भारत के बजट 2026 में घोषित कंटेंट क्रिएटर लैब योजना ने शिक्षा नीति की प्राथमिकताओं पर एक गहरी बहस छेड़ दी है। यह बहस किसी कर दर, सब्सिडी या वित्तीय प्रावधान से आगे बढ़कर उस वैचारिक दिशा को लेकर है, जिसमें देश की आने वाली पीढ़ी को आगे बढ़ाया जा रहा है। जब देश के लाखों सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हों, तब कंटेंट क्रिएशन जैसी उन्नत डिजिटल संरचना पर जोर देना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
- Budget 2026 Content Creator Lab: शिक्षा बनाम डिजिटल लोकप्रियता की बहस
- Budget 2026 Content Creator Lab: बुनियादी ढांचा कमजोर, डिजिटल छलांग तेज
- Budget 2026 Content Creator Lab: असमानता और गहरी होने का खतरा
- Budget 2026 Content Creator Lab: शिक्षा का सरलीकरण या अवमूल्यन?
- Budget 2026 Content Creator Lab: स्क्रीन संस्कृति और बचपन का संकट
- Budget 2026 Content Creator Lab: भविष्य निर्माण या वैचारिक प्रयोग?
- Budget 2026 Content Creator Lab: असली जरूरत क्या है?
Budget 2026 Content Creator Lab: शिक्षा बनाम डिजिटल लोकप्रियता की बहस
घोषणा के अनुसार देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में एवीजीसी—एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स—से जुड़ी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएँगी। इसे भविष्य के कौशल, डिजिटल अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाती है।
देश के कई राज्यों—विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़—में सरकारी स्कूलों की स्थिति आज भी बेहद कमजोर है। कहीं भवन जर्जर हैं, कहीं शिक्षक नहीं, तो कहीं बच्चे ही स्कूल से गायब हैं। कई स्कूलों में शौचालय, पीने का पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डिजिटल लैब बुनियादी शिक्षा की कमी की भरपाई कर सकती है?
Budget 2026 Content Creator Lab: बुनियादी ढांचा कमजोर, डिजिटल छलांग तेज

शिक्षा का ढांचा किसी भी राष्ट्र की बौद्धिक नींव होता है। यदि वही कमजोर हो, तो उस पर खड़ी डिजिटल संरचना कितनी टिकाऊ होगी—यह विचारणीय है।
जब प्राथमिक कक्षाओं में नियमित पढ़ाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही, जब शिक्षकों की उपस्थिति जांचने के लिए अधिकारियों को वीडियो कॉल का सहारा लेना पड़ता है, तब कंटेंट क्रिएटर लैब की घोषणा एक असंतुलित प्राथमिकता का संकेत देती है।
तकनीक तभी सार्थक होती है, जब उसकी बुनियाद मजबूत हो।
जिस बच्चे को भाषा, गणित और विज्ञान की मूलभूत समझ ही अधूरी हो, वह डिजिटल कंटेंट क्या बनाएगा—ज्ञान का विस्तार या सतही मनोरंजन?
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Budget 2026 Content Creator Lab: असमानता और गहरी होने का खतरा
इस योजना का सबसे चिंताजनक पहलू सामाजिक-शैक्षिक असमानता से जुड़ा है।
डिजिटल संसाधनों का लाभ वही छात्र उठा पाएगा, जो पहले से संसाधन-सम्पन्न है—निजी स्कूलों से पढ़ा शहरी वर्ग। वहीं ग्रामीण और सरकारी स्कूलों का छात्र, जिसकी बुनियाद ही कमजोर है, इस दौड़ में और पीछे छूट जाएगा।
इस प्रकार यह योजना समान अवसर का माध्यम बनने के बजाय असमानता को और वैध बना सकती है।
लैब किसके लिए होंगी?
उन छात्रों के लिए जिन्हें पढ़ने-लिखने की बुनियादी दक्षता ही नहीं?
या उन संस्थानों के लिए जो पहले से डिजिटल रूप से सक्षम हैं?
Budget 2026 Content Creator Lab: शिक्षा का सरलीकरण या अवमूल्यन?
यह बहस तकनीक बनाम शिक्षा की नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं की है।
डिजिटल कौशल आवश्यक हैं, इसमें कोई विवाद नहीं। लेकिन क्या उन्हें बुनियादी शिक्षा से पहले रखा जाना चाहिए?
यह योजना युवाओं को यह संदेश देती प्रतीत होती है—
सोचो कम, रिकॉर्ड करो ज़्यादा।
समझो कम, अपलोड करो ज़्यादा।
ध्यान, धैर्य और अध्ययन की जगह वायरल लोकप्रियता को सफलता का पैमाना बनाना शिक्षा के दीर्घकालिक उद्देश्य को कमजोर करता है।
Budget 2026 Content Creator Lab: स्क्रीन संस्कृति और बचपन का संकट
दुनिया के कई विकसित देश आज बच्चों को स्क्रीन-लत से बचाने की नीतियाँ बना रहे हैं। सोशल मीडिया उपयोग की न्यूनतम आयु तय की जा रही है, स्कूलों में स्क्रीन-टाइम सीमित किया जा रहा है।
ऐसे समय में कंटेंट क्रिएशन को संस्थागत बढ़ावा देना एक विरोधाभासी नीति प्रतीत होती है।
जिस उम्र में बच्चों को किताब, खेल और संवाद सिखाया जाना चाहिए, उसी उम्र में उन्हें कैमरा, ट्रेंड और व्यूज़ की दौड़ में धकेलना मनोवैज्ञानिक और सामाजिक जोखिम भी पैदा कर सकता है।
Budget 2026 Content Creator Lab: भविष्य निर्माण या वैचारिक प्रयोग?
नीति-निर्माण केवल कौशल निर्माण नहीं, चेतना निर्माण भी होता है।
यदि शिक्षा व्यवस्था का फोकस ज्ञान से हटकर दृश्य लोकप्रियता पर शिफ्ट होता है, तो यह आने वाली पीढ़ी की बौद्धिक दिशा को प्रभावित करेगा।
रोजगार, शोध, विज्ञान और नवाचार की नींव मजबूत शिक्षा पर ही टिकती है—रील संस्कृति पर नहीं।
डिजिटल अवसरों का स्वागत होना चाहिए, लेकिन शिक्षा के विकल्प के रूप में नहीं—पूरक के रूप में।
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Budget 2026 Content Creator Lab: असली जरूरत क्या है?
देश को कंटेंट क्रिएटर लैब से पहले चाहिए—
• नियमित चलने वाले स्कूल
• प्रशिक्षित और उपस्थित शिक्षक
• सुरक्षित भवन
• पुस्तकालय और प्रयोगशालाएँ
• जवाबदेह शिक्षा तंत्र
बिना इन आधारों के डिजिटल भविष्य के दावे खोखले ही रहेंगे।
डिजिटल भारत का सपना महत्वपूर्ण है, लेकिन शिक्षा की कीमत पर नहीं। कैमरा किताब का विकल्प नहीं हो सकता।
यदि प्राथमिकताएँ संतुलित नहीं रहीं, तो कंटेंट क्रिएशन अवसर नहीं, विचलन बन सकता है। राष्ट्र निर्माण ज्ञान से होता है, व्यूज़ से नहीं।
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