बिहार की राजनीति में एक बार फिर नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा श्रेणी में कटौती के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस फैसले को सीधे तौर पर बदले की राजनीति करार देते हुए कहा है कि सत्ता पक्ष विपक्ष की मजबूत आवाज से घबराया हुआ है।
- Tejashwi Yadav Security Cut: तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती पर राजद का आरोप
- Tejashwi Yadav Security Cut: “यह खौफ की राजनीति है” – शक्ति यादव
- Tejashwi Yadav Security Cut: सत्ताधारी नेताओं की सुरक्षा में इजाफा
- Tejashwi Yadav Security Cut: तेजस्वी यादव की सुरक्षा: Z से Y+ तक का सफर
- Tejashwi Yadav Security Cut: कांग्रेस नेता की सुरक्षा हटाने पर भी सवाल
- Tejashwi Yadav Security Cut: बिहार की राजनीति में सुरक्षा बनाम लोकतंत्र की बहस
Tejashwi Yadav Security Cut: तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती पर राजद का आरोप
राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा घटाना यह दर्शाता है कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों से भटक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल अपने नेताओं और मंत्रियों की सुरक्षा बढ़ा रहा है, जबकि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती की जा रही है।
शक्ति यादव ने सवाल उठाया कि जब सत्ता पक्ष के प्रदेश अध्यक्षों, केंद्रीय मंत्रियों और सत्ताधारी नेताओं को Z और Y+ जैसी उच्च श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही है, तो विपक्ष के नेता को सुरक्षा की जरूरत क्यों नहीं मानी जा रही। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र का अहम स्तंभ है और उसकी आवाज को दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
Tejashwi Yadav Security Cut: “यह खौफ की राजनीति है” – शक्ति यादव

राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने साफ शब्दों में कहा कि तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती बदले की राजनीति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष अपने नेताओं की सुरक्षा बढ़ा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार खुद मानती है कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि अगर बिहार में कानून राज मजबूत है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर सत्ताधारी नेताओं की सुरक्षा क्यों बढ़ाई जा रही है। यह स्थिति सरकार के भीतर व्याप्त भय और असुरक्षा को दर्शाती है।
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Tejashwi Yadav Security Cut: सत्ताधारी नेताओं की सुरक्षा में इजाफा
बिहार सरकार द्वारा हाल के दिनों में कई सत्ताधारी नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में इजाफा किया गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके साथ ही जदयू सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को भी Z कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है।
इसके अलावा बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को भी Z श्रेणी की सुरक्षा मिली है। वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की सुरक्षा Y श्रेणी से बढ़ाकर Y+ कर दी गई है।
Tejashwi Yadav Security Cut: Z और Y+ सुरक्षा का सियासी संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में इस तरह के बदलाव केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होते, बल्कि इसके सियासी संकेत भी होते हैं। सत्ताधारी नेताओं की सुरक्षा बढ़ना और विपक्षी नेताओं की सुरक्षा घटना, राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।
Tejashwi Yadav Security Cut: तेजस्वी यादव की सुरक्षा: Z से Y+ तक का सफर
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में पहले भी बदलाव किए जा चुके हैं। चुनाव से पहले उनकी सुरक्षा Y+ से बढ़ाकर Z श्रेणी कर दी गई थी। उस समय इसे चुनावी माहौल और संभावित खतरों से जोड़कर देखा गया था।
लेकिन अब चुनावी माहौल समाप्त होने के बाद तेजस्वी यादव की सुरक्षा एक बार फिर Z श्रेणी से घटाकर Y+ कर दी गई है। इसी फैसले को लेकर राजद ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।
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Tejashwi Yadav Security Cut: कांग्रेस नेता की सुरक्षा हटाने पर भी सवाल
सिर्फ तेजस्वी यादव ही नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता राजेश राम की सुरक्षा पूरी तरह हटाए जाने को लेकर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर है। विपक्ष का कहना है कि यह सिलसिला दर्शाता है कि सरकार चुनिंदा नेताओं को ही सुरक्षा देने की नीति अपना रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा हटाने या घटाने के फैसले विपक्षी दलों के लिए संवेदनशील मुद्दा बनते जा रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति पहले से ही गरमाई हुई है।
Tejashwi Yadav Security Cut: बिहार की राजनीति में सुरक्षा बनाम लोकतंत्र की बहस
नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था अब सिर्फ प्रशासनिक विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में लोकतंत्र और सत्ता संतुलन की बहस का हिस्सा बन चुकी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे सड़क से सदन तक उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस फैसले को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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