लेखक-अनुभव सिन्हा
Election Commission and Bengal Politics: भारतीय चुनाव आयोग द्वारा West Bengal में सात अधिकारियों को निलंबित किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इसे राज्य प्रशासन में ‘अनावश्यक हस्तक्षेप’ करार दिया है, जबकि आयोग ने संकेत दिया है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निर्देशों के पालन और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। प्रारंभिक जांच के बाद आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए निलंबन का आदेश जारी किया। हालांकि आयोग ने विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जाएगा।
Election Commission and Bengal Politics: राज्य सरकार को कमजोर करने की साजिश !
राज्य सरकार ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य के अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान राज्य सरकार को कमजोर करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress ने भी आयोग के निर्णय को चुनौती देने के संकेत दिए हैं और कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। विपक्षी दलों ने आयोग की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि राज्य में चुनाव के दौरान निष्पक्षता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और आयोग का यह कदम पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण है। विपक्ष का आरोप है कि प्रशासनिक मशीनरी का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता रहा है, जिसे रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।
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Election Commission and Bengal Politics: ममता बनर्जी पर अराजक होने का आरोप
यह सर्वविदित है कि चुनाव आयोग को संविधान के तहत व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें चुनाव के दौरान अधिकारियों का तबादला या निलंबन भी शामिल है। ऐसे मामलों में आयोग का उद्देश्य आमतौर पर निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित करना होता है। हालांकि, राज्य सरकारें अक्सर इसे अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप के रूप में देखती हैं, जिससे केंद्र–राज्य संबंधों में तनाव की स्थिति बनती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज हो रही है। प्रशासनिक स्तर पर की गई कार्रवाई का सीधा असर राजनीतिक माहौल पर पड़ सकता है। इतना ही नहीं, यह विवाद बढ़ा और न्यायालय तक पहुंचा, जहां ममता को मुंह की खानी पड़ी लेकिन येन-केन-प्रकारेण सत्ता में बने रहने की खासियत को मिल रही चुनौती से ममता अराजक हो जाने की स्थिति तक पहुंच चुकी हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया के बीच कानूनी बहस तेज होने की संभावना है।
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Election Commission and Bengal Politics: सबकी निगाहें आगामी चुनाव पर
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। वहीं राज्य सरकार ने कहा है कि वह संवैधानिक दायरे में रहते हुए अपने अधिकारों की रक्षा करेगी।
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में आयोग की आगे की कार्रवाई, राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी पहलुओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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