Water bankruptcy in world: दुनियाभर में जल संकट विकराल समस्या बन कर खड़ी हो गई है। यूनाइटेड नेशंस की नई रिपोर्ट में यह बात साफ-साफ कही गई है कि विश्व की आधी आबादी यानी लगभग चार अरब लोग भयंकर जल संकट से जूझ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय जल, पर्यावरण और स्वास्थ्य संस्थान (यूएनयू-आईएनडब्ल्यूईएच) की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया के 100 सबसे बड़े शहरों में आधे शहरों को गंभीर पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें दिल्ली, बीजिंग, न्यूयॉर्क और रियो जैसे बड़े शहर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 39 शहरों में स्थिति बेहद गंभीर है।
- Water bankruptcy in world: जल दिवालियापन’ की अवधारणा
- Water bankruptcy in world: 4 अरब लोग पानी की कमी से जूझ रहे
- Water bankruptcy in world:भारत के बड़े शहर जल संकट की चपेट में
- Water bankruptcy in world: झील, ग्लेशियर और ग्राउंड वाटर में गिरावट
- Water bankruptcy in world: चेन्नई डे जीरो के करीब
- Water bankruptcy in world: निराश-हताश होने की जरूरत नहीं
Water bankruptcy in world: जल दिवालियापन’ की अवधारणा
रिपोर्ट में जल संकट को ‘जल दिवालियापन’कहा गया है और दल दिवालियापन की अवधारणा पेश की गई है, जिसे दो स्थितियों से परिभाषित किया गया है। एक बात है कि क्या जल की कमी को पूरा कर पाने में दुनिया बिल्कुल असमर्थ हो गई है जिले Insolvency कहते हैं। दूसरी बात है कि जल संकट से मुक्ति पाने में हद से ज्यादा कठिनाई है, जिसे अंग्रेजी में Irreversibility कहा जाता है। यहां जल संकट को दूर कर पाने में असमर्थता यानी Insolvency का अर्थ है कि जल की उपलब्धता और उसकी सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक मात्रा में पानी का उपयोग और उसे प्रदूषित किया जाना । वहीं, जल संकट से निजात पाने की स्थिति में बेहद कठिनाई से तात्पर्य, आर्द्रभूमि या झीलों जैसे जल-आधारित प्राकृतिक संसाधनों को पहुँचने वाले नुक़सान से है, जिसकी वजह से जल प्रणाली को उसकी मूल स्थिति में लौटाना सम्भव नहीं रह जाता है।
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Water bankruptcy in world: 4 अरब लोग पानी की कमी से जूझ रहे
यूएनयू-आईएनडब्ल्यूईएच की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में नदियां और झीलें तेजी से सिकुड़ रही हैं, भूमिगत जल का स्तर गिर रहा है और वाटरलैंड सूख रही हैं। जमीन धंस रही है, सिंकहोल बन रहे हैं और रेगिस्तान फैल रहे हैं। हर साल करीब 4 अरब लोग कम से कम एक महीने तक पानी की कमी का सामना करते हैं।

Water bankruptcy in world:भारत के बड़े शहर जल संकट की चपेट में
यूएनयू-आईएनडब्ल्यूईएच की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की राजधानी दिल्ली जल संकट में चौथे स्थान पर है। कोलकाता 9वें, मुंबई 12वें, बेंगलुरु 24वें और चेन्नई 29वें स्थान पर हैं। इसके अलावा हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत और पुणे भी लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे हैं। लगभग यही हालात अफगानिस्तान की राजधानी काबुल का भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान पहला आधुनिक शहर बन सकता है जहां पानी पूरी तरह खत्म हो जाए। मैक्सिको सिटी हर साल करीब 20 इंच की दर से धंस रही है क्योंकि भूमिगत जल अधिक उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी राज्यों में कोलोराडो नदी के पानी को लेकर विवाद चल रहा है।
Water bankruptcy in world: झील, ग्लेशियर और ग्राउंड वाटर में गिरावट
1990 के बाद से दुनिया की आधी बड़ी झीलों में पानी कम हो गया है। जमीन के नीचे मौजूद पानी के भंडार लगातार 70 प्रतिशत तक घट चुके हैं। पिछले 50 सालों में यूरोप की बहुत सारी नमी वाली जमीनें यानी आर्द्रभूमि खत्म हो चुकी हैं। 1970 के बाद से ग्लेशियरों का आकार करीब 30 प्रतिशत कम हो गया है।
Water bankruptcy in world: चेन्नई डे जीरो के करीब
तेहरान लगातार छठे साल सूखे का सामना कर रहा है और डे जीरो के बेहद करीब है, यानी वो दिन जब नागरिकों के लिए बिल्कुल पानी नहीं बचेगा। केप टाउन और चेन्नई भी पहले इसी स्थिति के करीब पहुंच चुके हैं।यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर वाटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ डिपार्ट्मेंट के डायेक्टर कावेह मदानी का कहना है कि एक नई और सीमित वास्तविकता के साथ जीना सीखना होगा।

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Water bankruptcy in world: निराश-हताश होने की जरूरत नहीं
हालाँकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। कावेह मदानी ने वित्तीय संकट की तुलना करते हुए कहा कि दिवालियापन, किसी कार्रवाई का अन्त नहीं, बल्कि सुधार की एक व्यवस्थित प्रक्रिया की शुरुआत होता है। उन्होंने कहा, इसका अर्थ है पहले नुक़सान को रोकना, आवश्यक सेवाओं की रक्षा करना और फिर प्रणाली के पुनर्निर्माण में निवेश करना।
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