Makar Sankranti Bihar Politics: दही–चूड़ा भोज में दिखी सत्ता और समाज की एकजुटता,डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के यहाँ पहुंचे नितीश कुमार और कई दिग्गज

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मकर संक्रांति पर दही–चूड़ा भोज में शामिल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
Highlights
  • • विजय सिन्हा के आवास पर दही–चूड़ा भोज • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी • मकर संक्रांति का राजनीतिक महत्व • जनसंवाद का प्रभावी मंच बना भोज • परंपरा और राजनीति का अनोखा संगम

बिहार में मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और राजनीतिक संवाद का भी अहम अवसर बन चुका है। हर साल इस पर्व पर आयोजित होने वाले दही–चूड़ा भोज अब राजनीति का ऐसा मंच बन गए हैं, जहां सत्ता, संगठन और समाज एक साथ नजर आते हैं। वर्ष 2026 में भी मकर संक्रांति के अवसर पर यही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर आयोजित दही–चूड़ा भोज में शामिल हुए। यह आयोजन न केवल परंपरा का निर्वाह था, बल्कि बिहार की राजनीतिक संस्कृति की एक झलक भी पेश करता है।

Makar Sankranti Bihar Politics: विजय सिन्हा के आवास पर जुटे सत्ता के बड़े चेहरे

मंगलवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर पारंपरिक दही–चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं शामिल हुए। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत राज्य सरकार के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसने आयोजन को वैचारिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस भोज को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे राजनीतिक दृष्टि से भी खास बना दिया। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि मकर संक्रांति जैसे पर्व बिहार की राजनीति में भी एक मजबूत सामाजिक सेतु का काम करते हैं।

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Makar Sankranti Bihar Politics: दही–चूड़ा भोज और जनसंवाद की परंपरा

Makar Sankranti Bihar Politics: दही–चूड़ा भोज में दिखी सत्ता और समाज की एकजुटता,डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के यहाँ पहुंचे नितीश कुमार और कई दिग्गज 1

बिहार की राजनीति में दही–चूड़ा भोज की परंपरा कोई नई नहीं है। वर्षों से जनप्रतिनिधि इस पर्व पर ऐसे आयोजन कर आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करते रहे हैं। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा इस परंपरा को लगातार निभाते आ रहे हैं। हर वर्ष मकर संक्रांति पर वे दही–चूड़ा भोज का आयोजन करते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में आम लोग, कार्यकर्ता और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

इस वर्ष भी उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को अपने विधानसभा क्षेत्र लखीसराय में भव्य दही–चूड़ा भोज का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भाग लिया। विजय सिन्हा का मानना है कि ऐसे आयोजनों से लोकपरंपराएं जीवंत रहती हैं और जनता व जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद मजबूत होता है। यह राजनीति का वह रूप है, जो मंचों और भाषणों से हटकर सीधे जनसरोकार से जुड़ता है।

Makar Sankranti Bihar Politics: सामाजिक एकजुटता का पर्व

बिहार में मकर संक्रांति को सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान के पर्व के रूप में देखा जाता है। इस दिन दही–चूड़ा, तिलकुट और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का सेवन पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। दही–चूड़ा बिहार की भोज्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो सादगी, समानता और सामूहिकता के भाव को दर्शाता है।

गांव से लेकर शहर तक, हर वर्ग के लोग इस पर्व को समान उत्साह से मनाते हैं। अमीर–गरीब, नेता–नागरिक सभी एक ही थाली में दही–चूड़ा ग्रहण करते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक स्तर पर भी यह पर्व एक समान मंच प्रदान करता है, जहां औपचारिकता से अधिक अपनापन नजर आता है।

Makar Sankranti Bihar Politics: राजनीति और परंपरा का अनोखा संगम

मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित दही–चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक बन चुके हैं। इन आयोजनों में जहां एक ओर धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान होता है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक संवाद भी सहज रूप में आगे बढ़ता है।

ऐसे भोजों में जनता बिना किसी औपचारिक बाधा के अपने प्रतिनिधियों से मिलती है, अपनी बात कहती है और समस्याएं साझा करती है। जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह अवसर जनता की नब्ज टटोलने और सीधे संवाद का माध्यम बनता है। यही कारण है कि दही–चूड़ा भोज को केवल पर्व का हिस्सा नहीं, बल्कि सामाजिक–राजनीतिक प्रक्रिया का अहम अंग माना जाने लगा है।

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Makar Sankranti Bihar Politics: 2026 में तिथि और परंपरा का महत्व

वर्ष 2026 में बिहार में मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी को मनाई जा रही है। यह वह समय है जब सूर्य खगोलीय रूप से धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे संक्रांति कहा जाता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार पुण्यकाल 15 जनवरी तक माना जाता है, जबकि पंचांग और ज्योतिष के अनुसार मुख्य संक्रांति का दिन 14 जनवरी है।

हालांकि बिहार के अधिकांश जिलों में इस वर्ष मकर संक्रांति का मुख्य आयोजन 15 जनवरी को हुआ। इसी कारण दही–चूड़ा भोज और सामाजिक कार्यक्रम भी दोनों दिनों में आयोजित किए गए। राजनीति में भी यह पर्व दो दिनों तक चर्चा का केंद्र बना रहा।

Makar Sankranti Bihar Politics

मकर संक्रांति बिहार में आस्था, परंपरा और राजनीति—तीनों का साझा उत्सव बन चुकी है। दही–चूड़ा भोज जैसे आयोजन यह साबित करते हैं कि राजनीति केवल चुनाव और भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज की सांस्कृतिक जड़ों से भी गहराई से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा जैसे नेताओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि लोकपरंपराएं और जनसंवाद बिहार की राजनीति की मजबूत नींव हैं। आने वाले समय में भी मकर संक्रांति का यह सामाजिक–राजनीतिक महत्व और गहराता दिख सकता है।

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