AI Copyright Licensing Row: IMPPA ने ‘हाइब्रिड लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क’ खत्म करने की मांग उठाई, सरकार को भेजा कड़ा अभ्यावेदन

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एआई ट्रेनिंग कॉपीराइट ढांचे के खिलाफ फिल्म प्रोड्यूसर्स का विरोध
Highlights
  • • IMPPA ने सरकार को भेजा अभ्यावेदन • हाइब्रिड कॉपीराइट लाइसेंसिंग का विरोध • बिना सहमति AI ट्रेनिंग पर आपत्ति • 26 हजार से अधिक सदस्य प्रभावित • कॉपीराइट एक्ट 1957 को बताया पर्याप्त • फिल्मों को “रॉ मैटेरियल” मानने पर नाराज़गी • अंतरराष्ट्रीय निवेश पर असर की चेतावनी

भारतीय फिल्म और मनोरंजन उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर कॉपीराइट विवाद तेज हो गया है। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने AI ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित “हाइब्रिड” कॉपीराइट लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क का कड़ा विरोध करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से इसे पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि फिल्म, संगीत और अन्य मनोरंजन कंटेंट को किसी भी अनिवार्य या सामान्य लाइसेंसिंग व्यवस्था से बाहर रखा जाना चाहिए।

IMPPA ने DPIIT की निदेशक सिमरत कौर को भेजे गए अपने अभ्यावेदन में स्पष्ट कहा कि:
• एआई ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित लाइसेंसिंग ढांचा स्वीकार्य नहीं है
• फिल्म और ऑडियो-विजुअल कंटेंट को इससे बाहर रखा जाए
• अनिवार्य लाइसेंसिंग रचनाकारों के अधिकारों का हनन करेगी

साथ ही संगठन ने जनरेटिव AI और कॉपीराइट विषयों की जांच कर रही समिति की अध्यक्ष तथा DPIIT की अतिरिक्त सचिव हिमानी पांडे को भी अलग से पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया।

IMPPA अध्यक्ष अभय सिन्हा ने 19 जनवरी 2026 को जारी पत्र (संदर्भ: IMPPA/130/5007/2026) में कहा कि:
• सदस्यों और अधिकार धारकों से व्यापक चर्चा की गई
• प्रस्तावित फ्रेमवर्क का विस्तृत अध्ययन किया गया
• वर्तमान स्वरूप में यह पूरी तरह अस्वीकार्य है

संगठन ने दोहराया कि AI ट्रेनिंग के लिए किसी भी कॉपीराइटेड कंटेंट का उपयोग पूर्व स्पष्ट सहमति के बिना नहीं होना चाहिए।

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अभय सिन्हा ने कहा कि IMPPA:
• 1937 से उद्योग के हितों की रक्षा कर रहा है
• इसके 26,000 से अधिक सदस्य हैं
• सदस्य देश और विदेश दोनों में सक्रिय हैं

इनमें शामिल हैं:
• फिल्म प्रोड्यूसर
• टीवी और वेब सीरीज़ निर्माता
• म्यूजिक कंपनियां
• OTT कंटेंट क्रिएटर
• एनिमेशन और पोस्ट-प्रोडक्शन सर्विस प्रोवाइडर

IMPPA ने DPIIT के वर्किंग पेपर पर चर्चा का स्वागत किया, लेकिन चेतावनी भी दी।

संगठन का तर्क है:
• अनिवार्य लाइसेंसिंग रचनात्मक स्वतंत्रता को कमजोर करेगी
• कंटेंट निवेश पर नकारात्मक असर पड़ेगा
• प्रोड्यूसर के आर्थिक अधिकार घटेंगे

उनका कहना है कि AI कंपनियों को कंटेंट उपयोग के लिए बाजार आधारित, स्वैच्छिक समझौते करने चाहिए।

AI Copyright Licensing Row: IMPPA ने ‘हाइब्रिड लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क’ खत्म करने की मांग उठाई, सरकार को भेजा कड़ा अभ्यावेदन 1

IMPPA ने स्पष्ट कहा कि:
• मौजूदा कॉपीराइट कानून पूरी तरह सक्षम है
• इसमें बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं

संगठन के अनुसार:
• AI ट्रेनिंग लाइसेंस की कमी कानून की कमजोरी नहीं
• यह बाजार के शुरुआती विकास चरण का परिणाम है
• इस समय अनिवार्य व्यवस्था लागू करना जल्दबाजी होगी

इससे स्वाभाविक मूल्य निर्धारण प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

पत्र में यह भी जोर दिया गया कि:
• कॉपीराइट केवल भुगतान का सवाल नहीं
• यह उपयोग की अनुमति तय करने का अधिकार भी देता है

बिना अनुमति कंटेंट उपयोग से:
• रचनात्मक स्वतंत्रता प्रभावित होगी
• व्यावसायिक रणनीति कमजोर होगी
• ब्रांड प्रतिष्ठा को नुकसान होगा

IMPPA ने कहा कि सिनेमैटोग्राफ फिल्में और प्रीमियम ऑडियो-विजुअल कंटेंट:
• हाई-वैल्यू इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी हैं
• इनमें भारी निवेश शामिल होता है
• जटिल अनुबंध संरचनाएं होती हैं

भारतीय कानून ने फिल्मों को पहले से वैधानिक लाइसेंसिंग से बाहर रखा है।

ऐसे में AI ट्रेनिंग के लिए इन्हें “रॉ मैटेरियल” की तरह उपयोग करना अनुचित बताया गया।

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संगठन ने सरकार को आगाह किया कि:
• बिना सहमति AI ट्रेनिंग की अनुमति
• क्रिएटिव इकॉनमी को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाएगी
• विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है

इससे भारत के मीडिया-एंटरटेनमेंट सेक्टर की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित हो सकती है।

IMPPA की प्रमुख मांगें:
• प्रस्तावित “हाइब्रिड” कॉपीराइट लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क समाप्त हो
• AI ट्रेनिंग केवल पूर्व अनुमति से हो
• राइट्स होल्डर की सहमति अनिवार्य बनाई जाए

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