बिहार की सियासत में विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही बड़ा संवैधानिक टकराव खड़ा हो गया है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये का हस्तांतरण कर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जो आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिससे बिहार चुनाव की संवैधानिक वैधता पर बहस तेज हो गई है।
- Prashant Kishor Supreme Court Petition: 10,000 रुपये DBT को बताया चुनावी रिश्वत
- Prashant Kishor Supreme Court Petition: 25–35 लाख महिला वोटर्स को भुगतान का दावा
- Prashant Kishor Supreme Court Petition: पोलिंग बूथ पर जीविका समूह तैनाती पर सवाल
- Prashant Kishor Supreme Court Petition: सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज करेगी सुनवाई
- Prashant Kishor Supreme Court Petition: दोबारा चुनाव कराने की मांग
- Prashant Kishor Supreme Court Petition: ‘फ्री स्कीम’ पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला
Prashant Kishor Supreme Court Petition: 10,000 रुपये DBT को बताया चुनावी रिश्वत
जन सुराज पार्टी ने अपनी रिट याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के बावजूद राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़कर सीधे बैंक खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए।
पार्टी का आरोप है कि:
• यह कदम मतदाताओं को प्रभावित करने की नीयत से उठाया गया।
• सरकारी खजाने का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया।
• चुनावी निष्पक्षता को नुकसान पहुंचा।
याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 21 (जीवन व स्वतंत्रता), 112, 202 (वित्तीय प्रक्रिया) और 324 (चुनाव आयोग की शक्तियाँ) का उल्लंघन बताया गया है।
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Prashant Kishor Supreme Court Petition: 25–35 लाख महिला वोटर्स को भुगतान का दावा
जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव अवधि के दौरान लगभग 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को 10,000 रुपये का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) किया गया।

पार्टी का कहना है कि यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत “भ्रष्ट आचरण” की श्रेणी में आता है, क्योंकि:
• भुगतान चुनाव के ठीक पहले हुआ।
• लाभार्थियों का नया पंजीकरण हुआ।
• भुगतान का संभावित उद्देश्य वोट प्रभावित करना था।
यह आरोप यदि न्यायिक जांच में सही पाया जाता है, तो चुनाव परिणामों की वैधता पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।
Prashant Kishor Supreme Court Petition: पोलिंग बूथ पर जीविका समूह तैनाती पर सवाल
याचिका में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। जन सुराज पार्टी के अनुसार:
• दो चरणों में हुई वोटिंग के दौरान
• जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी करीब 1.8 लाख महिलाओं को
• पोलिंग बूथों पर तैनात किया गया
पार्टी ने इसे प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि:
• इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई।
• सत्ता पक्ष को अप्रत्यक्ष लाभ मिला।
• मतदाताओं पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता था।
यह मुद्दा चुनावी प्रबंधन की तटस्थता पर भी सवाल खड़ा करता है।
Prashant Kishor Supreme Court Petition: सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज करेगी सुनवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम Court ने त्वरित संज्ञान लिया है।
इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुई पीठ:
• मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत
• न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची
शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में अदालत प्रारंभिक तौर पर यह तय करेगी कि:
• क्या चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई?
• क्या DBT भुगतान आचार संहिता उल्लंघन है?
• क्या चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल बनता है?
इस सुनवाई के नतीजे बिहार की राजनीति की दिशा बदल सकते हैं।
Prashant Kishor Supreme Court Petition: दोबारा चुनाव कराने की मांग
जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से बड़ा हस्तक्षेप मांगते हुए कहा है कि:
• मौजूदा चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता।
• चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
• इसलिए बिहार में दोबारा विधानसभा चुनाव कराया जाए।
यदि अदालत इस मांग पर विचार करती है, तो यह भारतीय चुनावी इतिहास के बड़े मामलों में शामिल हो सकता है।
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Prashant Kishor Supreme Court Petition: ‘फ्री स्कीम’ पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला
याचिका में एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु (2013) मामले का हवाला दिया गया है।
उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि:
• चुनाव से पहले मुफ्त योजनाएँ गंभीर चुनावी बहस का विषय हैं।
• चुनाव आयोग को दिशा-निर्देश बनाने चाहिए।
जन सुराज पार्टी ने अदालत से मांग की है कि:
• DBT और मुफ्त योजनाओं पर स्पष्ट गाइडलाइन बने।
• चुनाव अवधि में वित्तीय लाभ वितरण सीमित हो।
Prashant Kishor Supreme Court Petition: ‘कूलिंग पीरियड’ तय करने की मांग
याचिका में एक नीतिगत सुझाव भी दिया गया है। पार्टी चाहती है कि:
• चुनाव से पहले कम से कम 6 महीने का कूलिंग पीरियड तय हो।
• इस अवधि में नई लोक-लुभावन योजनाएँ लागू न हों।
• बड़े वित्तीय हस्तांतरण रोके जाएँ।
पार्टी का तर्क है कि इससे लोकतंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुरक्षित रहेगी।
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