Sushil Kumar Modi Anniversary: नीतीश कुमार ने सुशील मोदी को दी श्रद्धांजलि, याद किया ऐतिहासिक योगदान

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Sushil Kumar Modi Anniversary के अवसर पर पटना में श्रद्धांजलि कार्यक्रम
Highlights
  • • सुशील कुमार मोदी की जयंती पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम • सीएम नीतीश कुमार ने तैलचित्र पर किया माल्यार्पण • छात्र राजनीति और जेपी आंदोलन से शुरुआत • लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री के रूप में भूमिका • BJP-JDU गठबंधन के प्रमुख सूत्रधार के रूप में पहचान

बिहार की राजनीति में 5 जनवरी की तारीख एक बार फिर भावनात्मक बन गई, जब दिवंगत भाजपा नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में सुशील मोदी के राजनीतिक और वैचारिक योगदान को याद किया गया।

सुशील कुमार मोदी को केवल एक पदधारी नेता के रूप में नहीं, बल्कि बिहार की गठबंधन राजनीति को स्थायित्व देने वाले स्तंभ के रूप में याद किया जाता है। उनकी भूमिका ने भाजपा और जदयू के रिश्तों को दशकों तक दिशा दी।

Sushil Kumar Modi Anniversary: श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम

सुशील कुमार मोदी की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, मंत्री मंगल पांडे, मंत्री विजय चौधरी, जदयू नेता छोटू सिंह सहित भाजपा और जदयू के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

इस दौरान वक्ताओं ने सुशील मोदी के राजनीतिक जीवन, उनकी सादगी और संगठनात्मक क्षमता को याद किया। मंच से यह बात बार-बार उभरकर सामने आई कि बिहार में एनडीए की राजनीति को जमीन पर मजबूती देने में उनकी भूमिका निर्णायक रही।

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Sushil Kumar Modi Anniversary: छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

Sushil Kumar Modi Anniversary: नीतीश कुमार ने सुशील मोदी को दी श्रद्धांजलि, याद किया ऐतिहासिक योगदान 1

सुशील कुमार मोदी का जन्म 5 जनवरी 1952 को हुआ था। उन्होंने राजनीति की शुरुआत एक छात्र नेता के रूप में की। पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वे छात्र आंदोलनों से जुड़े और धीरे-धीरे एक प्रभावशाली छात्र नेता के रूप में उभरे।

1971 में वे पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ की पांच सदस्यीय कैबिनेट के सदस्य बने। 1973 में वे महामंत्री चुने गए। उस समय लालू प्रसाद यादव अध्यक्ष और रविशंकर प्रसाद संयुक्त सचिव थे। यही वह दौर था जब जेपी आंदोलन की लहर ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।

Sushil Kumar Modi Anniversary: जेपी आंदोलन और आपातकाल का संघर्ष

जेपी आंदोलन के प्रभाव में आकर सुशील कुमार मोदी ने पढ़ाई छोड़ दी और लोकतंत्र की लड़ाई में कूद पड़े। आपातकाल के दौरान उन्हें 19 महीने जेल में रहना पड़ा। यह दौर उनके राजनीतिक जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

1977 से 1986 तक उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। संगठन में काम करते हुए उन्होंने अनुशासन, विचारधारा और रणनीति का गहरा अनुभव हासिल किया।

Sushil Kumar Modi Anniversary: विधानसभा से लोकसभा तक का सफर

1990 में सुशील कुमार मोदी ने पटना केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 1995 और 2000 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की।

2004 में वे भागलपुर लोकसभा सीट से सांसद बने। हालांकि 2005 में उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा देकर विधान परिषद का रास्ता चुना, ताकि बिहार की राजनीति में संगठन और सरकार को मजबूती दी जा सके।

Sushil Kumar Modi Anniversary: उपमुख्यमंत्री के रूप में लंबा कार्यकाल

सुशील कुमार मोदी ने 2005 से 2013 और फिर 2017 से 2020 तक बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने वित्त और प्रशासनिक मामलों में अपनी अलग पहचान बनाई।

उनकी छवि एक सख्त लेकिन ईमानदार प्रशासक की रही। भाजपा और जदयू के बीच समन्वय बनाने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती रही, यही कारण है कि उन्हें गठबंधन राजनीति का नायक कहा जाता है।

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Sushil Kumar Modi Anniversary: राज्यसभा और अंतिम राजनीतिक पड़ाव

दिसंबर 2020 में भाजपा ने सुशील कुमार मोदी को राज्यसभा भेजा। वहां भी उन्होंने पार्टी के विचार और बिहार के मुद्दों को मजबूती से रखा।

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले वे गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। कैंसर के कारण 13 मई 2024 को उनका निधन हो गया। उनके निधन से बिहार की राजनीति में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ, जिसकी भरपाई आसान नहीं है।

Sushil Kumar Modi Anniversary: सादगी, अनुशासन और गठबंधन की विरासत

सुशील कुमार मोदी के राजनीतिक मार्गदर्शक के रूप में केएन गोविंदाचार्य को माना जाता है। गोविंदाचार्य अक्सर कहा करते थे कि सुशील मोदी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी, मितव्ययिता और अनुशासन था।

आज उनकी जयंती पर उन्हें याद करते हुए नेताओं ने यह स्वीकार किया कि बिहार में स्थिर गठबंधन राजनीति की नींव रखने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा।

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