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बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के बीच इस बार दागियों को उम्मीदवार नहीं बनाने की परंपरा कायम होती दिख रही है लेकिन इस दौरान टिकट बंटवारे में उनके परिवार को टिकट देने के मामले सामने आ रहे हैं. दरअसल, बिहार में जदयू ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वो इस बार पार्टी के किसी भी दागी उम्मीदवार को टिकट नहीं देने जा रही है, यही कारण है कि दो कद्दावर नेता ददन पहलवानसमेत गोपालगंज के बाहुबली विधायक अमरेंद्र पांडे का भी टिकट काट दिया गया है.

बक्सर जिले के डुमरांव में जहां पार्टी ने अंजुम आरा को प्रत्याशी बनाया है तो वहीं गोपालगंज में अमरेंद्र पांडे के परिवार के किसी सदस्य को टिकट देने की बात सामने आ रही है. दूसरी और राजद में भी दागी उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया है लेकिन उनके परिवार के लोगों को टिकट देने में जरूर दरियादिली दिखाई है.

पार्टी ने दो ऐसे चेहरों जो कि रेप जैसे संगीन जुर्म में या तो जेल में बंद है या फिर फरार हैं को टिकट नहीं दिया है लेकिन परिवार से लोगों को टिकट दिया है. ऐसे में पहला मामला राजबल्लभ यादव का है जो कि नवादा से पार्टी के विधायक थे और रेप के आरोप में फिलहाल जेल में बंद हैं. पार्टी ने इस बार के चुनाव में उनकी पत्नी विभा देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है. नवादा जिला में साल 2016 में नाबालिग से हुए रेप के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से निलंबित विधायक राजबल्लभ यादव को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. उसपर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया था.

दूसरी ओर, भोजपुर जिले से संदेश के विधायक अरुण यादव जो कि नाबालिग से रेप के मामले में फरार हैं को भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया है लेकिन उनकी पत्नी किरण देवी को राजद ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. विधायक अरुण कुमार यादव पिछले साल सितंबर से ही फरार हैं. उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट निकाला गया था हालांकि अबतक पुलिस की पकड़ से दूर है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि राजद इस बार अरुण कुमार यादव की पत्नी को वोट दे सकती है.

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