Bihar News : विधान परिषद में कानून व्यवस्था पर घमासान, राबड़ी देवी पर टिप्पणी के बाद हाथापाई की नौबत

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राबड़ी देवी पर टिप्पणी के बाद सदन में भारी हंगामा
Highlights
  • • कानून-व्यवस्था पर विपक्ष ने सरकार को घेरा • सुनील कुमार और अशोक चौधरी में तीखी बहस • नीरज कुमार के बयान से बढ़ा विवाद • राबड़ी देवी पर टिप्पणी के बाद हंगामा • हाथापाई जैसी स्थिति, कार्यवाही स्थगित

बिहार विधान परिषद में सोमवार को भोजनावकाश के बाद जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, सदन का माहौल अचानक गरमा गया। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस इतना बढ़ गई कि स्थिति हंगामे से आगे बढ़कर हाथापाई जैसी बनती नजर आई। अंततः हालात बिगड़ते देख सभापति को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

Bihar News : कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सदन में तीखी बहस

भोजनावकाश के बाद कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोल दिया। राजद के सुनील कुमार ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया और राज्य में अपराध की घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।

इस पर सरकार की ओर से मंत्री अशोक चौधरी ने जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है।

बहस यहीं नहीं रुकी। जदयू एमएलसी नीरज कुमार भी चर्चा में कूद पड़े और उन्होंने राजद पर तीखा हमला बोल दिया। उन्होंने चुनावी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब राजद यह आरोप लगाता है कि विधानसभा चुनाव में वोट चोरी कर जीत हासिल की गई, तो फिर उसी तर्क से तेजस्वी यादव की जीत पर भी सवाल उठता है।

उनके इस बयान के बाद विपक्षी सदस्य भड़क गए और सदन में शोर-शराबा तेज हो गया।

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Bihar News : सभापति ने विपक्ष के रवैये पर उठाए सवाल

Bihar News : विधान परिषद में कानून व्यवस्था पर घमासान, राबड़ी देवी पर टिप्पणी के बाद हाथापाई की नौबत 1

हंगामे के बीच सभापति अवधेश नारायण सिंह ने हस्तक्षेप किया और विपक्षी सदस्यों के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सदन नियम और प्रक्रिया से चलता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कार्यसूची पहले से तय रहती है—किस मुद्दे पर चर्चा होगी, कौन सदस्य बोलेंगे, और किस क्रम में बात रखी जाएगी—यह सब निर्धारित होता है। ऐसे में बिना पूर्व सूचना या नोटिस दिए अचानक कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर विषय पर हंगामा करना संसदीय परंपरा के अनुरूप नहीं है।

सभापति ने विपक्ष को मर्यादा में रहने की नसीहत दी और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने के भी नियम होते हैं। हालांकि उनकी इस सख्त टिप्पणी के बावजूद विपक्ष का शोर-शराबा कम नहीं हुआ।

Bihar News : राबड़ी देवी और लालू-राबड़ी शासन पर टिप्पणी से भड़का विवाद

सदन का माहौल उस समय और ज्यादा विस्फोटक हो गया जब सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और लालू-राबड़ी शासन के 15 वर्षों के कार्यकाल पर टिप्पणी कर दी।

यह टिप्पणी विपक्ष, खासकर राजद सदस्यों को बेहद आपत्तिजनक लगी। पहले राबड़ी देवी खुद नाराज होकर खड़ी हुईं और सत्ता पक्ष की ओर बढ़ीं। इसके बाद अन्य राजद सदस्य भी आक्रोश में आ गए और वे भी तेजी से सत्ता पक्ष के सदस्यों की ओर बढ़ने लगे।

देखते ही देखते स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई और हाथापाई की नौबत आ गई। सदन के भीतर नारेबाजी शुरू हो गई और माहौल पूरी तरह अराजक होता दिखा।

Bihar News : वेल में नारेबाजी, कार्यवाही स्थगित

राजद सदस्यों ने आक्रोश में आकर सदन के वेल में पहुंचकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सत्ता पक्ष के सदस्य भी जवाबी शोर करने लगे।

सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती देख सभापति ने कई बार व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की, लेकिन जब हालात काबू से बाहर होते दिखे तो उन्होंने कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लिया।

कार्यवाही स्थगन की घोषणा के बाद भी कुछ समय तक सदन में हंगामे का माहौल बना रहा।

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Bihar News : राजनीतिक संदेश और चुनावी पृष्ठभूमि

इस पूरे घटनाक्रम को केवल सदन के भीतर की नोकझोंक के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी समझा जा रहा है।

राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, और पूर्व शासनकाल के मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आने लगे हैं। सत्ता पक्ष जहां पिछली सरकारों के कार्यकाल को निशाने पर ले रहा है, वहीं विपक्ष मौजूदा सरकार की प्रशासनिक विफलताओं को मुद्दा बना रहा है।

ऐसे में विधान परिषद और विधानसभा दोनों ही आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव के बड़े मंच बन सकते हैं।

Bihar News : संसदीय मर्यादा पर फिर उठे सवाल

सदन में जिस तरह की स्थिति बनी, उसने एक बार फिर संसदीय आचरण और मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। तीखी बहस लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन शारीरिक टकराव की स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है।

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