मकर संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भारत की विविधता और एकता का प्रतीक है। जैसे ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की यात्रा शुरू होती है, देश के कोने-कोने में उत्सव, पूजन-दान, सामाजिक परंपराएं और खुशियों की लहर देखने को मिलती है। यह त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का भी जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है।
- Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
- Makar Sankranti 2026: धार्मिक मान्यताएं और प्राचीन कथाएं
- Makar Sankranti 2026: गंगा स्नान और दान का महत्त्व
- Makar Sankranti 2026: तिल-गुड़: स्वास्थ्य, संस्कृति और उत्सव का प्रतीक
- Makar Sankranti 2026: पतंगोत्सव: आकाश में रंगों का जश्न
- Makar Sankranti 2026: विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति के रूप
- Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
भारत में मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है — कहीं यह लोहड़ी, कहीं पोंगल, कहीं बिहू और कहीं उत्तरायण के रूप में जाना जाता है। नाम, भाषा, पहनावा और रीति-रिवाज़ भले ही बदलें, लेकिन सूर्य के उत्तरायण प्रवेश के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के साथ सामंजस्य और खुशी साझा करने की भावना सभी में समान रूप से विद्यमान है।
मकर संक्रांति का महत्व सिर्फ धार्मिक या त्योहार तक सीमित नहीं है; यह सूर्य की दिशा परिवर्तन को जीवन में प्रकाश की ओर उन्मुख होने, अंधकार से उजाले की ओर सबको अग्रसर करने वाला प्रतीक मानता है। इसे केवल एक तिथि के रूप में नहीं बल्कि मानव चेतना में संक्रमण और प्रसाद की अनुभूति के रूप में देखा जाता है।
Makar Sankranti 2026: धार्मिक मान्यताएं और प्राचीन कथाएं
पद्म पुराण में वर्णित है कि सूर्य देव सत्त्वमय, शांत और रोगहर हैं, और उनकी स्तुति में कहा गया मंत्र —
“नमोसूर्याय शान्ताय सर्वरोग निवारिणे…” —
केवल पूजन नहीं, बल्कि जीवन के संतुलन का आह्वान है।
धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की यात्रा आरंभ करते हैं। यह यात्रा केवल आकाश की दिशा में परिवर्तन नहीं, बल्कि जीवन में अंधकार से उजाले की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
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Makar Sankranti 2026: गंगा स्नान और दान का महत्त्व

मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान को अत्यंत पवित्र माना जाता है। हरिद्वार, प्रयागराज, कानपुर, बंगाल में गंगा सागर समेत सभी घाटों पर श्रद्धालु सुबह-सुबह ही गंगा में डुबकी लगाते हैं। यह पापों की क्षति मानकर किया जाने वाला स्नान जीवन में नई शुरुआत और पुनर्जागरण का प्रतीक है।
ईश्वर को अर्घ्य देने के बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व है। शास्त्रों में वर्णित है कि माघ मास में दान करना सौ गुणा फल देता है। यह पर्व इसलिए केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा के दान-भावना और सामुदायिक समरसता का सजीव रूप है।
Makar Sankranti 2026: तिल-गुड़: स्वास्थ्य, संस्कृति और उत्सव का प्रतीक
भारतीय परंपरा में तिल केवल एक खाद्य वस्तु नहीं, बल्कि पुण्य, स्वास्थ्य और संस्कार का प्रतीक माना गया है।
आयुर्वेद के अनुसार:
• तिल स्निग्ध, बलवर्धक और वातशामक
• गुड़ शरीर को ऊष्मा और ऊर्जा प्रदान करता है
इसलिए तिल-गुड़ का सेवन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। बच्चों और बुजुर्गों को तिल-गुड़ खिलाना पारिवारिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें सामाजिकता और मिठास का संदेश छिपा होता है।
Makar Sankranti 2026: पतंगोत्सव: आकाश में रंगों का जश्न
मकर संक्रांति और पतंगोत्सव का रिश्ता एक-दूसरे के पूरक की तरह है। जैसे ही पर्व आता है, भारत का आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से सजा दिखाई देता है। यह केवल बच्चों या युवा वर्ग का खेल नहीं; यह उत्सव, स्वतंत्रता और सामूहिक आनंद का प्रतीक है।
इतिहासकारों का मानना है कि पतंगों का भारत में प्रवेश चीनी यात्रियों — फा हियान और ह्यून त्सांग — के माध्यम से हुआ, और समय के साथ यह भारतीय लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गया।
Makar Sankranti 2026: विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति के रूप
भारत की विविधता को दर्शाते हुए यह पर्व अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है:
• हरियाणा और पंजाब: लोहड़ी के रूप में अग्नि प्रज्वलन, ढोल-दमाऊं और लोकगीत।
• तमिलनाडु: चार दिनों तक पोंगल — भोगी, सूर्य, मट्टू और कन्या पोंगल।
• बंगाल: गंगा सागर स्नान के साथ तिल दान पर जोर।
• असम: भोगाली बिहू के रूप में सामूहिक उत्सव।
• महाराष्ट्र: गृहस्थ जीवन में मधुरता और सौहार्द का प्रतीक।
• राजस्थान: सुहागनें सास को वायना देकर आशीर्वाद लेती हैं।
इन विविध रूपों में मकर संक्रांति भारतीय सभ्यता की एकता और साझा चेतना की तस्वीर प्रस्तुत करती है।
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Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश
मकर संक्रांति जीवन में परिवर्तन को स्वीकार करने, प्राकृतिक क्रम का सम्मान करने और दान-उत्तरदायित्व को निभाने का संदेश देती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि परिवर्तन केवल स्वीकृति का विषय नहीं, बल्कि इसे जश्न की तरह मनाना भारतीय संस्कृति की विशिष्टता है।
उत्तरायण के रूप में सूर्य का ऊर्ध्वगमन हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है — एक ऐसी चेतना जो सदियों से भारतीय मानस में गहराई से रची-बसी है।
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