Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में सियासत और सत्ता का अनोखा संगम
मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित दही-चूड़ा भोज ने इस बार बिहार की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी। यह आयोजन सिर्फ एक पारंपरिक पर्व का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि सत्ता संतुलन, संभावित राजनीतिक समीकरण और भविष्य की रणनीति का मंच बन गया। पटना में उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर हुए इस आयोजन में सत्ता पक्ष के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद रहे, जबकि सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजप्रताप यादव की मौजूदगी को लेकर होती रही।
- Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में सियासत और सत्ता का अनोखा संगम
- Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में तेजप्रताप यादव को NDA का खुला ऑफर
- Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में विजय सिन्हा का पारंपरिक और सियासी अंदाज
- Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी के मायने
- Bihar Politics Dahi Chura Bhoj से अलग जमुई की तस्वीर, भोज में हंगामा
- Bihar Politics Dahi Chura Bhoj और बिहार की सियासत की दिशा
राजनीतिक गलियारों में दही-चूड़ा भोज को हमेशा से जनसंपर्क और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक माना जाता रहा है, लेकिन इस बार इसने राजनीतिक संदेशों और संभावित गठजोड़ों की नई पटकथा लिख दी।
Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में तेजप्रताप यादव को NDA का खुला ऑफर
कार्यक्रम के दौरान सबसे बड़ा सियासी बयान उस समय सामने आया जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के पुत्र संतोष सुमन ने तेजप्रताप यादव को खुले तौर पर एनडीए में शामिल होने का प्रस्ताव दे दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि तेजप्रताप यादव एनडीए के साथ आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। यह पहली बार नहीं है जब तेजप्रताप यादव को लेकर सियासी अटकलें तेज हुई हों, लेकिन सत्ता पक्ष के मंच से इस तरह का खुला आमंत्रण राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
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Bihar Politics Dahi Chura Bhoj पर रामकृपाल यादव का बयान भी बना चर्चा का विषय

इसी कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रामकृपाल यादव ने भी तेजप्रताप यादव को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि तेजप्रताप यादव ने उन्हें दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया है और वे उनके यहां जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तेजप्रताप एनडीए में आना चाहते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।
रामकृपाल यादव के इस बयान ने राजनीतिक संकेतों को और स्पष्ट कर दिया। इसे केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं की ओर बढ़ता कदम माना जा रहा है।
Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में विजय सिन्हा का पारंपरिक और सियासी अंदाज
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा इस पूरे आयोजन में पूरी तरह पारंपरिक रंग में नजर आए। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से मेहमानों को दही-चूड़ा परोसा। यही नहीं, उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर आपसी एकजुटता का संदेश भी दिया।
इन दृश्यों को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्ता पक्ष के भीतर एकजुटता और तालमेल का यह प्रदर्शन आगामी राजनीतिक रणनीति का संकेत देता है।
Bihar Politics Dahi Chura Bhoj में सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी के मायने
इस दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति ने कार्यक्रम की सियासी अहमियत को और बढ़ा दिया। उनके साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय चौधरी, संतोष सुमन, संजय झा, मंगल पांडे, संजय पासवान, संजय सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी को केवल औपचारिक सहभागिता नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति और संगठनात्मक मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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Bihar Politics Dahi Chura Bhoj से अलग जमुई की तस्वीर, भोज में हंगामा
जहां पटना में दही-चूड़ा भोज सियासी संदेशों का केंद्र बना, वहीं जमुई से एक अलग ही तस्वीर सामने आई। वहां सांसद अरुण भारती के दही-चूड़ा भोज के दौरान भोजन को लेकर विवाद हो गया। सांसद के जाने के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं के बीच खाने को लेकर बहस शुरू हुई, जो जल्द ही झड़प में बदल गई।
कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि राजनीतिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और अनुशासन कितना महत्वपूर्ण होता है।
Bihar Politics Dahi Chura Bhoj और बिहार की सियासत की दिशा
दही-चूड़ा भोज अब केवल परंपरा नहीं रह गया है। यह बिहार की राजनीति में संवाद, संकेत और समीकरण तय करने का मंच बन चुका है। इस आयोजन के जरिए जहां एक ओर सत्ता पक्ष ने एकजुटता दिखाई, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के एक बड़े चेहरे को लेकर संभावनाओं के द्वार खोल दिए गए।
आने वाले दिनों में तेजप्रताप यादव को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज होने की पूरी संभावना है। यह भोज बिहार की राजनीति में आने वाले बदलावों का संकेत माना जा रहा है।
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