Patna NEET Student Death Case: कोर्ट में हंगामा, “POCSO क्यों नहीं?” CBI पर बरसी सख्ती

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पटना कोर्ट में नीट छात्रा मौत मामले की सुनवाई
Highlights
  • • ढाई घंटे चली लंबी सुनवाई • POCSO एक्ट न लगाने पर कोर्ट की फटकार • आरोपी को फिलहाल राहत नहीं • SIT से CBI तक जांच का सफर • 2 मार्च को अगली सुनवाई अहम

पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत मामले ने शनिवार को अदालत में नया मोड़ ले लिया। करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। न्यायालय ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतने संवेदनशील मामले में अब तक पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया।

मुख्य आरोपी मनीष रंजन को एक बार फिर अदालत से राहत नहीं मिली। लंबी बहस के बाद सुनवाई 2 मार्च तक के लिए टाल दी गई। कोर्ट में मौजूद जांच एजेंसी की पूरी टीम से न्यायाधीश ने तीखे सवाल पूछे, जिनका संतोषजनक उत्तर तत्काल नहीं मिल पाया। अब सबकी निगाहें अगली तारीख पर टिक गई हैं।

Patna NEET Student Death Case: POCSO Act पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि इस मामले में अब तक पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं जोड़ा गया। न्यायालय ने कहा कि फिलहाल एजेंसी के पास केवल ‘अटेम्प्ट टू मर्डर’ यानी धारा 307 का मामला है, जो घटना की गंभीरता के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।

कोर्ट ने जांच एजेंसी से यह भी पूछा कि पिछले 15 दिनों में मुख्य आरोपी के खिलाफ कौन से ठोस तथ्य सामने आए हैं। न्यायाधीश ने तीखे लहजे में कहा, “जब आपके केस में पॉक्सो एक्ट ही नहीं है, तो आरोपी अब तक जेल में क्यों है?”

यह टिप्पणी अदालत की असंतुष्टि को दर्शाती है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि किसी भी व्यक्ति को बिना पर्याप्त आधार के जेल में रखना उचित नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है, तो एजेंसी को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।

इस मामले की जांच फिलहाल Central Bureau of Investigation के पास है, जिसने 12 फरवरी को केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। इससे पहले जांच विशेष जांच टीम के पास थी।

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Patna NEET Student Death Case: SIT से CBI तक जांच का सफर

Patna NEET Student Death Case: कोर्ट में हंगामा, “POCSO क्यों नहीं?” CBI पर बरसी सख्ती 1

मामले की शुरुआती जांच स्थानीय स्तर पर की जा रही थी। 17 जनवरी तक एक पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में जांच चल रही थी, जिसके बाद इसे विशेष जांच टीम को सौंप दिया गया। बाद में राज्य सरकार की अनुशंसा पर केस केंद्रीय एजेंसी को हस्तांतरित किया गया।

सुनवाई के दौरान एसआईटी के प्रतिनिधियों ने अदालत को बताया कि मुख्य आरोपी एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसी आधार पर पहले उनकी गिरफ्तारी की गई थी। हालांकि, एसआईटी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब चूंकि मामला केंद्रीय एजेंसी के पास है, इसलिए उन्हें आरोपी की कस्टडी की आवश्यकता नहीं है।

इस बयान के बाद अदालत में जमानत को लेकर बहस और तेज हो गई। न्यायालय ने यह जानने की कोशिश की कि यदि कस्टडी की आवश्यकता नहीं है और पॉक्सो एक्ट भी नहीं लगाया गया है, तो हिरासत का आधार क्या है।

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Patna NEET Student Death Case: भावनात्मक अपील और अगली सुनवाई की अहमियत

सुनवाई के दौरान मृत छात्रा की मां कोर्ट रूम में मौजूद थीं। उन्होंने भावुक होकर न्याय की गुहार लगाई। अदालत का माहौल उस समय बेहद गंभीर हो गया, जब पीड़ित पक्ष की ओर से त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

अब 2 मार्च को अगली सुनवाई होगी, जहां जांच एजेंसी को कोर्ट के सवालों का लिखित जवाब देना होगा। यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अदालत यह तय कर सकती है कि आगे जांच किस दिशा में बढ़ेगी और आरोपी की स्थिति क्या होगी।

कानूनी और सामाजिक प्रभाव

यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की जवाबदेही का प्रश्न भी बन गया है। अदालत द्वारा उठाए गए सवाल यह दर्शाते हैं कि न्यायपालिका संवेदनशील मामलों में सतर्क भूमिका निभा रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगली सुनवाई में ठोस प्रगति सामने नहीं आती, तो अदालत कड़े निर्देश दे सकती है। दूसरी ओर, यदि जांच एजेंसी ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करती है, तो मामला नए चरण में प्रवेश करेगा।

फिलहाल, आरोपी की जमानत, पॉक्सो एक्ट की धाराओं का सवाल और जांच की दिशा—ये तीनों मुद्दे केंद्र में हैं। पूरे राज्य की नजर इस केस पर है, और 2 मार्च की तारीख निर्णायक साबित हो सकती है।

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