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अररिया में सोमवार को कई दिग्गज नेताओं ने अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया है। इस दौरान अररिया के पूर्व सांसद सरफराज आलम ने भी जोकीहाट विधानसभा से आरजेडी प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया। वहीं सिकटी विधानसभा क्षेत्र से निवर्तमान विधायक विजय कुमार मंडल ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। अररिया के निवर्तमान विधायक आबिदुर रहमान ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शगुफ्ता अजीम ने अररिया विधानसभा क्षेत्र से जदयू प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। इस तरह से अररिया से 9, सिकटी से 6, जोकीहाट से 3, रानीगंज से 5, फारबिसगंज से 5 और नरपतगंज से 8 प्रतियाशियों ने नामांकन पर्चा दाखिल किया है। कुल 36 प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया है। सभी प्रतियाशियों ने सिर्फ विकास की बात कही।

बता दें कि इस बार जाकिहाट सीट हॉट सीट बनी हुई है। इस बार अररिया से पूर्व सांसद सरफराज आलम फिर से मैंदान में हैं। बता दें कि वे जोकिहाट सीट से तीन बार चुन कर बिहार विधानसभा पहुंचे हैं। साल 2000, 2010 और 2015 में वे इस सीट से विधायक रहे थे। इनमें से दो बार वे 2010 और 2015 में वे जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे। आपको बता दें कि सरफराज आलम को 2016 में जदयू की ओर से पार्टी से बाहर निकाल दिया था, इसके पीछे कारण था कि उपनर आरोप थे कि उन्होंने ट्रेन में सफर के दौरान एक दंपति के संग मिसबीहेव करने का आरोप लगा था।

सरफराज ने इसके बाद आरजेडी का दामन थाम लिया था। अररिया उपचुनाव के दौरान उन्हें राजद की ओर से टिकट मिला ओर वो इस सीट से जीत गए। इस बार उन्हें चुनौती दे रहे हैं बीजेपी की ओर से रंजीत यादव। बता दें कि जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के 41 वर्षीय भाजपा के युवा प्रत्याशी महंगी व लक्ज़री गाड़ियों के शौकीन तो हैं। साथ ही करोड़ों की जायदाद के मालिक भी हैं।

बात इस सीट की करें तो जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र का गठन 1967 में हुआ और नजमुद्दीन पहले विधायक बने। इसके बाद 1969 के चुनाव में पहली बार तस्लीमुद्दीन परिवार का दबदबा बना और यह कायम रहा। तस्लीमुद्दीन के 2017 में निधन के बाद लोकसभा उपचुनाव में जहां उनके बेटे सरफराज आलम सांसद चुने गए तो विधानसभा उपचुनाव में उनके छोटे पुत्र मो.. शाहनवाज ने आरजेडी के टिकट पर जीत दर्ज की।

वर्ष 1969 में हुए चुनाव के बाद से लेकर पिछले उपचुनाव तक के परिणाम बताते हैं कि विरोधियों की तमाम कोशिशों और एकजुटता के बावजूद तस्लीमुद्दीन परिवार के मजबूत किले को एक दो बार ही भेदने में सफलता मिली है।

दरअसल परिसीमन के बाद जोकीहाट विधानसभा में जहां प्रखंड की 27 पंचायतों के साथ-साथ पलासी प्रखंड की 12 पंचायतों को भी शामिल किया गया। इससे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और जातीय समीकरण में बदलाव आया। इसके बावजूद राजनीति की कमान उसी परिवार के हाथ में रही। जोकीहाट विधानसभा अब भी कमो.बेस मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। इसके अलावा मंडल व यादव जाति के मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं।

जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के एक बड़ी आबादी की समस्या साल दर साल बाढ़ से होने वाली तबाही है। परमान और बकरा नदी के बीच स्थित प्रखंड के दक्षिणी भाग की दर्जन भर पंचायत के लोग बाढ़ को लेकर परेशान रहते हैं। हाल के दिनों में उदा में बने स्क्रपाइल पुल के अचानक ध्वस्त हो जाने से प्रखंड दो हिस्सों में बंट गया। दक्षिणी भाग का संपर्क मुख्यालय से पूरी तरह भंग हो चुका।

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