बिहार की राजनीति इन दिनों उबाल पर है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है। इस फैसले के खिलाफ अब उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी सामने आने लगी है।
पटना में Janata Dal (United) के दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं ने एक पोस्टर लगाकर मुख्यमंत्री से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। पोस्टर में जनादेश और आत्मसम्मान के हनन की बात लिखी गई है, जिससे साफ है कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
Bihar Politics: JDU ऑफिस के बाहर लगा विरोध का पोस्टर
पटना में जेडीयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। पोस्टर में लिखा गया है:
“नीतीश सेवक कर रहा पुकार, नेता करें अपने निर्णय पर पुनर्विचार। लोकतंत्र में जनता के जनादेश और आत्मसम्मान का हनन, अब नहीं होगा सहन।”
इस पोस्टर के जरिए कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के फैसले से सहमत नहीं हैं और चाहते हैं कि वे अपने निर्णय पर दोबारा विचार करें।
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Nitish Kumar Rajya Sabha Decision: नामांकन के बाद बढ़ा विवाद
गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इसके बाद से ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे पर भरोसा करके वोट दिया था। इसलिए उनका अचानक राज्यसभा जाना जनादेश के साथ न्याय नहीं माना जा रहा है।
JDU Workers Protest: कार्यकर्ताओं में दिखी भावुक प्रतिक्रिया

नीतीश कुमार के फैसले के बाद जेडीयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं की भावुक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। कई कार्यकर्ताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जनता ने वोट नीतीश कुमार को दिया था, न कि किसी अन्य दल को।
उनका कहना था कि यदि मुख्यमंत्री बिहार छोड़कर दिल्ली की राजनीति में जाते हैं, तो इसे जनता के साथ विश्वासघात के रूप में देखा जाएगा।
JDU Workers Protest: कार्यालय में हंगामा और तोड़फोड़
इस विवाद के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद जेडीयू कार्यालय में हंगामा भी हुआ। कुछ कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए तोड़फोड़ की और जोरदार नारेबाजी की।
कई कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक दबाव का परिणाम है।
Bihar Politics: भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने भाजपा पर भी आरोप लगाए। उनका कहना था कि यदि भाजपा बिहार में अकेले चुनाव लड़े तो उसके उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो सकती है।
कार्यकर्ताओं का दावा है कि बिहार की जनता ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर भरोसा किया था। इसलिए उनका राज्यसभा जाना कई समर्थकों के लिए भावनात्मक झटका बन गया है।
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Bihar Politics: फैसले को बताया “काला दिवस”
कुछ कार्यकर्ताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को “काला दिवस” तक करार दिया। उनका कहना था कि यह फैसला पार्टी और राज्य दोनों के लिए निराशाजनक है।
कार्यकर्ताओं का यह भी कहना था कि यदि मुख्यमंत्री राजनीति से संन्यास लेते तो उन्हें ज्यादा सम्मान मिलता, लेकिन राज्यसभा का पद स्वीकार करना उनकी गरिमा के अनुरूप नहीं माना जा रहा।
Bihar Politics: पोस्टर के जरिए दोबारा अपील
शुक्रवार को लगाए गए पोस्टर के जरिए कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर मुख्यमंत्री से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को शांत करने के लिए कोई कदम उठाएगा या फिर बिहार की राजनीति में यह विवाद और गहराएगा।
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