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बिहार की हॉटेस्ट सीट पटना के बांकीपुर पर शनिवार को हंगामा मच गया। ‘द प्लूरल्स पार्टी’ की अध्यक्ष और खुद को मुख्यमंत्री की दावेदार बताते हुए बांकीपुर सीट से उतरने वाली पुष्पम प्रिया की पार्टी का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन नहीं उपलब्ध होने के आधार पर जिला निर्वाचन कार्यालय ने उन्हें निर्दलीय घोषित कर दिया। आपको बता दें कि इससे पहले प्लूरल्स के कई उम्मीदवारों के संग ऐसा हो चुका है। पहले चरण के नामांकन में उनके जिन उम्मदवारों के नाम स्वीकृत हुए थे वे सभी निर्दलीय प्रत्याशी बताए गए थे।

वहीं पुष्पम के अलावा दूसरा बड़ा बवाल राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य और बिहार प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष सुषमा साहू के नामांकन रद्द होने के रूप में सामने आया। सुषमा ने भाजपा से बगावत कर बांकीपुर सीट पर नामांकन भरा था, जिसके कारण लगातार जीत रहे नितिन नवीन इस बार अपनी जीत को लेकर आशंकित हो उठे थे। सुषमा की पटना शहर और महिलाओं के बीच अच्छी पैठ है, जिसके कारण उनकी उम्मीदवारी से नितिन नवीन के साथ ही पूरी भाजपा परेशान थी।

सुषमा ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया था और अनुभव की कमी के कारण दस्तावेजों में शपथपत्र भरना भूल गईं। नामांकन रद्द होने की सूचना के साथ सुषमा का रो-रो कर बुरा हाल है तो दूसरी तरफ भाजपा ने राहत की सांस ली है।

बताते चलें कि बांकीपुर विधानसभा सीट इसलिए काफी हॉट होगी, क्योंकि अपने आपको मुख्यमंत्री का भावी उम्मीदवार बताने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी इस सीट से ताल ठोकेंगी। कांग्रेस ने इस सीट से शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा के बड़े बेटे लव सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी सीट से भाजपा नेत्री और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रह चुकी सुषमा साहू भी चुनाव लड़ने का मन बना चुकी थीं। इन सभी की टक्कर भाजपा के तीन बार के विधायक रहे नितिन नवीन से है।

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के बारे में बात करें तो 3 लाख 80 हजार वोटर यहां हैं। जिसमें करीब 1 लाख 77 हजार वोट महिलाओं का है और बाकी 2,03,000 वोट पुरुषों का है। 2015 में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में 40.2% वोट किया गया था। भाजपा के नितिन नवीन ने कांग्रेस के आशीष कुमार को 39,767 वोट से हराया था।

बांकीपुर कायस्थ बहुल इलाका है। कायस्थ एग्रेसिव वोटर माने जाते हैं। ऐसे में ब्राह्मण समुदाय की पुष्पम प्रिया चौधरी, वैश्य समुदाय से आने वाली सुषमा साहू और कायस्थ समाज से आने वाले लव सिन्हा और नितिन नवीन कितने वोटरों को अपने पक्ष में कर पाते हैं, यह दे,ाना दिलचस्प होगा।

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