अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी के बीच एक बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक कदम सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया कार्यकारी आदेश जारी कर साफ चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार जारी रखेगा, उस पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जा सकता है। आदेश में शुल्क की अंतिम दर तय नहीं की गई है, लेकिन उदाहरण के तौर पर 25 प्रतिशत तक शुल्क का उल्लेख किया गया है। इस फैसले ने वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिरता को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
- US Iran Tension Tariff Warning – ईरान से व्यापार पर अमेरिकी आर्थिक दबाव
- US Iran Tension Tariff Warning – ओमान वार्ता के बीच आया आदेश
- US Iran Tension Tariff Warning – 2015 परमाणु समझौते से शुरू हुआ विवाद
- US Iran Tension Tariff Warning – सुलेमानी से परमाणु हमलों तक बढ़ा टकराव
- US Iran Tension Tariff Warning – वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
- US Iran Tension Tariff Warning – युद्ध या वार्ता?
US Iran Tension Tariff Warning – ईरान से व्यापार पर अमेरिकी आर्थिक दबाव
जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी देश यदि सीधे या परोक्ष रूप से ईरान से वस्तु या सेवा खरीदता है, तो उसे अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। इसे आर्थिक घेराबंदी की रणनीति का विस्तार माना जा रहा है।
ट्रंप ने अलग से बयान जारी कर दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। उनका कहना है कि यह कदम केवल आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा निर्णय है।
US Iran Tension Tariff Warning – ओमान वार्ता के बीच आया आदेश
यह फैसला ऐसे समय आया है जब ओमान में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई है। कई सप्ताह की तीखी बयानबाजी और धमकियों के बाद शुरू हुई यह बातचीत तनाव कम करने की कोशिश मानी जा रही थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत को “अच्छी शुरुआत” बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा है। उन्होंने खास तौर पर हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि परमाणु ठिकानों पर हमले जैसी कार्रवाई भरोसा बहाली में बाधा है।
दूसरी ओर ट्रंप ने भी वार्ता को सकारात्मक बताया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो परिणाम बेहद सख्त होंगे।
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US Iran Tension Tariff Warning – बातचीत के एजेंडे पर मतभेद
अमेरिका चाहता है कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित न रहे। वॉशिंगटन बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन और मानवाधिकार जैसे मुद्दों को भी शामिल करना चाहता है।
वहीं तेहरान का रुख बिल्कुल अलग है। ईरान का कहना है कि चर्चा केवल परमाणु कार्यक्रम पर होगी और उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार मिलना चाहिए। ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
US Iran Tension Tariff Warning – 2015 परमाणु समझौते से शुरू हुआ विवाद

वर्तमान तनाव की जड़ें वर्ष 2015 के परमाणु समझौते में हैं। इस समझौते के तहत ईरान को सीमित स्तर तक यूरेनियम संवर्धन की अनुमति दी गई थी और उस पर कड़ी अंतरराष्ट्रीय निगरानी थी। बदले में उस पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंध हटा दिए गए थे।
लेकिन वर्ष 2018 में ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया और फिर से कठोर प्रतिबंध लागू कर दिए। तेल निर्यात, जहाजरानी और बैंकिंग प्रणाली पर लगी पाबंदियों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया।
जवाब में ईरान ने भी समझौते की सीमाओं से आगे बढ़कर संवर्धन गतिविधियां तेज कर दीं।
US Iran Tension Tariff Warning – सुलेमानी से परमाणु हमलों तक बढ़ा टकराव
वर्ष 2020 में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी अमेरिकी हमले में मारे गए, जिससे टकराव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध बहाली की कोशिशें हुईं।
वर्ष 2025 में अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया। जवाब में ईरान ने कतर स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल दागी, हालांकि उसमें जान का नुकसान नहीं हुआ।
पश्चिमी देशों के प्रयास से संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध भी दोबारा लागू किए गए।
US Iran Tension Tariff Warning – नए प्रतिबंध और इजराइल की चेतावनी
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रो रसायन क्षेत्र से जुड़े 15 संस्थानों और कई जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि किसी भी हमले का जोरदार जवाब दिया जाएगा और अमेरिका के साथ समन्वय बेहद गहरा है।
US Iran Tension Tariff Warning – वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
ट्रंप का शुल्क हथियार केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। यह कदम उन देशों को मुश्किल स्थिति में डाल सकता है जो ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरानी तेल पर निर्भर हैं।
यदि देश ईरान से व्यापार जारी रखते हैं तो उन्हें अमेरिकी बाजार में नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं व्यापार रोकते हैं तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक तेल कीमतों, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा असर पड़ेगा।
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US Iran Tension Tariff Warning – युद्ध या वार्ता?
एक ओर वार्ता चल रही है, दूसरी ओर सैन्य तैयारियों के संकेत भी दिए जा रहे हैं। अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की तैनाती, मिसाइल चर्चाएं और प्रतिबंधों की बौछार — यह सब मिलकर तनाव को और गहरा बना रहे हैं।
ईरान भी झुकने के मूड में नहीं दिख रहा और बार-बार अपने अधिकारों की बात दोहरा रहा है। ऐसे में किसी छोटी चिंगारी के बड़े संघर्ष में बदलने का खतरा बना हुआ है।
मौजूदा हालात में शुल्क, प्रतिबंध और सैन्य दबाव — तीनों समानांतर चल रहे हैं। यदि भरोसे की बहाली, चरणबद्ध रियायत और स्पष्ट समझौता ढांचा नहीं बना, तो यह टकराव पूरे पश्चिम एशिया ही नहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। अभी भी कूटनीति के रास्ते खुले हैं, लेकिन समय तेजी से निकल रहा है।
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