समस्तीपुर में लोहिया स्वच्छता अभियान धरातल पर फेल8 साल बाद भी डोर-टू-डोर कचरा संग्रह नहीं हो रहा, बेकार पड़ी ई-रिक्शा

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समस्तीपुर, संवाददाता
समस्तीपुर में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान जमीनी स्तर पर फेल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2016 में सात निश्चय के तहत इस अभियान की शुरुआत की थी। आठ-नौ साल बीत जाने के बाद भी अभियान की स्थिति खराब बनी हुई है। फेज 2 के तहत सभी पंचायतों में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट्स का निर्माण किया गया। प्रत्येक वार्ड में एक सफाई कर्मी और पंचायत स्तर पर एक सुपरवाइजर की नियुक्ति का प्रावधान है।
सफाई कर्मियों के लिए 2500 रुपये और सुपरवाइजर के लिए 5,000 रुपये प्रति माह मानदेय तय किया गया। कचरा संग्रह के लिए वार्ड स्तर पर एक ट्रॉली और पंचायत के लिए एक ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई। खानपुर पंचायत की स्थिति चिंताजनक है। यहां जगह-जगह कचरे का अंबार लगा है। पंचायत को मिला ई-रिक्शा बेकार पड़ा है। सफाई कर्मियों का कहीं पता नहीं है। वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट में ताला लटका रहता है।
पंचायत के वार्ड पांच के जनप्रतिनिधि मोहम्मद इसराइल के अनुसार, पुरुषोत्तम अनु पंचायत के सभी 15 वार्डों में सफाई कर्मियों की नियुक्ति की गई। ग्रामीण बालेश्वर राय का कहना है कि स्वच्छता मिशन सिर्फ कागजों तक सीमित है। बीडीओ विजय कुमार चंद्रा ने बताया कि वार्ड पांच में सफाई कार्य रुका हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि खराब पेडल रिक्शा की मरम्मत और पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर जल्द ही गांव की सफाई कराई जाएगी।

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