Tej Pratap Yadav BJP: 7 बड़े संकेत,क्या तेज प्रताप यादव BJP के करीब जा रहे हैं? विजय सिन्हा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल

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विजय सिन्हा से मुलाकात के बाद तेज प्रताप यादव
Highlights
  • • तेज प्रताप यादव की विजय सिन्हा से मुलाकात • वायरल वीडियो से बढ़ी BJP नजदीकी की चर्चा • चूड़ा–दही भोज के सियासी मायने • तेजस्वी यादव से बढ़ती दूरी • बिहार की राजनीति में नए समीकरण के संकेत

बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या तेज प्रताप यादव अब खुद को भारतीय जनता पार्टी के करीब लाने की तैयारी में हैं। उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा से उनकी हालिया मुलाकात और उससे जुड़े घटनाक्रम ने इस अटकल को और तेज कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि आने वाले दिनों की बड़ी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

Tej Pratap Yadav Vijay Sinha Meeting: वीडियो वायरल, बढ़ी चर्चाएं

राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव द्वारा पार्टी और परिवार से बाहर किए जाने के बाद तेज प्रताप यादव अपने लिए नया राजनीतिक रास्ता तलाशते दिख रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को उनकी मुलाकात बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा से हुई। यह मुलाकात पूरी तरह सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, लेकिन इसके राजनीतिक मायने दूर तक जाते दिखाई दे रहे हैं।

इस दौरान तेज प्रताप यादव ने विजय सिन्हा को मकर संक्रांति पर आयोजित चूड़ा–दही भोज के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया। इतना ही नहीं, इस मुलाकात का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दोनों नेताओं को आपस में निजी फोन नंबर का आदान-प्रदान करते हुए देखा गया। यही वीडियो इस पूरी चर्चा का केंद्र बन गया है।

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Tej Pratap Yadav BJP: क्या NDA से बढ़ रही है नजदीकी?

Tej Pratap Yadav BJP: 7 बड़े संकेत,क्या तेज प्रताप यादव BJP के करीब जा रहे हैं? विजय सिन्हा से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल 1

वीडियो सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि तेज प्रताप यादव अब भाजपा और एनडीए के नेताओं के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। विजय सिन्हा से मुलाकात को महज़ औपचारिक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक सोची-समझी राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

खासकर विधानसभा चुनाव में मिली हार और पारिवारिक-राजनीतिक अलगाव के बाद तेज प्रताप यादव अब अपने लिए एक नया सियासी ठिकाना मजबूत करने में जुटे हैं। जानकारों का मानना है कि वे खुद को ऐसे विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं, जो भविष्य में किसी भी बड़े गठबंधन का हिस्सा बन सके।

Tej Pratap Yadav Political Future: नया मंच, नई रणनीति

तेज प्रताप यादव की गतिविधियों से यह साफ़ संकेत मिल रहा है कि वे अब बड़े राजनीतिक मंच की तैयारी कर रहे हैं। वे ऐसा मंच सजा रहे हैं, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोनों एक साथ नजर आ सकते हैं। इसके अलावा बिहार की राजनीति से जुड़े तमाम बड़े चेहरों को एक मंच पर लाने की पहल भी वे कर रहे हैं।

यह पहल केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि खुद को एक स्वतंत्र राजनीतिक धुरी के रूप में स्थापित करने की कोशिश मानी जा रही है। तेज प्रताप अब केवल लालू परिवार के सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि एक अलग राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

Tej Pratap Yadav Chura Dahi Bhoj: परंपरा या सियासी संदेश?

बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर चूड़ा–दही भोज की परंपरा बेहद पुरानी है। वर्षों तक यह आयोजन राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव करते रहे हैं, जिसे सामाजिक समरसता और राजनीतिक मेल-जोल का प्रतीक माना जाता रहा है।

अब इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा–दही भोज का आयोजन करने जा रहे हैं। तेज प्रताप ने साफ़ कहा है कि यह आयोजन पूरी तरह सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

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Bihar Politics Tej Pratap: आयोजन के पीछे छिपे सियासी संकेत

हालांकि तेज प्रताप यादव इसे सामाजिक आयोजन बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसके गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के बीच बढ़ती दूरी अब सार्वजनिक रूप से दिखने लगी है। वहीं दूसरी ओर भाजपा और एनडीए के नेताओं से उनकी बढ़ती नजदीकियों की चर्चा भी लगातार तेज होती जा रही है।

ऐसे में मकर संक्रांति का यह चूड़ा–दही भोज केवल परंपरा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।

निष्कर्ष: तेज प्रताप यादव की चाल, बिहार की राजनीति में हलचल

विजय सिन्हा से मुलाकात, वायरल वीडियो और चूड़ा–दही भोज का आयोजन—ये सभी घटनाएं मिलकर यह संकेत देती हैं कि तेज प्रताप यादव अब अपनी राजनीति को नए सिरे से परिभाषित करने में जुटे हैं। वे किस ओर जाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि उनकी हर गतिविधि बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर रही है।

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