Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: तेजस्वी यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत की उम्मीद, CBI से मांगा जवाब

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IRCTC स्कैम केस में तेजस्वी यादव की अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई
Highlights
  • • तेजस्वी यादव की अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI से जवाब मांगा • IRCTC स्कैम केस में आरोप तय करने के आदेश को दी गई चुनौती • अगली सुनवाई 14 जनवरी को, लालू यादव की याचिका भी उसी दिन • ट्रायल कोर्ट ने 14 आरोपियों के खिलाफ तय किए थे चार्ज • IPC और PC एक्ट की गंभीर धाराएं लागू

बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अहम घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित IRCTC स्कैम केस में तेजस्वी यादव द्वारा दाखिल अर्जी पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जवाब मांगा है। यह अर्जी ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है।

इस घटनाक्रम को केवल कानूनी प्रक्रिया के तौर पर नहीं, बल्कि बड़े सियासी संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह मामला सीधे लालू परिवार और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा हुआ है।

Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की बेंच ने जारी किया नोटिस

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने तेजस्वी यादव की अर्जी और स्टे एप्लीकेशन पर CBI को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने एजेंसी से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 14 जनवरी तय की है।

खास बात यह है कि इसी दिन राजद सुप्रीमो और तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद यादव की इसी तरह की याचिका पर भी सुनवाई होनी है। ऐसे में 14 जनवरी की तारीख इस पूरे मामले में बेहद अहम मानी जा रही है।

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Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: ट्रायल पर रोक से हाई कोर्ट का इनकार

Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: तेजस्वी यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत की उम्मीद, CBI से मांगा जवाब 1

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार, 5 जनवरी को लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था। कोर्ट के इस रुख के बाद यह संकेत मिला था कि न्यायिक प्रक्रिया अपने तय दायरे में आगे बढ़ेगी।

हालांकि तेजस्वी यादव की याचिका पर CBI से जवाब मांगे जाने को कानूनी रूप से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके पक्ष को हाई कोर्ट में अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा।

Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: 13 अक्टूबर 2025 को तय हुए थे आरोप

13 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव समेत कुल 14 आरोपियों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।

इन आरोपों में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इसके बाद तेजस्वी यादव और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: क्या है पूरा मामला?

यह मामला इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के दो होटलों के ऑपरेशनल कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है। आरोप है कि इन होटलों का संचालन एक निजी फर्म को देने में नियमों की अनदेखी और कथित गड़बड़ियां की गईं।

CBI का दावा है कि इस प्रक्रिया में सरकारी पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ पहुंचाया गया, जबकि बचाव पक्ष इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताता रहा है।

Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: किन धाराओं में आरोप तय

ट्रायल कोर्ट ने कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। लालू प्रसाद यादव के अलावा प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 13(2) के साथ सेक्शन 13(1)(d)(ii) और (iii) के तहत आरोप तय किए गए हैं।

इन धाराओं का संबंध सरकारी कर्मचारी द्वारा पद के दुरुपयोग और आपराधिक कदाचार से जुड़ा है। सेक्शन 13(2) के तहत अधिकतम 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है।

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Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: IPC की धाराएं भी लागू

कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मेसर्स LARA प्रोजेक्ट्स LLP, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत भी आरोप तय करने का निर्देश दिया था।

इसके साथ ही सभी 14 आरोपियों पर IPC की धारा 120B (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) के तहत कॉमन चार्ज लगाने का आदेश दिया गया। धोखाधड़ी के मामले में अधिकतम सात साल की सज़ा का प्रावधान है।

Tejashwi Yadav IRCTC Scam Case: सियासी असर और आगे की राह

केवल कोर्ट रूम तक सीमित नहीं है। बिहार की राजनीति में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इस केस को लेकर राजद पर हमला करता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताता है।

अब दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा CBI से जवाब मांगे जाने के बाद यह मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। 14 जनवरी की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि उसी दिन यह तय होगा कि तेजस्वी यादव को इस मामले में आगे क्या कानूनी राहत मिल सकती है।

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