Journalism Crisis Warning: पत्रकारिता के अभाव में समाज आदिम युग में चला जाएगा – प्रवीण बागी

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विश्व संवाद केंद्र की कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी
Highlights
  • • प्रवीण बागी ने पत्रकारिता के अभाव को समाज के लिए खतरनाक बताया • पत्रकारिता को संघर्ष से मिली प्रतिष्ठा करार दिया • गणेश शंकर विद्यार्थी के उदाहरण से नैतिक पत्रकारिता पर जोर • प्रतिभागियों को पेशे की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने की सलाह • कार्यशाला में तैयार पत्रिका ‘सबरंग’ का विमोचन

Journalism Crisis Warning: विश्व संवाद केंद्र की पत्रकारिता कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार का बड़ा बयान

पत्रकारिता अगर समाज से गायब हो जाए, तो आधुनिक समाज भी धीरे-धीरे आदिम युग जैसी स्थिति में पहुंच जाएगा। न लोगों के बीच संवाद रहेगा, न सरकार तक आमजन की आवाज पहुंचेगी और न ही देश-दुनिया की अच्छी-बुरी घटनाओं की जानकारी मिल पाएगी। यह तीखा और विचारोत्तेजक बयान वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने शनिवार को पटना में दिया।

वे विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित 12 दिवसीय पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। अपने वक्तव्य में उन्होंने पत्रकारिता के सामाजिक महत्व, उसकी जिम्मेदारियों और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

Journalism Crisis Warning: पत्रकारिता सरकार की कृपा नहीं, संघर्ष से मिली पहचान

प्रवीण बागी ने कहा कि आज पत्रकारिता समाज में जिस सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ खड़ी है, वह किसी सरकार, सत्ता या संगठन की कृपा से नहीं मिली है। यह पहचान पत्रकारों के लंबे संघर्ष, निष्ठा और समर्पण का परिणाम है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकारिता की साख उन पत्रकारों ने बनाई है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सच्चाई के साथ खड़े रहने का साहस दिखाया। उन्होंने पत्रकारिता को समाज की चेतना बताया और कहा कि मीडिया के बिना लोकतंत्र अधूरा है।

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Journalism Crisis Warning: गणेश शंकर विद्यार्थी के उदाहरण से नैतिक पत्रकारिता पर जोर

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अपने संबोधन में प्रवीण बागी ने गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा संपादित पत्रिका ‘प्रताप’ का उदाहरण देते हुए पत्रकारिता की नैतिकता और प्रतिबद्धता पर बात की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जैसे पत्रकारों ने पत्रकारिता को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व के रूप में जिया।

उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे पत्रकारिता में मूल्यों और नैतिकता को सर्वोपरि रखें, क्योंकि यही पत्रकारिता को समाज में विश्वसनीय बनाती है।

Journalism Crisis Warning: पत्रकारिता एक चुनौतीपूर्ण पेशा – मानसिक तैयारी जरूरी

Journalism Crisis Warning: पत्रकारिता के अभाव में समाज आदिम युग में चला जाएगा – प्रवीण बागी 2

कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रवीण बागी ने साफ कहा कि पत्रकारिता एक चुनौतीपूर्ण पेशा है और इसमें आने से पहले गहराई से सोच-विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस पेशे में नौकरी कभी भी जा सकती है, मीडिया हाउस बंद हो सकते हैं और अस्थिरता हमेशा बनी रहती है। इसलिए पत्रकार बनने से पहले मानसिक रूप से इन परिस्थितियों के लिए तैयार रहना जरूरी है।

उनका कहना था कि जो लोग केवल सुविधा या स्थायित्व की तलाश में पत्रकारिता में आते हैं, उन्हें निराशा हाथ लग सकती है, जबकि जो लोग इसे मिशन के रूप में अपनाते हैं, वही लंबे समय तक टिक पाते हैं।

Journalism Crisis Warning: राष्ट्र का सही इतिहास पहुंचाने का माध्यम बने पत्रकारिता

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पटना चिकित्सा महाविद्यालय के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने पत्रकारिता की भूमिका पर अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उपयोग राष्ट्र के सही इतिहास को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने में होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पीत पत्रकारिता से दूरी बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि पत्रकारिता समाज को दिशा देने का कार्य करती है, इसलिए इसमें जिम्मेदारी और संयम अत्यंत आवश्यक है।

Journalism Crisis Warning: 2004 से जारी कार्यशाला की उपलब्धियां गिनाईं

विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजीव कुमार ने इस अवसर पर कार्यशाला की पृष्ठभूमि और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशाला वर्ष 2004 से लगातार आयोजित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला से निकले अनेक प्रतिभागी आज देश के बड़े मीडिया हाउसों में सफलतापूर्वक उच्च पदों पर कार्य कर रहे हैं। यह कार्यशाला पत्रकारिता के व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष जोर देती है।

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Journalism Crisis Warning: प्रतिभागियों की पत्रिका ‘सबरंग’ का विमोचन

समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई पत्रिका ‘सबरंग’ का विधिवत विमोचन किया गया। यह पत्रिका 12 दिनों की प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों द्वारा सीखी गई पत्रकारिता की व्यावहारिक समझ का परिणाम रही।

प्रतिभागियों ने मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जहां पत्रकारिता की पढ़ाई दो या तीन वर्षों में होती है, वहीं इस कार्यशाला में 12 दिनों का कैप्सूल कोर्स कराया गया।

उन्होंने बताया कि बिहार के अनुभवी पत्रकारों द्वारा विशेष रूप से पत्रकारिता के व्यावहारिक आयामों पर अधिक जोर दिया गया, जिससे उन्हें वास्तविक मीडिया दुनिया को समझने का अवसर मिला।

Journalism Crisis Warning: समापन समारोह में कई वरिष्ठ लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर दक्षिण बिहार के सह प्रांत प्रचार प्रमुख निखिल रंजन, मीडिया शिक्षक प्रशांत रंजन, पत्रकार रविकांत, डॉ. दिवाकर कश्यप समेत बड़ी संख्या में पत्रकारिता जगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे। समारोह का माहौल गंभीर विमर्श और प्रेरणादायक संवाद से भरा रहा।

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