बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया। 18वें दिन राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों ने दलित परिवारों को जमीन देने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में पोस्टर और नारों के साथ विपक्षी विधायकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
विधानसभा परिसर में यह विरोध केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सम्मानजनक जीवन और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बताया गया। राजद विधायकों का कहना है कि राज्य में बड़ी संख्या में दलित परिवार आज भी भूमिहीन हैं और उन्हें आवास योग्य जमीन देना सरकार की जिम्मेदारी है।
Bihar Budget: दलितों को 3 डिसमिल जमीन देने की मांग पर सदन में हंगामा
राजद विधायकों ने स्पष्ट रूप से तीन डिसमिल जमीन देने की मांग उठाई। उनका तर्क है कि इतनी जमीन मिलने से गरीब परिवार अपना घर बना सकेंगे और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगे। विपक्ष का आरोप है कि दलितों से किए गए वादों पर सरकार गंभीर पहल नहीं कर रही है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नजर नहीं आ रहा।
विधायकों ने सदन के अंदर भी इस मुद्दे पर चर्चा की और सरकार से जवाब मांगा। उनका कहना था कि जमीन का अधिकार केवल संपत्ति का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और आत्मसम्मान का आधार है। यदि दलित परिवारों को आवास योग्य जमीन नहीं दी गई, तो यह सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत होगा।
राजद के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विपक्ष का रुख साफ है कि यह लड़ाई दलितों के हक और अधिकार की है, और वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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Bihar Budget: भाई वीरेंद्र का अमित शाह पर तीखा हमला
प्रदर्शन के दौरान राजद विधायक Bhai Virendra ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री जहां भी जाते हैं, वहां सांप्रदायिक माहौल बिगड़ता है और आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है।
उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया। भाजपा की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह इस टिप्पणी को लेकर चर्चा तेज रही।
गौरतलब है कि अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर हैं। उनका यह दौरा भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरुवार को वे Araria जिले में महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेने वाले हैं, जहां सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा की जाएगी।
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Bihar Budget: जमीन का सवाल और राजनीतिक समीकरण
बजट सत्र के बीच उठी यह मांग आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकती है। विपक्ष इसे सामाजिक न्याय का मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूमि वितरण का मुद्दा बिहार की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है। भूमिहीन दलित परिवारों को जमीन देने का वादा कई चुनावों में प्रमुख मुद्दा रहा है। ऐसे में बजट सत्र के दौरान इस मांग को उठाना रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है।
विपक्ष की रणनीति साफ दिखती है—सामाजिक न्याय और अधिकार के मुद्दे पर सरकार को घेरना। वहीं सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह बजट प्रावधानों और योजनाओं के जरिए क्या ठोस कदम उठाती है।
आगे क्या?
अब नजरें सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या बजट में या आगामी योजनाओं में भूमिहीन दलित परिवारों के लिए कोई विशेष प्रावधान किया जाएगा? या यह मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहेगा?
विधानसभा का बजट सत्र अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है। दलितों को तीन डिसमिल जमीन देने की मांग फिलहाल राजनीतिक केंद्र में आ चुकी है।
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