बुद्धिस्ट नेता के धरने को बताया अंतरराष्ट्रीय साजिश, कार्रवाई की मांग गया में मुक्ति आंदोलन के अध्यक्ष बोले – चंदे के नाम पर हो रही ठगी, उनके दावे झूठे

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गया, संवाददाता
गया में जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त कर दुनिया को शांति और करुणा का संदेश दिया, उसी पवित्र भूमि पर तथाकथित बुद्धिस्ट नेता आकाश लामा के नेतृत्व में एक धरना जारी है। इस मामले में महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के अध्यक्ष भंते आनंद का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह से गैरकानूनी और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। प्रदर्शनकारियों को न तो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की जानकारी है, न ही वो इस पवित्र भूमि के सम्मान की परवाह कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस धरने का असली मकसद बोधगया की अंतरराष्ट्रीय साख को धूमिल करना और भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना है। प्रदर्शन में जिस भाषा और व्यवहार का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि सीधे-सीधे बौद्ध सिद्धांतों के भी खिलाफ जाता है।
भंते आनंद ने कहा कि इस धरने से साफ है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कुछ भारत विरोधी ताकतें देश की एकता को तोड़ने और भारत को विश्व गुरु बनने से रोकने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में भारत सरकार और प्रशासन से मांग की जाती है कि वो इस गैरकानूनी आंदोलन पर तत्काल सख्त कार्रवाई करें।
उन्होंने कहा कि 12 अप्रैल को बुद्ध जयंती मनाई जाएगी। यह बीते 37 वर्षों से मनाई जा रही है। इस मौके पर हजारों बौद्ध भिक्षु, श्रद्धालु अनुयायी भाग लेंगे। भंते आनंद कहा कि यह पूरा आंदोलन कुछ स्वार्थी और अवसरवादी लोगों के इशारों पर चल रहा है। सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक तथ्यों का प्रचार कर बुद्धिस्ट अनुयायियों से चंदा वसूला जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आकाश लामा, भंते करुणाशील, भंते सुमित रत्न और भंते प्रज्ञा शील जैसे लोग अपने निजी बैंक खातों में चंदे की रकम मंगवा रहे हैं। यह सीधे तौर पर इनकी लोभी मानसिकता को उजागर करता है।
इस तरह के भड़काऊ बयानों और झूठे तथ्यों से समाज में वैमनस्यता फैलाने की कोशिश की जा रही है, जिससे हिंसा की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने आशंका जताई कि यह न केवल बोधगया के लिए खतरा है, बल्कि पूरे देश की शांति और सौहार्द को बिगाड़ने की साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
भंते आनंद ने कहा कि गौर करने वाली बात यह है कि इस धरने को किसी भी प्रमुख बौद्ध भिक्षु, तिब्बती या महायान बौद्ध अनुयायियों का समर्थन नहीं मिला है। यह इस बात का प्रमाण है कि आंदोलनकारी केवल अपने निजी स्वार्थ और विदेशी शक्तियों के इशारे पर काम कर रहे हैं।

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