बढ़ती उम्र थामने की पहल

By Team Live Bihar 24 Views
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मुकुल व्यास
दुनिया के वैज्ञानिक पिछले कुछ सालों से कोशिका के स्तर पर मानव जीवन काल बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन से कारक आयु-वृद्धि को बढ़ावा देते हैं। वे यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को पलटा जा सकता है। उनकी रिसर्च का मुख्य फोकस टेलोमियर पर है क्योंकि उसके छोटा होने पर बुढ़ापा आता है। आखिर टेलोमियर क्या होते हैं? टेलोमियर दरअसल कोशिका के नाभिक में स्थित गुणसूत्रों (क्रोमोसोम) के सिरों पर एक सुरक्षात्मक संरचना है जो जूते के फीते की नोक की तरह काम करती है। टेलोमियर कोशिकाओं के डीएनए को सुरक्षित रखने और कोशिकाओं की वृद्धि और विभाजन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ टेलोमियर छोटे होते जाते हैं। इसकी वजह से कोशिकाएं स्वस्थ विकास के लिए विभाजित होने की अपनी क्षमता खो देती हैं और कुछ अंततः मरने लगती हैं।
मनुष्यों में कोशिका के स्तर पर टेलोमियर का अध्ययन हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। अब वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बुढ़ापा-रोधी शोध को आगे बढ़ाने के लिए मानव जैसे छोटे टेलोमियर वाले चूहे विकसित किए हैं। मानव जैसे छोटे टेलोमियर मानव शरीर और अंगों में आयु वृद्धि के अध्ययन को आसान बनाते हैं। आम तौर पर चूहों में टेलोमियर मनुष्यों की तुलना में 10 गुना लंबे होते हैं। इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता जिएयू जू ने कहा कि यह वास्तव में मानवकृत टेलोमियर वाला पहला माउस मॉडल है क्योंकि इस मॉडल में टेलोमियर वयस्क ऊतकों में व्यक्त नहीं होता है। जू ने कहा कि अब हमारा लक्ष्य यह देखना है कि चूहों में उम्र कैसे बढ़ती है। आनुवंशिक रूप से संशोधित चूहे जू की टीम को कई शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्षम बना रहे हैं। रिसर्च के मुख्य क्षेत्रों में यह अध्ययन करना शामिल है कि कैसे छोटे टेलोमियर कैंसर के विकास की संभावना को कम करते हैं और मानव जीवनकाल को प्रभावित करते हैं। अध्ययन का एक दूसरा लक्ष्य उम्र से संबंधित बीमारियों से मुक्त जीवन की अवधि को बढ़ाने के लिए रणनीतियों की खोज करना भी है। भविष्य की दवाओं और उपचारों के विकास के लिए इस शोध के महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। दीर्घावधि में यह बुढ़ापा रोधी रणनीतियों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है जिनका उद्देश्य टेलोमियर की रक्षा करने के लिए कोशिकाओं को सक्रिय करना और जीवन काल को बढ़ाना है।
कई बीमारियां कोशिका के स्तर पर उत्पन्न होती हैं, इसलिए दवाओं को लक्षित करना एक सामान्य रणनीति है। शोधकर्ता यह अध्ययन भी कर रहे हैं कि नींद मानव स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती है। संशोधित चूहों का उपयोग यह देखने के लिए किया जाएगा कि नींद की कमी और जीवन के अन्य तनावों का टेलोमियर विनियमन और उम्र वृद्धि पर क्या प्रभाव पड़ता है। इन विशेष चूहों का विकास 10 साल पहले शुरू हुआ था। टेलोमियर उम्र वृद्धि को कैसे नियंत्रित करते हैं, पहले इसका अध्ययन पेट्री दूध में अलग-अलग मानव कोशिकाओं का उपयोग करके किया जाता था। नए माउस मॉडल की खासियत यह है कि इससे पूरे जीव में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का निरीक्षण किया जा सकता है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि आयु-वृद्धि, मानव दीर्घायु और कैंसर पर अध्ययन को आगे बढ़ाने के लिए संशोधित चूहों को अन्य शोध टीमों के साथ साझा किया जाएगा। नया माउस मॉडल दुनिया भर के विज्ञानियों को इन प्रक्रियाओं का पता लगाने के लिए एक मूल्यवान उपकरण प्रदान कर सकता है।
