विश्वविद्यालय निर्माण की पहल की थी। सहरसा कॉलेज में इसकी आधारशिला भी रखी गई। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के कार्यकाल में यह विश्वविद्यालय मधेपुरा में स्थानांतरित कर दिया गया।
विद्यार्थी विद्याभूषण ने बताया कि बिहार के सभी 9 प्रमंडलों के जिला मुख्यालयों में विश्वविद्यालय है। केवल सहरसा ही ऐसा कमिश्नरी मुख्यालय है, जहां विश्वविद्यालय नहीं है। इससे क्षेत्र के छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विकास की एक अन्य बड़ी बाधा है रेलवे फ्लाईओवर का न होना। दो भागों में विभक्त रेल मार्ग के ऊपर आज तक फ्लाईओवर का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे नागरिकों को दैनिक यातायात में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सहरसा का 72वां स्थापना दिवस, कोसी प्रमंडल का बना मुख्यालय
