President Visit Row: बंगाल दौरे पर राष्ट्रपति मुर्मू के स्वागत को लेकर विवाद, ममता बनर्जी और केंद्र आमने-सामने

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राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे पर स्वागत को लेकर राजनीतिक विवाद
Highlights
  • • राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे पर सियासी विवाद • स्वागत के लिए मुख्यमंत्री या मंत्री के न पहुंचने पर सवाल • ब्लू बुक प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा • भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप • कार्यक्रम स्थल बदलने पर भी उठे सवाल

राष्ट्रपति के बंगाल दौरे के बाद शुरू हुआ नया सियासी विवाद

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे के बाद एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विवाद इस बात को लेकर है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए खुद मौजूद नहीं थीं और न ही उनकी ओर से किसी मंत्री को स्वागत के लिए भेजा गया। प्रोटोकॉल से जुड़े जानकारों का कहना है कि भले ही मुख्यमंत्री का स्वयं उपस्थित होना अनिवार्य नहीं होता, लेकिन परंपरा और शिष्टाचार के तहत उनकी अनुपस्थिति में किसी मंत्री को स्वागत के लिए नामित किया जाता है।

इस मामले को लेकर अब केंद्र और राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रपति पद का अपमान बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पर पलटवार किया गया है।

President Visit Row: ब्लू बुक में तय होते हैं वीवीआईपी दौरों के नियम

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़ी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय की तथाकथित “ब्लू बुक” के तहत तय होती हैं। इस दस्तावेज में वीवीआईपी दौरों के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल और स्वागत से जुड़े सभी दिशा-निर्देश विस्तार से दिए जाते हैं।

ब्लू बुक की क्रमांकित प्रतियां संबंधित अधिकारियों को दी जाती हैं और जिला स्तर पर यह जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रमुख के पास रहती हैं। प्रोटोकॉल के अनुसार आम तौर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री इन गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हैं। अगर मुख्यमंत्री उपलब्ध नहीं होते, तो वे अपने किसी मंत्री को इसके लिए नामित करते हैं।

प्रोटोकॉल अधिकारियों के अनुसार ऐसे दौरों से पहले यह तय कर लिया जाता है कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या राज्य की सीमा पर कौन-कौन अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे। इस सूची को राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के कार्यालय को भेजा जाता है और उनकी मंजूरी के बाद अंतिम व्यवस्था तय की जाती है।

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पहले भी कई मौकों पर रहा है केंद्र और ममता सरकार के बीच टकराव

President Visit Row: बंगाल दौरे पर राष्ट्रपति मुर्मू के स्वागत को लेकर विवाद, ममता बनर्जी और केंद्र आमने-सामने 1

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच किसी मुद्दे को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कई घटनाएं सामने आई हैं जिनमें दोनों पक्षों के बीच टकराव देखने को मिला।

उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली बैठकों में ममता बनर्जी का देर से पहुंचना या बीच में बैठक छोड़कर जाना चर्चा का विषय रहा है। कोविड-19 समीक्षा बैठक और चक्रवात के बाद आयोजित बैठकों में भी इस तरह की घटनाएं सामने आई थीं, जिन्हें केंद्र सरकार ने सहकारी संघवाद के खिलाफ बताया था।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल में सीबीआई की कार्यवाही को सीमित करने या केंद्रीय जांच एजेंसियों के राज्य में प्रवेश के लिए अनुमति अनिवार्य करने जैसे फैसलों को भी केंद्र के प्रति अविश्वास के तौर पर देखा गया।

President Visit Row: पूर्व राज्यपाल धनखड़ के साथ भी रहा टकराव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच भी कई बार सार्वजनिक टकराव देखने को मिला। दोनों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए, जिससे केंद्र और राज्य के रिश्तों में तनाव की स्थिति बनी रही।

विश्लेषकों का मानना है कि हालिया विवाद को भी उसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जहां केंद्र और राज्य के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर मतभेद मौजूद रहे हैं।

कार्यक्रम स्थल को लेकर भी उठे सवाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय के एक वार्षिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जो मूल रूप से बिधाननगर में आयोजित होने वाला था। हालांकि सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशैपुर में आयोजित किया गया।

जब राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं तो वहां अपेक्षाकृत कम लोग मौजूद थे। सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए उपस्थित थे। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि ममता बनर्जी उनकी छोटी बहन की तरह हैं और वह खुद को भी बंगाल की बेटी मानती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि मुख्यमंत्री नाराज हैं या नहीं। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम स्थल बदलने को लेकर भी सवाल उठाया।

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President Visit Row: ममता बनर्जी ने भाजपा पर लगाया राजनीतिक आरोप

इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति के लिए राष्ट्रपति के पद का इस्तेमाल कर रही है।

ममता बनर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक विवादों में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब मणिपुर और अन्य राज्यों में आदिवासी समुदाय के लोगों पर अत्याचार हुए, तब राष्ट्रपति की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है और शायद राष्ट्रपति को उन कार्यों की पूरी जानकारी नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी उठाया मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पश्चिम बंगाल में देश की राष्ट्रपति का अपमान हुआ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल आदिवासी परंपरा के एक बड़े उत्सव में शामिल होने के लिए बंगाल गई थीं।

इस पर ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही पत्र लिखकर आयोजकों की क्षमता को लेकर जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में आई कमियों के लिए आयोजक और एयरपोर्ट प्राधिकरण जिम्मेदार हैं, न कि राज्य सरकार।

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