एक दिलचस्प बात यह है कि कुछ जीवों ने अस्थायी रूप से उम्र वृद्धि की प्रक्रिया को उलटने का तरीका खोज लिया है। अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक टीम द्वारा किए गए नए शोध के अनुसार मेडागास्कर का बौना लीमर कोशिका के स्तर पर उम्र बढ़ने की घड़ी को पीछे कर सकता है। उन्होंने पाया कि चूहे जैसा यह प्राइमेट जानवर अपने वार्षिक हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) सीजन के दौरान समय को थाम सकता है। बायोलॉजी लैटर्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार बौने लीमर के पास अपने टेलोमियर को छोटा होने से रोकने और उन्हें लंबा करने का एक तरीका है, जिससे उनकी कोशिकाओं को कुछ समय के लिए प्रभावी रूप से फिर से जीवंत किया जा सकता है। अध्ययन की प्रमुख लेखक मरीना ब्लैंको ने कहा कि यह सब शीतनिद्रा के दौरान होता है। जब जंगल में सर्दी शुरू होती है, तो बौने लीमर पेड़ों के छेदों या भूमिगत बिलों में गायब हो जाते हैं, जहां वे हर साल सात महीने तक निलम्बित अवस्था में रहते हैं।
यह भोजन की कमी के समय में जीवित रहने की एक रणनीति है। मेटाबोलिज्म अथवा चयापचय की धीमी गति की इस अवधि के दौरान उनकी हृदय गति लगभग 200 धड़कन प्रति मिनट से आठ से भी कम हो जाती है। वे हर 10 मिनट या उससे भी कम समय में केवल एक सांस लेते हैं। बौने लीमर ठंडी अवस्था में लगभग एक सप्ताह तक रह सकते हैं। उसके बाद उन्हें थोड़े समय के लिए गर्म होना पड़ता है।
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने शीतनिद्रा से पहले, उसके दौरान और उसके बाद ड्यूक लीमर सेंटर में 15 बौने लीमर का अनुसरण किया। उनके गालों से लिए गए नमूनों का परीक्षण करके यह पता लगाया कि समय के साथ उनके टेलोमियर में कैसे बदलाव हुए। उन्हें शीतनिद्रा में मदद करने के लिए, शोधकर्ताओं ने थर्मोस्टेट को धीरे-धीरे 21 डिग्री सेल्सियस से 10 के मध्य तक कम कर दिया ताकि लीमर के मूल निवास में सर्दियों की स्थिति का अनुकरण किया जा सके। उन्होंने लीमर को कृत्रिम बिल दिए जहां वे सिकुड़ कर ठंड से बच सकें। जो लीमर जाग रहे थे और सक्रिय थे, उनके समूह को भोजन दिया गया । दूसरे समूह के लीमर महीनों तक हाइबरनेशन के सीजन में बिना खाए पिए या हिले-डुले अपनी पूंछ में जमा वसा पर जीवित रहे, जैसा कि वे जंगल में करते थे।
आमतौर पर प्रत्येक कोशिका विभाजन के दौर के साथ टेलोमियर की लंबाई समय के साथ कम होती जाती है। लेकिन आनुवंशिक अनुक्रमण से पता चला कि हाइबरनेशन के दौरान, लीमर के टेलोमियर छोटे नहीं हो रहे थे वे वास्तव में लंबे हो गए थे। दूसरे शब्दों में वे अपनी कोशिकाओं को अधिक युवा अवस्था में वापस ले गए। कुल मिलाकर, टेलोमियर उन लीमरों में लंबे हो गए, जिन्होंने गहरी नींद का अनुभव किया। इसके विपरीत, खाने के लिए ‘जागने’ वाले लीमरों में टेलोमियर की लंबाई अध्ययन के दौरान अपेक्षाकृत स्थिर रही। लीमर में हुए परिवर्तन अस्थायी थे। जानवरों के हाइबरनेशन से बाहर आने के दो सप्ताह बाद, शोधकर्ताओं ने पाया कि उनके टेलोमियर हाइबरनेशन से पहले की लंबाई पर वापस आ गए।

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