NEET Student Death Case Patna: परिजनों का बड़ा आरोप, आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप

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पटना में नीट छात्रा की मौत के बाद परिजनों का विरोध
Highlights
  • • परिजनों का हॉस्टल, हॉस्पिटल और पुलिस पर गंभीर आरोप • SIT जांच पर अविश्वास, न्यायिक जांच की मांग • आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप • बिहार में छात्राओं की सुरक्षा पर नई बहस

पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की रहस्यमयी मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला अब सिर्फ एक संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस व्यवस्था, हॉस्टल प्रबंधन और स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर सीधा सवाल बन चुका है। छात्रा के परिजनों ने हॉस्टल संचालक, हॉस्पिटल और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पूरे मामले में “सबकी मिलीभगत” है। पीड़ित छात्रा के पिता ने दोषियों पर जल्द कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे पटना में आत्मदाह करेंगे।

यह बयान केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस गहरे असंतोष और अविश्वास को दिखाता है जो परिजनों के मन में सिस्टम के प्रति पैदा हो चुका है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद परिजनों का गुस्सा और तेज़ हो गया है। उनका साफ कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो इसमें कई “बड़े लोग” फंसेंगे।

NEET Student Death Case Patna: SIT पर भी उठे सवाल

छात्रा के परिजनों ने SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) की जांच पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जांच को सही दिशा में ले जाने के बजाय मामले को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। परिजनों का कहना है कि बार-बार उन्हें ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि असली दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

छात्रा के पिता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें SIT पर भरोसा नहीं है और अब वे इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी। यह मांग अपने आप में दिखाती है कि मामला अब सिर्फ पुलिस जांच का नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।

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NEET Student Death Case Patna और CCTV फुटेज पर संदेह

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पटना छात्रा मौत मामले में पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज

परिजनों ने घटना के बाद पटना में CCTV फुटेज गायब होने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही सख्ती से जांच होती और सबूत सुरक्षित किए जाते, तो सच्चाई बहुत पहले सामने आ जाती।

CCTV फुटेज किसी भी आपराधिक या संदिग्ध घटना में सबसे अहम तकनीकी सबूत माने जाते हैं। ऐसे में फुटेज का गायब होना या उपलब्ध न होना सीधे तौर पर जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। परिजनों का आरोप है कि जानबूझकर सबूत कमजोर किए गए, ताकि दोषियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।

NEET Student Death Case Patna: पुलिस कार्रवाई और निलंबन

मामले में लापरवाही बरतने के आरोपों के बीच प्रशासन ने शुरुआती स्तर पर कार्रवाई करते हुए चित्रगुप्तनगर थाना की प्रभारी रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के दारोगा हेमंत झा को सस्पेंड कर दिया है। दोनों पर आरोप है कि समय पर सूचना मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और मामले की गंभीरता को शुरुआत में ही नजरअंदाज किया गया।

हालांकि यह निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ दिखावटी कदम हैं। असली सवाल यह है कि पूरे घटनाक्रम में जिम्मेदारी तय होगी या नहीं, और क्या बड़े स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

NEET Student Death Case Patna: बिहार में छात्राओं की सुरक्षा पर बहस

यह मामला सामने आने के बाद पटना समेत पूरे बिहार में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस शुरू हो गई है। खासकर कोचिंग हब के रूप में पहचाने जाने वाले इलाकों में चल रहे गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा, निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर राजधानी जैसे शहर में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो बाकी जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। गर्ल्स हॉस्टलों की नियमित जांच, सुरक्षा मानकों का पालन और प्रशासनिक निगरानी अब एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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एक मौत नहीं, सिस्टम की परीक्षा

नीट छात्रा की मौत का मामला अब एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रहा, बल्कि यह पूरे सिस्टम की परीक्षा बन गया है। परिजनों की आत्मदाह की चेतावनी यह दिखाती है कि न्याय प्रक्रिया पर उनका भरोसा किस हद तक टूट चुका है। यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर संकेत है।

यह मामला प्रशासन, पुलिस, हॉस्टल प्रबंधन और स्वास्थ्य तंत्र – सभी के लिए एक चेतावनी है कि लापरवाही अब केवल एक चूक नहीं, बल्कि एक अपराध बन चुकी है। अगर समय रहते निष्पक्ष, पारदर्शी और सख़्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटना बिहार ही नहीं, पूरे देश में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा अविश्वास पैदा कर सकती है।

अब सवाल सिर्फ दोषियों की गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही तय करने का है। यही इस पूरे मामले की असली परीक्षा है।

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