मुजफ्फरपुर,संवाददाता
मुजफ्फरपुर की अदालत में चंद्र किशोर पराशर ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें मंडल रेल प्रबंधक विवेक भूषण सूद, महाप्रबंधक छत्रपाल सिंह, स्टेशन अधीक्षक अखिलेश कुमार, क्षेत्र अधीक्षक रवि शंकर महतो, सहायक अभियंता कमलेश पाठक को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने साजिश के तहत एक योजनाबद्ध तरीके से मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में स्थापित दुर्गा मंदिर सहित दो मंदिरों को तोड़ दिया। इसके अलावा अष्ट धातु की मूर्ति एवं गहने की चोरी कर ली। इस मामले में 2 अप्रैल 2025 को सुनवाई होगी।
दरअसल 10 मार्च की रात्रि रेलवे प्रशासन ने स्टेशन परिसर में स्थित दो मंदिर को स्टेशन परिसर का विस्तार और एलिवेटेड रोड के निर्माण का हवाला देकर तोड़ दिया था। इसके बदले में धर्मशाला में मंदिर का निर्माण कर मूर्ति स्थापित कर दिया था। मंदिर तोड़ने की सूचना पर हिंदूवादी संगठन आग बबूला हो गए।
11 मार्च को आंदोलन के पहले दिन रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव का पुतला दहन किया गया। इसके बाद 17 मार्च से लगातार मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता आंदोलन कर रहे हैं। इसी के तहत रेलवे प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
मंदिर नव निर्माण समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र किशोर पाराशर ने बताया कि जब मैं 11 मार्च को मंदिर दर्शन के लिए स्टेशन गया तो मैं स्तब्ध रह गया। मालूम चला कि मंदिर तोड़ दिया गया है। इस घटना से मैं बीमार हो गया। डॉक्टर के पास जाना पड़ा। इसके बाद 17 मार्च को रेलवे प्रशासन से मिलने की कोशिश की, लेकिन मिलने नहीं दिया गया। तब सभी भक्तों ने मिलकर आंदोलन की शुरुआत की। मंदिर तोड़ने की घटना के विरोध में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस पूरे मामले पर वकील प्रमोद कुमार शुक्ला ने बताया कि मंदिर ध्वस्त करने के आरोप में एक परिवाद दायर किया गया है, जिसमे बीएनएस की धारा 111, 208, 209, 61 एवं आईपीसी की धारा 295, 296, 120 बी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। रेलवे प्रशासन ने बिना किसी सूचना और बिना किसी स्वीकृति के धार्मिक स्थल को ध्वस्त कर दिया था।
मुजफ्फरपुर स्टेशन पर मंदिर तोड़ने के मामले में जीएम समेत 5 अधिकारियों पर मुकदमा 2 अप्रैल को सुनवाई, मंदिर ध्वस्त करने के विरोध ने 11 मार्च से चल रहा आंदोलन
