Bihar Politics: दही-चूड़ा भोज से दूरी, क्या बिहार कांग्रेस में टूट तय?

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सदाकत आश्रम में दही-चूड़ा भोज के दौरान कांग्रेस नेता
Highlights
  • • सदाकत आश्रम में परंपरागत दही-चूड़ा भोज का आयोजन • कांग्रेस के सभी छह विधायक कार्यक्रम से रहे दूर • संगठन और विधायकों के बीच बढ़ती दूरी के संकेत • राजनीतिक गलियारों में टूट की अटकलें तेज • आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। मकर संक्रांति जैसे पारंपरिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जब पार्टी के ही विधायक शामिल न हों, तो सवाल उठना लाज़मी है। सदाकत आश्रम में आयोजित दही-चूड़ा भोज के दौरान ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रदेश की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता तो मौजूद रहे, लेकिन कांग्रेस के सभी छह विधायक इस आयोजन से दूर नजर आए। इस गैरमौजूदगी ने संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और राजनीतिक गलियारों में टूट की अटकलें तेज हो गई हैं।

Bihar Politics: सदाकत आश्रम का आयोजन और विधायकों की गैरहाज़िरी

मकर संक्रांति के अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय सदाकत आश्रम में परंपरागत दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वर्षों से पार्टी की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है, जिसमें नेता और कार्यकर्ता एक मंच पर जुटते हैं।
इस बार भी आयोजन प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में हुआ और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्व की खुशियों के साथ आपसी संवाद और संगठनात्मक मजबूती को आगे बढ़ाना था।

हालांकि, इस पूरे आयोजन में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय पार्टी के छह विधायकों की अनुपस्थिति रही। न तो किसी विधायक ने कार्यक्रम में शिरकत की और न ही उनकी ओर से कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक रूप से सामने आया। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में इसे साधारण अनुपस्थिति नहीं, बल्कि गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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Bihar Politics: क्या कांग्रेस विधायकों में असंतोष गहराता जा रहा है?

Bihar Politics: दही-चूड़ा भोज से दूरी, क्या बिहार कांग्रेस में टूट तय? 1

पार्टी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस के विधायक पिछले कुछ समय से संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। दही-चूड़ा भोज जैसे पारंपरिक आयोजन में शामिल न होना इस असंतोष को और स्पष्ट करता है।
कार्यकर्ताओं के बीच भी यह चर्चा आम हो गई है कि विधायकों और संगठन के बीच तालमेल की कमी बढ़ती जा रही है। कुछ लोग इसे नेतृत्व से नाराज़गी से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे भविष्य की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित होता है और इसमें आमतौर पर सभी विधायक शामिल होते रहे हैं। ऐसे में इस बार सभी छह विधायकों का एक साथ दूरी बनाना, सामान्य घटना नहीं मानी जा रही।

Bihar Politics: वरिष्ठ नेताओं के बयान और संगठन का पक्ष

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए सामाजिक सौहार्द और भाईचारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व समाज को जोड़ने का काम करते हैं और नफरत के माहौल को खत्म करने में सहायक होते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी प्रदेशभर में मनरेगा सहित जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार अभियान चला रही है और जनता के सवालों को सड़क से सदन तक उठाया जा रहा है।

हालांकि, विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई, लेकिन अंदरखाने चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।

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Bihar Politics: टूट की अटकलें और भविष्य की सियासत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विधायकों की यह दूरी आगे भी बनी रहती है, तो इसका असर पार्टी की साख और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।
अगर विधायक सचमुच पार्टी से नाता तोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। बिहार की राजनीति में पहले से ही समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे में कांग्रेस के भीतर असंतोष विपक्षी दलों के लिए अवसर बन सकता है।

फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन दही-चूड़ा भोज से विधायकों की दूरी ने यह जरूर साबित कर दिया है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस चुनौती से कैसे निपटता है।

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