Tej Pratap Yadav : 7 महीने बाद आखिरकार तेज प्रताप यादव की राबड़ी आवास में एंट्री,राजद खेमे में बढ़ी सरगर्मी

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राबड़ी आवास में मां से मिलते तेज प्रताप यादव
Highlights
  • • 7 महीने बाद राबड़ी आवास पहुंचे तेज प्रताप • मां राबड़ी देवी के जन्मदिन पर भावुक मुलाकात • न लालू यादव मौजूद, न तेजस्वी यादव • सोशल मीडिया पोस्ट में छलका दर्द • बिहार की राजनीति में नई अटकलें तेज

नया साल अक्सर नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन 1 जनवरी 2026 लालू परिवार के लिए सिर्फ तारीख बदलने का दिन नहीं था। यह दिन रिश्तों, सियासत और भावनाओं की उस जमी बर्फ को टटोलने का मौका बन गया, जो पिछले सात महीनों से लालू परिवार और राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति में साफ दिखाई दे रही थी।

सात महीने पहले जिन तेज प्रताप यादव को पार्टी की तंजीम और पारिवारिक दायरे से बाहर कर दिया गया था, वही तेज प्रताप अचानक 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास पहुंचे। इस एक कदम ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया। सवाल उठने लगे—क्या यह सिर्फ एक बेटे का मां से मिलने का भावनात्मक पल था, या फिर लालू परिवार की सियासत में किसी बड़े बदलाव की आहट?

Tej Pratap Yadav News: सात महीने पहले क्यों टूटा था रिश्ता?

मई 2025 में वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति में भूचाल ला दिया था। निजी जीवन से जुड़ा विवाद देखते ही देखते पार्टी और परिवार की प्रतिष्ठा से जोड़ दिया गया। लालू प्रसाद यादव ने उस वक्त साफ शब्दों में यह संदेश दिया कि व्यक्तिगत जीवन और पार्टी की मर्यादा को एक तराजू में नहीं तौला जा सकता।

इसी फैसले के तहत तेज प्रताप यादव को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। साथ ही उन्हें राबड़ी आवास छोड़ने का निर्देश भी मिला। इस निर्णय पर तेजस्वी यादव की सहमति ने यह साफ कर दिया कि यह केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक फैसला था।

इसके बाद तेज प्रताप की सोशल मीडिया गतिविधियों में पीड़ा, अकेलापन और विद्रोह साफ झलकने लगा। कभी भावुक पोस्ट, कभी सियासी तंज—हर शब्द में यह अहसास दिखता रहा कि वह खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।

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Tej Pratap Yadav News: 1 जनवरी को राबड़ी आवास पहुंचने का क्या है मायने?

Tej Pratap Yadav : 7 महीने बाद आखिरकार तेज प्रताप यादव की राबड़ी आवास में एंट्री,राजद खेमे में बढ़ी सरगर्मी 1

नये साल के पहले दिन अचानक राबड़ी आवास पहुंचना अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। खास बात यह रही कि उस वक्त न लालू यादव घर पर मौजूद थे और न ही तेजस्वी यादव। कोई बड़ा नेता या पार्टी पदाधिकारी भी वहां नजर नहीं आया।

राबड़ी देवी के जन्मदिन पर मां और बेटे ने साथ बैठकर केक काटा। कैमरों में कैद यह पल पूरी तरह भावनात्मक था। न कोई सियासी भाषण, न कोई बयानबाज़ी—बस मां और बेटे का रिश्ता। तस्वीरों ने यही संदेश दिया कि राजनीति चाहे जितनी कठोर हो, मां के सामने सारे मतभेद पिघल जाते हैं।

Tej Pratap Yadav News: तेज प्रताप के शब्दों में छुपा दर्द और अपनापन

राबड़ी आवास से निकलने के बाद तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि वह केवल अपनी मां से मिलने आए थे। मां का जिक्र करते ही उनकी आवाज़ में भावनाओं का भार साफ महसूस हुआ।

बाद में सोशल मीडिया पर उन्होंने मां को “परिवार की आत्मा” बताया और लिखा कि जब ईश्वर हर जगह मौजूद नहीं हो सकता, तब वह मां को धरती पर भेज देता है। यह बयान केवल भावुक शब्दों का संग्रह नहीं था, बल्कि उस मानसिक स्थिति को भी दर्शाता था, जिसमें वह पिछले कई महीनों से गुजर रहे हैं।

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Tej Pratap Yadav News: लालू परिवार की चुप्पी क्या इशारा कर रही है?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा परिवार की चुप्पी को लेकर हो रही है। लालू प्रसाद यादव उस समय दिल्ली में थे, जबकि तेजस्वी यादव विदेश यात्रा पर बताए जा रहे हैं। किसी की ओर से न स्वागत का बयान आया और न विरोध का।

राजनीति में खामोशी अक्सर शब्दों से ज्यादा गहरी होती है। यही कारण है कि तेज प्रताप की यह मुलाकात अब सिर्फ पारिवारिक घटना नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं।

Tej Pratap Yadav News: क्या सुलह की ओर बढ़ रहा है लालू परिवार?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मुलाकात आने वाले दिनों में किसी सियासी सुलह की नींव बनेगी? क्या तेज प्रताप की पार्टी में वापसी की राह कभी खुलेगी? या फिर यह सिर्फ मां-बेटे के रिश्ते तक सीमित एक भावनात्मक क्षण बनकर रह जाएगा?

बिहार की राजनीति फिलहाल इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है। फिलहाल कोई आधिकारिक संकेत नहीं है, लेकिन इतना तय है कि यह मुलाकात आने वाले दिनों में कई राजनीतिक अटकलों को जन्म देती रहेगी।

Tej Pratap Yadav News: भावनाओं और राजनीति के बीच फंसा एक परिवार

लालू परिवार की राजनीति हमेशा भावनाओं और सत्ता के बीच झूलती रही है। तेज प्रताप की राबड़ी आवास में एंट्री ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि रिश्तों की गर्माहट को राजनीति की ठंडक पूरी तरह खत्म नहीं कर पाती।

नया साल इस परिवार के लिए क्या नई शुरुआत लेकर आएगा या पुराने फैसलों पर ही सियासत आगे बढ़ेगी—इसका जवाब वक्त देगा। लेकिन इतना तय है कि 1 जनवरी 2026 की यह तस्वीर बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा में रहेगी।

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