Addiction to sweet food: आजकल भोजन उसकी गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर हर तरफ चर्चा हो रही है। हर कोई अपने डाइट चार्ट में तरह-तरह के बदलाव कर स्वस्थ औऱ निरोग बनना चाहता है। मुश्किल यह है कि डाइट चार्ट तो बन जाता है लेकिन उसे निभाना तब मुश्किल हो जाता है, जब मीठा खाने की तलब हावी होने लगती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो मीठा खाने की यह इच्छा कोई कमजोरी नहीं, बल्कि शरीर के संकेतों का नतीजा है। विज्ञान के कुछ सरल नियमों को अपनाकर आप इस लत को हमेशा के लिए छोड़ सकते हैं। इस लेख में हम बात करेंगे कि कैसे मीठा खाने की लत के मुक्ति मिले।
- Addiction to sweet food: नींद पूरी नहीं होने पर शरीर मांगता है कुछ मीठा
- Addiction to sweet food: शुगर फ्री’ और आर्टिफिशियल स्वीटनर बना देता है बूढ़ा
- Addiction to sweet food: ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण जरूरी
- Addiction to sweet food:मीठे की लत को छोड़ने का क्या है उपाय
- Addiction to sweet food: दिमाग की ‘गलत संकेतों पर कंट्रोल जरूरी
Addiction to sweet food: नींद पूरी नहीं होने पर शरीर मांगता है कुछ मीठा
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि नींद की कमी सीधे तौर पर आपकी खाने की पसंद को प्रभावित करती है। चर्चित मनोवैज्ञानिक अयान मर्चेंट कहते हैं कि जब हम ठीक से नहीं सोते, तो शरीर तुरंत ऊर्जा पाने के लिए मीठे की मांग करता है। यही कारण है कि कम नींद की वजह से भी कई बार मीठे पकवान खाने का अधिक मन करता है। शोध में पाया गया है कि अनिद्रा का इलाज कराने वाले लोगों में मीठा और नमकीन खाने की तलब में भारी कमी देखी गई है।
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Addiction to sweet food: शुगर फ्री’ और आर्टिफिशियल स्वीटनर बना देता है बूढ़ा
आजकल आर्टिफिशियल स्वीटनर हमारी रोजमर्रा के भोजन में शामिल हो गया है। बाजार में मिलने वाले किसी भी शुगर-फ्री प्रोसेस्ड फूड, प्रोटीन पाउडर, फ्लेवर्ड योगर्ट या डाइट सोडा को देखें तो उसके इंग्रीडिएंट्स में कोई-न-कोई आर्टिफिशियल स्वीटनर जरूर मिलेगा। ये स्वीटनर चीनी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि ये इंसुलिन स्पाइक नहीं करते और कैलोरी के बिना मिठास देते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये वाकई हमारी सेहत के लिए सुरक्षित है।वैज्ञानिकों का कहना है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। ये हमारे शरीर के विभिन्न अंगों पर बुरा असर डालते हैं। ये एक तरह से मीठे जहर की तरह काम करते हैं। ये अक्सर प्रोटीन पाउडर या डाइट ड्रिंक्स में छिपे होते हैं, इसलिए लेबल पढ़ना न भूलें।
Addiction to sweet food: ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण जरूरी
आम तौर पर हम अपने भोजन में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा को लेकर अनजान बने रहते हैं। हमारे भोजन में एनर्जी देने वाले तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्या रहती है। जब हम बिना फाइबर या प्रोटीन के सिर्फ मीठा या कार्बोहाइड्रेट (जैसे सफेद चावल, मैदा) खाते हैं, तो खून में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है और फिर उतनी ही तेजी से नीचे गिरता है। शुगर के स्तर में अचानक गिरावट दिमाग को संकेत देती है कि उसे और मीठा चाहिए।
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Addiction to sweet food:मीठे की लत को छोड़ने का क्या है उपाय
ज्यादातर न्यूट्रिशनिस्ट कहते हैं कि भोजन में कार्ब्स के साथ प्रोटीन व फाइबर की मात्रा होना बेहद जरूरी है। ये शुगर के पचने की गति धीमा कर देते हैं, जिससे ब्लड शुगर स्थिर रहता है। फल सब्जियों, सोयाबीन, चिकन और मोटे अनाज में फाइबर की मात्रा है तो दाल प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है
Addiction to sweet food: दिमाग की ‘गलत संकेतों पर कंट्रोल जरूरी
हेल्थ विशेषज्ञ मानते हैं कि हमारा दिमाग मीठा खाने पर ‘रिवॉर्ड सिग्नल’ भेजता है, जो धीरे-धीरे एक लत बन जाता है। फूड कंपनियां भी सुंदर पैकेजिंग और खास तरह की आवाज (जैसे कोल्ड ड्रिंक की बोतल खुलने की आवाज) से हमारे दिमाग को इसके लिए ‘कंडीशन’ करती हैं। इससे बचने के लिए सबसे पहले अपने वर्क-डेस्क या किचन से मीठे स्नैक्स हटा दें। धीरे-धीरे मीठे खाद्य पदार्थों से बचने का प्रयास करें और एक संकल्प के साथ मीठे को ना कर दें।
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